(कौन सुनेगा, किसे सुनाए) सम्पर्क पोर्टल पर शिकायतों का झूठा निस्तारण –

टोंक सर्किट हाऊस में रेम्प नही होने के बाद भी बता दिया रेम्प का निर्माण, परिवादी आमीर फारूखी को सार्वजनीक निर्माण विभाग कर रहा है, गुमराह -दिव्यागों की सुविधा के लिए सर्किट हाऊस में रेम्प बनाने की थी शिकायत

टोंक,(फिरोज़ उस्मानी)। टोंक सर्किट हाऊस में दिव्यांग रेम्प नही बने होने के बाद भी अधीक्षण अभिंयता आर.एस. बैरवा सार्वजनीक विभाग खण्ड टोंक कागजो में ही रेम्प बना हुआ बता रहे है। बार बार रेम्प बनाने की शिकायत सीएम समर्पक पोर्टल पर करने के बाद सावर्जनीक निर्माण विभाग ने रेम्प का निर्माण होना बता रहा है। जबकि सर्किट हाऊस में किसी तरह का कोई रेम्प नही बना हुआ है।

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पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मौहल्ला गोल निवासी आमीर फारूखी ने सीएम सम्पर्क पोर्टल पर टोंक सर्किट हाऊस में रेम्प नही होने के कारण बुजुर्गो व दिव्यागों को हो रही परैशानी का मुद्दा उठाया। वहंा रेम्प निर्माण की मांग की। परिवादी आमीर फारूखी ने बताया कि उसने टोंक सर्किट हाऊस में रेम्प बनवाने के सम्बन्ध में 12 मार्च को सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। यंहा से शिकायत सम्बन्धित विभाग पी डब्ल्यू डी को ट्रांसफर कर दी गई।

शिकायत करने के बाद जवाब के रूप में सार्वजनीक विभाग ने इस कार्य का विभाग की कार्य योजना में सम्मलित नही होने के कारण कार्य करवाया जाना संभव नही होने का कारण बताया। तथा 15 मार्च को शिकायत को रिजेक्ट कर दिया।

         गलत सूचना 

इस पर परिवादी आमीर फारूखी ने विभाग की कार्रवाही से असतुष्ट होकर दूबारा सम्बन्धित विभाग को ये कहकर तलब किया कि सार्वनजीक निर्माण विभाग के पास करोड़ो का बजट है, रेम्प का निर्माण कराया जाए। जिससे दिव्यागों को राहत पहुचें। बार बार शिकायत से परैशान होकर सार्वजनीक निर्माण द्वारा 22 अप्रेल को सर्किट हाऊस में रेम्प बना होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। सम्बन्धित विभाग द्वारा 26 अप्रेल को भी यही गलत सूचना दी गई कि सर्किट हाऊस में रेम्प बना हुआ है। जबकि सर्किट हाऊस में कोई रेम्प का निर्माण नही किया गया है। पूरे मामले में अधिक्षण अभिंयता आर.एस. बैरवा सार्वजनीक निर्माण विभाग खण्ड टोंक द्वारा परिवादी सहित सरकार को भी गुमराह किया जा रहा है। जबकि दिव्यागंों की सुविधा के लिए सरकारी कार्यालयों में रेम्प होना आवश्यक है। जिस पर सरकार का रवैया काफी सख्त है। बावजूद इसके सार्वजनीक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभिंयता द्वारा पूरे मामले में खानापूर्ति की जा रही है।