टोंक राजस्थान

संतान संबंधी कूट रचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए 

उनियारा /अशोक सैनी। न्यायालय वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट, उनियारा के न्यायालय में परिवादी दिनेश पुत्र छीतरलाल आयु 40 वर्ष जाति धाकड निवासी चोरू थाना अलीगढ जिला टोंक ने आरोपी रामसहाय पुत्र मोती आयु 50 वर्ष जाति धोबी निवासी चोरू थाना अलीगढ जिला टोंक के विरुद्ध परिवाद अन्तर्गत धारा 420, 467, 468, 471 आई.पी.सी. व धारा 18 क, 19 क पंचायत राज अधिनियम 1994 पेश किए जाने पर न्यायालय ने अलीगढ़ पुलिस को मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।

परिवादी के अधिवक्ता सच्चिदानंद शर्मा ने बताया कि न्यायालय में पेश इस्तगासे में अवगत करवाया की परिवादी ग्राम चोरू थाना अलीगढ जिला टोंक का निवासी है तथा ग्राम पंचायत चोरू के निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता है।

मुलजिम रामसहाय मेरोठा ग्राम पंचायत चोरू का वर्तमान सरपंच है तथा वह ग्राम पंचायत चुनाव 2020 मे सरपंच पद पर निर्वाचित हुआ है। मुलजिम रामसहाय द्धारा पंचायत चुनाव 2020 मे नाम निर्देशन पत्र मे अपनी संतानो बाबत झूठे कथन करके चुनाव मे अयोग्य होते हुए भी तथ्य छुपाकर चुनाव लडा तथा सरपंच पद पर निर्वाचित हुआ, जो पंचायत राज अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध है।

मुलजिम द्धारा अपने नाम निर्देशन फार्म मे दिये गये शपथ पत्र के पेरा न.3 मे दिनाक 23.04.1994 से पूर्व 2 संताने क्रमशः कॉलम क मे आशा 30 वर्ष, सोना 25 वर्ष बताई है, तथा कॉलम ख मे दिनाक 23.04.1994 से दिनाक 27.11.1995 की अवधि मे 2 संताने कमशः मोना जन्म दिनांक 05.07.1995 तथा अंकित जन्म दिनांक 05.07.1995 अंकित की गई है। मुलजिम के दिनांक 05.07.1995 के उपरान्त मोना मेरोठा पैदा हुई है, जिसकी समस्त दस्तावेजो मे जन्म दिनांक 01.01.1996 दर्ज है।

इस प्रकार मुलजिम के दिंनाक 05.07.1995 से पूर्व 3 संताने तथा दिनाक 05.07.1995 के उपरान्त एक संतान है।मुलजिम ने योजना पूर्वक पंचायत चुनाव मे अयोग्य होते हुए भी अपनी संतानो के जन्म की वास्तविक तिथि छिपाकर कुटरचित अंकन कर फर्जी तथ्यो के आधार पर नाम निर्देशन पत्र भरा तथा सरपंच पद पर निर्वाचित हुआ तथा राज्य सरकार व निर्वाचन विभाग की प्रक्रिया का दुरूपयोग कर अपराध कारित किया है।

मुलजिम द्धारा जानबूझकर सरपंच बनने हेतु वास्तविक तथ्यों को छिपाकर, झूठे तथ्यों के आधार पर फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत कर चुनावी प्रक्रिया का दुरूपयोग कर लाभ प्राप्त किया है, जो भा.द.स. की धारा 420, 467, 468, 471 आई पी सी व धारा 18 क, 19 क पंचायत राज अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध है।

परिवादी ने उक्त घटना की रिपोर्ट पुलिस थाना अलीगढ पेश की, परन्तु कोई सुनवाई नही हुई, जिस पर परिवादी ने श्रीमान् पुलिस अधीक्षक टोंक के प्रार्थना पत्र पेश कर अंविलम्ब परिवाद पेश है ।

परिवाद मय शपथ पत्र प्रस्तुत कर निवेदन है कि उक्त परिवाद धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत पुलिस थाना अलीगढ भेजकर मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए।

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