The concept of online shopping is slowly dying out in the retail market - Rajeev Singhal
टोंक राजस्थान

ऑनलाईन शॉपिंग की धारणा धीरे-धीरे ख़त्म कर रही खुदरा बाजार – राजीव सिंघल

टोंक ।आल राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री [  आरतिया  ] के प्रदेश उपाध्यक्ष  राजीव सिंघल ने कहा की हालात नहीं सुधरे तो ऑनलाईन बाजार अनुचित व्यापार पद्धती से तोड कर रख देगा देष की आर्थिक रीढ़ की हड्डी खुदरा बजार को.
राजीव सिंघल आरतिया कार्यायलय में आज एक चर्चा में भाग ले रहे थे  जिसमें ऑनलाईन कम्पनियों द्वारा अनुचित व्यापार पद्धती व भ्रामक विज्ञापन पॉलिस से ग्राहकों को आकर्षित करके रिटेल बाजार को समाप्त करने की कार्यवाही  पर चर्चा की गई। 

राजीव सिंघल ने कहा की   किस प्रकार एक छोटी से छोटी व्यापारिक ईकाई भी देष के रिटेल व्यवसाय को विकसित करने में अहम भूमिका रखती है। सर्वप्रथम बाजार का विकास होता है जिसमें निर्माण लागत व निर्माण सामग्री, मजदूर वर्ग इत्यादी का भरण पोषण होता है, उन्हे रोजगार मिलता है तथा दुकान के इन्फ्रास्ट्रक्चर व सम्बन्धित कार्य करने वालों को भी रोजगार प्राप्त होता है।
 
फिर दुकानदार द्वारा अपने व्यापार अनुसार मॉल स्टॉक करने व बेचने की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है, जिसमें अपने व्यापार के स्वरूप के अनुसार 2-3 लोगों से लेकर 10-15 लोगों का नियोजन, इससे सम्बन्धित आवागमन व ट्रांसर्पोटेषन एवं पैकिंग इण्उस्ट्री में काम आने वाले सामान से सम्बन्धित लोगों को रोजगार मिलता है। उपरोक्त सभी प्रकार की सामग्री पर काम आने वाली चीजों से सरकार को टैक्स की प्राप्ति भी होती है।
 
इस प्रकार एक बाजार की एक यूनिट विकसित होने के बाद, ऐसी सैंकडों यूनिट विकसित होती है तथा वृहद रूप ले लेती है, जो हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करती है, यह स्वस्पष्ट है। इसी परम्परानुसार हमारे यहां पर सारे देष में विभिन्न जिंसानुसार उत्पादों के विभिन्न बाजार जैसे ज्वैलरी हेतु, वस्त्रों हेतु, लोह कारोबार हेतु अन्य व्यापार वृहद् रूप ले लेते हैं। इस प्रकार इस पूर्ण चैन सिस्टम द्वारा अनपढ से लेकर पढे लिखे व्यक्ति को रोजगार प्राप्त होता है और उसके आर्थिक विकास के साथ-साथ देष का भी आर्थिक विकास होता है, जो कि समाज एवं भारत के संविधान की मूल अवधारणा है।
 
चर्चा  में अध्यक्ष विष्णू भूत, मुख्य संरक्षक आषीष सराफ, मुख्य सलाहकार कमल कन्दोई, कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम बियानी, संरक्षक केषव बडाया, सलाहकार रमेष गांधी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेष चौपड़ा, उपाध्यक्ष रूपसिंह कुमावत, नितिन भगेरिया, एच.एम. जौहरी, , सचिव अनिल गोयल, संयुक्त सचिव महेन्द्र तोदी, सुमित विजयवर्गिय व अन्य सदस्यों ने भाग लिया।

आरतिया के अध्यक्ष विष्णु भूत ने बताया कि बाजार गुलजार होने की चाहे कितनी भी सुर्खिया समाचार पत्रों या टीवी चैनल्स पर दिखाई जा रही हो पर वास्तविक स्थिति को स्वयं व्यापारी वर्ग के अलावा कोई नहीं जान सकता है, जिसे अपने ऑफिस के खर्चे निकालकर व्यापार चलाने में कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है।

आरतिया के मुख्य सलाहकार कमल कन्दोई ने बताया कि ऑनलाईन बाजार ने अनुचित व्यापार पद्धती व भा्रामक विज्ञापन द्वारा आमजन को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण आए दिन होने वाली फ्राड एवं मीसबिहेव की घटनाओं से मिलता रहता है। अभी भी समय है, देष एवं राज्य के व्यापार व उद्योग जगत को एक मंच पर आकर इसका पुरजोर विरोध करना होगा अन्यथा आने वाले समय में खुदरा बाजार का समाप्त होना तय है।
आरतिया के मुख्य संरक्षक श्री आषीष सराफ ने बताया कि देष का उद्योग एवं व्यापार देष की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाता है, ऐसे में ऑनलाईन कम्पनियों द्वारा खुदरा बाजार को खत्म करने का काम किया जा रहा है, जिससे देष की अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ साथ बेरोजगारी, भ्रष्टाचार व लूट-मार की घटनाओं का बढना तय है। ऐसे में यदि ऑनलाईन व कॉर्पोरेट रिटेल कम्पनियों पर नकेल नहीं कसी गई तो देष एवं देष के 85 से 90 प्रतिषत असंगठित क्षेत्र का अस्तित्व खतरे में है।
आरतिया के संरक्षक केषव बडाया ने बताया कि जो उत्पादक कम्पनियां इन ऑनलाईन कम्पनियों को प्रोत्साहित कर रही है वे फेयर ट्रेड प्रेक्टिस के अनुसार कार्य करे तथा ऑनलाईन कम्पनियों को समर्थन ना दें तो इस समस्या का समाधान हो जावेगा।
आरतिया के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम बियानी ने बताया कि आरतिया ने वित्  मंत्री  भारत सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा नई नीति बनाई जाकर देष के व्यापार व उद्योग को बचाने के प्रयास किये जाये तथा इसमें देष एवं राज्यों की व्यापारिक एसोसियेषन्स व संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर उनसे वार्ता कर ऐसी नीति बनाई जाऐ जिससे खुदरा कारोबार को पुनः जीवन मिल सके और वह राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सके।
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