भरतपुर संभाग का सबसे बड़ा आरबीएम बेखौफ होकर श्वानों(कुत्तों ) वार्डों में घूमते हुए दिखाई देते हैं

आरबीएम जिला अस्पताल काम करने वाले कर्मचारी अपनी मनमानी अस्पताल की बड़ी लापरवाही श्वानों(कुत्तों ) अस्पतालों में रखें कचरा पात्रों में मुँह मारते फिरते है भरतपुर (राजेन्द्र शर्मा जती) । भरतपुर संभाग का सबसे बड़ा आरबीएम जिला अस्पताल प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण मरीजों पर भारी पड़ रहा है। अस्पताल में घोर अव्यवस्थाएं फैली …

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June 18, 2018 12:15 pm

आरबीएम जिला अस्पताल काम करने वाले कर्मचारी अपनी मनमानी
अस्पताल की बड़ी लापरवाही श्वानों(कुत्तों ) अस्पतालों में रखें कचरा पात्रों में मुँह मारते फिरते है
भरतपुर (राजेन्द्र शर्मा जती) । भरतपुर संभाग का सबसे बड़ा आरबीएम जिला अस्पताल प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण मरीजों पर भारी पड़ रहा है। अस्पताल में घोर अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं ।अव्यवस्थाओं पर ना तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कोई ध्यान है और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों का |

http://www.dainikreporters.com/2018/06/17/missing-woman-from-soap-kanjar-basti/

 

जिसकी वजह से यहां काम करने वाले कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं ।आरबीएम जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में एसी करीब-करीब खराब पड़े हुए हैं और कूलरों का कोई इंतजाम नहीं है ।भीषण गर्मी में झुलसकर इलाज कराने आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।इतना ही नहीं ड्यूटी कंपाउंडर और चिकित्सक भी बार्ड से नदारद रहते हैं और वह ट्रोमा में बैठकर एसी का आनंद लेते हैं और मरीजों से कह जाते हैं कि अगर कोई परेशानी हो तो आपातकाल इमरजेंसी में आकर बता देना । मरीज जरुरत पड़ने पर चिकित्सा कर्मियों को ढूंढने में लगे रहते हैं ।इसके अलावा अस्पताल में श्वानों(कुत्तों ) का राज चल रहा है । बेखौफ होकर स्वान वार्डों में घूमते हुए दिखाई देते हैं और उन्हें भगाने वाला या रोकने वाला कोई नहीं होता । श्वानों के बेखौफ होकर वार्डों में घूमने से संक्रमण फैलने का पूरा खतरा बना रहता है । स्वान अस्पतालों में रखें कचरा पात्रों में मुँह मारते फिरते है जिनमे मरीजों के इलाज में काम ली जाने वाली खून से सने रुई,पट्टी,इंजेक्शन होते है ।

 

इसके अलावा मरीजों की दवाइयों और उनके खाने पीने के सामान को भी स्वान ले जाते हैं । ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं हो ।लेकिन वो जानबूझकर अनजान बने रहते हैं जिससे चिकित्साकर्मियों और कर्मचारियों के होंसले बुलंद रहते है और मरीज संक्रमण के साए में अपना इलाज कराने को मजबूर होते है ।

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