वसुंधरा के आयोजनों में पार्टी के खिलाफ नजर आने जैसा कुछ नहीं – पूनिया

फाइल फ़ोटो

उदयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने फिर दोहराया है कि दिवंगत जनप्रतिनिधियों के विधानसभा क्षेत्र में काॅलेज तो पहले भी खोले जा सकते थे, तब क्यों नहीं खोले। किसी नेता के दिवंगत होने के बाद उनके नाम से काॅलेज खोलने की घोषणा पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के सवाल उठाने के बाद शनिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूनियां ने उदयपुर में प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों के सवाल पर कहा कि सरकार के पहले के काॅलेज भी बजट के अभाव में धरातल पर नहीं हैं। काॅलेज की घोषणा के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि वहां के स्टाफ, शिक्षकों के लिए कितना बजट जारी किया गया है। तात्कालिक लाभ के लिए सिर्फ घोषणा किया जाना काफी नहीं है। सभी जानते हैं चारों विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने वाले हैं और उन क्षेत्रों के लिए कई घोषणाएं की गई हैं।

उदयपुर के वल्लभनगर में शनिवार को आयोजित भाजयुमो के सम्मेलन में भाग लेने आए पूनियां ने डबोक में आयोजित प्रेसवार्ता में राजस्थान की गहलोत सरकार के बजट को घाटे का बजट बताते हुए कहा कि पहले की घोषणाएं ही धरातल पर नहीं उतरीं हैं और इस बार बजट में घोषणाओं का पिटारा खोल दिया गया है। इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए बजट कहां से आएगा इसकी कोई जानकारी नहीं है। चुनाव से पहले राहुल गांधी ने सभी किसानों की कर्जामाफी का ऐलान किया था, सिर्फ सहकारी बैंकों से लिए गए ऋण माफ किए गए। पूनिया ने गंगानगर के एक किसान के वीडियो बनाकर आत्महत्या करने का उदाहरण भी दिया। साथ ही, बेरोजगारी भत्ते पर भी पूनिया ने कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा। पूनिया ने कहा कि बजट असंतुलित है और कर्नाटक, मध्यप्रदेश व केन्द्र सरकार से काॅपी-पेस्ट है।

राजस्थान में हुए पंचायत चुनावों के परिणामों को उन्होंने सत्तासीन सरकार के खिलाफ जनता का मेंडेट बताया और आरोप लगाया कि मातृकुण्डिया में हुए सम्मेलन में जुगाड़ की भीड़ जुटाई गई। किसान आंदोलन के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों की आशंकाएं दूर हो चुकी हैं, फिर भी कुछ ताकतें जिनमें बाहरी ताकतें भी शामिल हैं, वे आंदोलन को खींचे जा रही है, इसके पीछे उनके निहित स्वार्थ हैं। केन्द्र सरकार का किसान बिल पूरी तरह से किसानों के हित में है।

वसुंधरा के आयोजनों में पार्टी के खिलाफ नजर आने जैसा कुछ नहीं – पूनिया

वसुंधरा राजे के जन्मदिन पर निकलने वाली यात्रा व अन्य आयोजनों पर पत्रकारों ने सवाल उठाए। गौरतलब है कि पूर्व में मेवाड़ के भाजपा नेता कटारिया ने यात्रा निकालने का ऐलान किया था, तब वसुंधरा राजे ने इस्तीफा देने की भी धमकी दी थी। बाद में कटारिया ने यात्रा को स्थगित किया था। इन सवालों पर पूनिया ने कहा कि जहां तक कटारिया की यात्रा का मामला है, वह पृष्ठभूमि काफी पुरानी हो गई है। जहां तक वसुंधरा राजे के आयोजनों का मसला है, सभी अपना जन्मदिन अपने-अपने तरीके से मनाते हैं। यह भी एक जन्मदिन का कार्यक्रम है। फिलहाल वसुंधरा के आयोजनों में ऐसा कुछ नहीं है जो पार्टी के विरोध में दिखता हो।