टोंक विधानसभा क्षेत्र की सियासत में संभावनाओं से युक्त युवा चेहरे-1


भविष्य में छुपे रूस्तम साबित होंगे संघ से जुड़े अशोक कासलीवाल


Tonk news (भावना बुन्देल) मौजूदा दौर तक महत्वाकांक्षाओं का टकराव जिले के राजनीतिक गलियारों में अंतर्कलह, मनभेद, दरमियानी खटास और अन्दरूनी वैमनस्यता के चरम का स्पर्श कर चुका है। कमोबेश कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सिरफुटौव्वल के इस माहौल से व्यथित हैं। राजनीतिक पटल पर धुंध और कुहासा भरे वातावरण में परिवर्तन की आहट महसूस की जा रही है।

टोंक विधानसभा क्षेत्र की सियासत में संभावनाओं से युक्त युवा चेहरे-1 1
अशोक कासलीवाल

नियति का नियम भी है। ऐसे में 2023 बदलाव की नई- नई संभावनाओं को लाने का काम करेगा, इसमें कोई संशय नहीं। स्वाभाविक है नई- नई उम्मीदें भी जगेंगी। इसी दृष्टि से इस कॉलम का आगाज़ किया जा रहा है, जिसमें जिले के युवा तुर्कों को मंज़रे- आम पर लाने की कवायद होगी।


राजनीतिक मनोमालिन्य के घटाटोप में रोशनी की नई किरण


12 साल की उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता बनने वाले अशोक कासलीवाल इस वक़्त टोंक शहर के जाने- माने सीनियर वकील हैं, जिनके मार्गदर्शन में एक दर्जन एडवोकेट बतौर एसोसिएट्स काम करते हैं। अधिवक्ता के रूप में 24 साल से प्रैक्टिस कर रहे अशोक कासलीवाल को जिले में अत्यंत सौम्य, ईमानदार, संस्कारित, सामाजिक सरोकारी, ऊर्जावान और स्वच्छ छवि का स्वामी माना जाता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् प्रमुख, भारत विकास परिषद् के संस्थापक मंत्री/ अध्य्क्ष, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् और विद्या भारती के दायित्वों का कुशलता से निर्वहन करने वाले अशोक कासलीवाल सौ फ़ीसदी निर्विवादित हैं।

प्रतिनिधित्व परिवर्तन की उत्साहजनक पदचाप


गीता मन्दिर समिति, नव वर्ष समारोह समिति और गौशाला समिति के मंत्री होने के कारण वे सर्वत्र लोकप्रिय हैं। दो मर्तबा ‘बार एसोसिएशन’ का सचिव और अध्यक्ष रहना भी उनके चमकदार व्यक्तित्व की पुरजोर पुष्टि करता है। भाजपा उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में टोंक से प्रत्याशी बनाने का विचार कर सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अशोक कासलीवाल के नाम पर सबकी सहमति आसानी से बन सकती है! इस बात की प्रबल संभावना है कि भावी राजनीतिक परिदृश्य में नया चेहरा होने के कारण भी वे जनता को ज़्यादा पसंद आएं। समीकरणों के लिहाज से समर्पित कार्यकर्ताओं की फ़ौज, संघ के सर्वाधिक पसंदीदा चेहरे और सेवाभावी युवा होना भी उन्हें टिकट दिलवाने में अहम साबित हो सकता है। माना जाता है कि यदि 2023 के टिकट वितरण में संघ की चली और यूपी की तर्ज़ पर टिकट बांटे गए तो कासलीवाल तुरूप का इक्का साबित होंगे।

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