उपचुनाव के लिए भाजपा को मंडावा और कांग्रेस को खींवसर में प्रत्याशी की तलाश

विधानसभा सीट की बात करें तो यह सीट विधानसभा चुनाव में  भाजपा के बागी रहे हनुमान बेनीवाल के खाते में गई थी। बेनीवाल ने विधानसभा चुनाव में राष्टरीय लोकतांत्रित पार्टी का गठन कर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस सीट से बेनीवाल खुद चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने कांग्रेस के सवाई सिंह चौधरी को 19948 मतों से शिकस्त दी थी

जयपुर

लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई प्रदेश की दो विधानसभा सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। दोनों सीटों पर उपचुनाव अक्तूबर में करवाए जा सकते हैं। उपचुनाव राज्य की नौ माह पुरानी कांग्रेस सरकार के कामकाज का आंकलन माना जाएगा। भाजपा को जहां झुन्झुनंू की  मंडावा सीट से प्रत्याशी की तलाश है। तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस खींवसर में किसी दमदार प्रत्याशी पर दांव खेलना चाहती है।

सूत्रों की माने तो भाजपा खींवसर सीट को लोकसभा चुनाव में सहयोग बने राष्टï्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल की पार्टी को  देने की तैयारी में है। दूसरी तरफ कांग्रेस मंडावा सीट से रीटा चौधरी को उतारने का मानस बना चुकी है। चौधरी ने विधानसभा चुनाव में यह सीट मात्र 2346 वोटों से भाजपा के नरेन्द्र कुमार से हारी थी। ऐसे में कांग्रेस इस सीट के लिए सबसे दमदार उम्मीदवार रीटा चौधरी को मान कर चल रही है।

बेनीवाल ने चौधरी को हराया था

इधर खींवसर विधानसभा सीट की बात करें तो यह सीट विधानसभा चुनाव में  भाजपा के बागी रहे हनुमान बेनीवाल के खाते में गई थी। बेनीवाल ने विधानसभा चुनाव में राष्टरीय लोकतांत्रित पार्टी का गठन कर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस सीट से बेनीवाल खुद चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने कांग्रेस के सवाई सिंह चौधरी को 19948 मतों से शिकस्त दी थी। भाजपा प्रत्याशी यहां से  अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे।

विधानसभा चुनाव में नागौर जिले में भाजपा के दिग्गज माने जाने वाले लगभग सभी या तो धराशाही हो गए थे या फिर उन्हें टिकट नहीं मिला था। ऐसे में लोकसभा चुनाव में केन्द्रीय नेतृत्व के दखल के बाद बेनीवाल की पार्टी से भाजपा ने गठबंधन कर नागौर सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा था। नागौर सीट पर खुद बेनीवाल चुनाव मैदान में उतरे थे। उनकी जीत  के बाद ही उन्होंने खींवसर सीट से इस्तीफा दिया था।