नायक: राजस्थान के तमाम भ्रष्टाचारी एसीबी एडीजी दिनेश एम. एन. की कार्यशैली से दहशत में,घूसखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्यवाहियों की वजह से राजस्थान के सिंघम एक बार फिर चर्चा में

Tonk(भावना बुन्देल) राजस्थान कैडर 1995 बैच के बहुचर्चित आईपीएस अधिकारी दिनेश एम. एन. को अपने सेवाकाल में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्ठा, कर्तव्यपरायणता व निर्भीकता से निभाया। दिनेश एम. एन. का जन्म 6 सितंबर 1971 को (कोलार) कर्नाटक में हुआ। कन्नड़ भाषी और मिलनसार स्वभाव के दिनेश एम. एन. इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलिकम्युनिकेशन में बीई हैं। देश- प्रदेश में ‘राजस्थान के सिंघम’ नाम से चर्चित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजी दिनेश एम. एन. इन दिनों रिश्वतखोर लोकसेवकों के विरूद्ध ताबड़तोड़ कार्यवाहियों की वजह से एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

पूर्ववर्ती सरकार में भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दबंग अफसर के रूप में उन्होंने प्रदेश के तमाम घूसखोर कार्मिकों, अधिकारियों और अन्य भ्रष्ट लोगों पर जमकर कानूनी शिकंजा कसा था। गौरतलब है कि उस दौरान आनंदपाल प्रदेश के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका था, तब एडीजी दिनेश एम. एन. और उनकी टीम ने ना सिर्फ आनंदपाल बल्कि उसकी पूरी गैंग पर शिकंजा कसा था। दिनेश एम. एन. सबसे पहले वर्ष 2000 में करौली एसपी रहे, इसके बाद सवाई माधोपुर और झूंझुनू, उदयपुर और अलवर जिले के एसपी रहे।

जांबाज पुलिस अफसर और जनमानस के असली दबंग हीरो

आम जनों को भी इस आईपीएस ऑफिसर पर पूरा भरोसा और यकीन है। लोगों का यही भरोसा जीतकर यह बहादुर आईपीएस हर कसौटी पर खरा उतरते हैं। बार- बार होने वाले तबादलों की वजह से भी दिनेश एम. एन. सुर्खियों में रहते हैं। ज्ञात रहे कि देश में इनकी छवि एक दबंग और ईमानदार आईपीएस ऑफिसर की रही है, जिन्होंने अपनी सर्विस में कई विशेष उपलब्धियां हासिल कीं।

कई मर्तबा इस पुलिस अफसर ने अपनी जान पर खेलकर कई खतरनाक बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। इनकी वजह से भ्रष्ट तंत्र से जुड़े कई आला अफसरों पर गाज गिरी है। इनके नाम से ही अपराधी खौफ खाते हैं।

आम तौर पर फिल्मों में हम हीरो को दबंग पुलिस अफसरों की जांबाज भूमिका में देखते हैं, जबकि ‘रील’ लाइफ का ताल्लुक ‘रीयल लाइफ’ से दूर- दूर तक नहीं होता। सुना जाता है के दिनेश एम. एन. की तैनाती जिस जिले में होती है, वहां के क्रिमिनल्स वो इलाका छोड़ देते हैं। कोई भी अपराधी या भ्रष्टाचारी इनके राडार पर आ जाता है, तो उसका बचना नामुमकिन हो जाता है।

भ्रष्ट सिस्टम के विरूद्ध जारी हैं दिनेश एम. एन. के साहसिक अभियान

गौरतलब है कि पिछले माह ही उनकी टीम ने राज्य के परिवहन में रिश्वतखोरी के बड़े रैकेट का पर्दाफ़ाश किया था। एसीबी में रहते हुए उन्होंने राजस्थान के सबसे बड़े खान महाघूसकांड का पर्दाफाश करने में अग्रणी भूमिका निभाई। इसमें प्रमुख सचिव (माईनिंग) अशोक सिंघवी को गिरफ्तार किया गया था। ये घूसकांड देश भर में चर्चित हो चुका है।

शाहपुरा (अलवर) एसडीएम भारत भूषण गोयल को साढ़े तीन लाख रूपए के साथ ट्रेप किया। गोयल ने यह रकम आयुर्वेदिक औषधियों की फैक्ट्री लगाने के लिए एक उद्यमी से तय हुए 25 लाख रूपए की रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर ली थी। आबकारी इंस्पेक्टर पूजा यादव को शराब की दुकान लगाने वाले आवंटनकर्ता से 40 हजार रूपए की घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा।

इनकी टीम ने पूजा यादव के घर से 5 लाख रूपए और दूसरे प्रदेशों से लाई गई शराब की कुछ बोतलें बरामद कीं थी। जयपुर नगर निगम के दो अधिकारियों व उनके दलाल को मालवीय नगर (जयपुर) इलाके में एक मकान के निर्माण की मंजूरी देने के लिए 70 हजार की घूस लेते पकड़ा था। राजस्थान हाइकोर्ट ने दिनेश एम. एन. को हिंगोनिया गोशाला में चारा घोटाले की जांच- पड़ताल की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां आठ अफसरों को गिरफ्तार किया गया।

जयपुर में जमीन की वैधानिक मंजूरी देने के लिए शिविर में हो रहे भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसा, जहां विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को खुलेआम घूस मांगते पकड़ा। वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में सुर्खियों में रहे।