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प्रधानमंत्री के सपने को जमकर पलीता लगा रहे हैं ओलंपिक संघ के पदाधिकारी

परिवारवाद के चलते देश की प्रतिभाओं का गला घोंटा जा रहा है

 

जयपुर। अगले महीने की 18 तारीख से जकार्ता में होने वाली एशियन गेम्स से पहले वहां भेजे जाने वाले दल में फेडरेशन ने जबरदस्त भाई भतीजावाद का नमूना पेश करते हुए एक ही परिवार के बेटों और बहू को स्थान देते हुए देश के तमाम प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

जानकारी के मुताबिक ओलंपिक महासंघ में सेक्रेटरी डिप्टीराम शर्मा ने अपने बेटे ललित शर्मा, लवण शर्मा और पुत्रवधू रिषाल शर्मा के साथ ही रिषाल शर्मा के पति श्रीकांत शर्मा को टीम में स्थान दे दिया। जबकि ट्रायल में दूसरे नंबर पर आने वाली मीनू कुमारी को बेवजह बाहर बैठा दिया गया।

 

इसको लेकर जब ओलंपिक संघ में शिकायत की गई तो विवाद बढ़ने के कारण रिषाल शर्मा, ललित शर्मा और लवण शर्मा को बाहर कर दिया, लेकिन बीते 6 साल में एक भी इंटरनेशनल गेम में हिस्सा नहीं लेने वाले श्रीकांत शर्मा अभी भी टीम में बने हुए हैं।

 

ओलंपिक महासंघ 6 खिलाड़ियों की जगह केवल एक खिलाड़ी, यानी श्रीकांत शर्मा को जकार्ता भेजने की तैयारी कर रहा है, जबकि ट्रायल में दूसरे नंबर पर आई मीना कुमारी ने इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सहित तमाम जगह शिकायत भेजी है।

 

बता दें कि जकार्ता भेजे जाने वाली टीम में चार कैटेगरी होती है, दो केटेगरी गर्ल्स की और दो केटेगरी बॉयस की। मीनू कुमारी को – 68 किलोग्राम वर्ग बाहर में भेजा जाना था, उन्होंने ट्रायल में दूसरा स्थान हासिल किया था। पहले स्थान पर सरबजोत रही थीं, जिनको भी टीम में स्थान नहीं दिया गया है। इसको लेकर मीनू कुमारी ने भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए इसकी खेल मंत्री, प्रधानमंत्री और ओलंपिक संघ को लिखित में शिकायत दी है।

डिप्टीराम शर्मा ने अपने बड़े बेटे श्रीकांत शर्मा, ललित शर्मा, लवण शर्मा और श्रीकांत शर्मा की पत्नी रिषाल शर्मा को टीम में स्थान देते हुए 6 सदस्य टीम बनाकर जकार्ता भेजने की तैयारी कर दी थी। इस टीम में सरबजोत भी शामिल थीं, लेकिन शिकायत होने के बाद 6 सदस्यों की टीम में से पांच का नाम हटा दिया गया और केवल श्रीकांत शर्मा को जकार्ता में होने वाले एशियन गेम्स के लिए सेलेक्ट किया गया है।

मजेदार बात यह है कि श्रीकांत शर्मा ने साल 2012 से लेकर अब तक एक भी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। अंतिम बार जिस प्रतियोगिता में श्रीकांत शर्मा खेलने गए थे, उसमें वह पहले ही राउंड में बाहर हो गए थे। जबकि बिना ट्रायल के ही जकार्ता भेजे जा रहे श्रीकांत शर्मा के नाम के साथ उनके जो सर्टिफिकेट लगाए गए हैं, उनमें श्रीकांत को साल 2016 में भी इंटरनेशनल गेम खेला हुआ बताया जा रहा है।

इधर, पिछले दिनों देवास में हुई ट्रायल के दौरान सरबजोत और मीनू कुमारी ने – 68 किलोग्राम वर्ग भार में क्वालीफाई किया था, लेकिन अब दोनों ही खिलाड़ी टीम का हिस्सा नहीं हैं। जबकि, बीते 6 साल से एक भी इंटरनेशनल गेम नहीं खेलने वाले श्रीकांत शर्मा को सचिव पिता डिप्टीराम शर्मा की एप्रोच के चलते जकार्ता में होने वाले एशियन गेम्स में भेजा जा रहा है।

एक और जोरदार बात सामने आई है वह यह है, कि डिप्टीराम शर्मा ने 1994 से लेकर अब तक सैम्बो फेडरेशन के इतिहास में अपने परिवार के अलावा किसी भी खिलाड़ी को इंटरनेशनल गेम्स में खेलने का अवसर नहीं दिया है। केवल उन्हीं के परिवार से श्रीकांत शर्मा, ललित शर्मा, लवण शर्मा और पुत्रवधू रिषाल शर्मा ही इंटरनेशनल गेम्स में भेजे जाते रहे हैं।

खिलाड़ियों के साथ भेदभाव का आलम यह है कि मीनू कुमारी ने इंटरनेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई करने के बावजूद मई से लेकर अब तक उनको मंगोलिया में हुए गेम्स के समेत पांच खेलों में हिस्सा लेने के लिए भेजा ही नहीं गया। मीनू कुमारी बताती हैं कि अपनी पुत्रवधू रिषाल शर्मा को एशियन गेम्स में खिलाने के लिए उनको इन गेम्स में खेलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि उन्होंने फेडरेशन को कई बार लिखित में यह कहा है कि यदि बजट का अभाव है तो वह खुद अपने खर्चे पर खेलने जा सकती हैं। लेकिन डिप्टीराम शर्मा की तानाशाही का आलम यह है कि वह जिसको चाहते हैं, उसी को इंटरनेशनल गेम्स में खेलने के लिए भेजते हैं, प्रतिभाओं के साथ उनका कोई समन्वय नहीं है। फेडरेशन की स्थापना से लेकर अब तक इन 24 सालों में सचिव डिप्टीराम शर्मा के बेटे ललित शर्मा, लवण शर्मा को 15 मर्तबा इंटरनेशनल गेम्स में भेजा जा चुका है, जबकि अब तक उनके नाम एक भी गोल्ड मेडल नहीं है।

इस बारे में डिप्टीराम शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। जबकि 2 दिन से ट्राई करने के बावजूद ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा से बात नहीं हो पाई है। इस बीच कई पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों और खुद सैम्बो टीम के कोच ने इन गेम्स के लिए खिलाड़ियों को भेजने के लिए चंदा देने की बात कही है।

मीनू कुमारी के द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ को शिकायत करने के साथ ही रिषाल शर्मा के रिजल्ट की कॉपी मांगी, लेकिन डिप्टीराम शर्मा ने फेडरेशन की तरफ से कॉपी उपलब्ध करवाई है और न ही मीनू कुमारी को एशियन गेम्स में जाने के लिए टीम सदस्यों के साथ भारतीय ओलंपिक संघ को उनका नाम भेजा है।

लिखित में शिकायत मिलने के बाद खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा को फोन पर पूछा है कि किस कारण से इन खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है? जबकि मीनू कुमारी और सरबजोत दोनों ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई हो चुकीं हैं?

liyaquat Ali
Sub Editor @dainikreporters.com, Provide you real and authentic fact news at Dainik Reporter.

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