60 दिन में निपट जाएंगे किरायेदार-मकान मालिक के झगड़े, आ रहा है नया कानून 

स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित नई दिल्ली अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करेंगे। इतना ही नहीं, किरायेदार और मकान मालिक के बीच का विवाद सिविल कोर्ट …

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July 12, 2019 12:55 pm

स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित

नई दिल्ली

अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करेंगे। इतना ही नहीं, किरायेदार और मकान मालिक के बीच का विवाद सिविल कोर्ट में नहीं जाएगा जहां मामला वर्षो तक चलता रहता है।

केंद्र सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद

केंद्र सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद को सुलझाने के लिए एक नए कानून का प्रस्ताव किया है। माना जा रहा है कि केंद्र के इस कानून से मकान मालिकों के साथ -साथ किरायेदारों के हितों की भी रक्षा होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। सरकार के इस कदम का उद्देश्य देश में भवनों के किराये का नियमन करना है। बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2019 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इस संबंध में नए कानून की घोषणा की थी।

मकान मालिक या भूस्वामी किराये की समीक्षा

केंद्र के नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक मकान मालिक या भूस्वामी किराये की समीक्षा करने से पहले तीन महीने का लिखित नोटिस देगा। प्रस्तावित कानून जिला कलेक्टर को किराया प्राधिकार के तौर पर नियुक्त करने और निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहने पर भारी जुर्माना लगाए जाने की भी हिमायत करता है। इसके मुताबिक यदि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया अदा करना होगा। किरायेदार द्वारा अग्रिम राशि के तौर पर मकान मालिक के पास जमा की जाने वाली राशि अधिकतम दो महीने का किराया होगी।

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने परामर्श के लिए ‘द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019’ का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें कहा गया है कि मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) की एक प्रति जिला किराया प्राधिकरण को सौंपनी होगी, जिसके पास भूस्वामी या किरायेदार के अनुरोध पर किराये की समीक्षा करने या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। इसमें कहा गया है कि भूमि के ‘राज्य सूची’ का विषय होने के चलते इस कानून को स्वीकार करने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। हालांकि, राज्यों को स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल गठित करने की जरूरत होगी।

अधिनियम के मसौदा में यह भी कहा गया है कि मकान मालिक या भूस्वामी किराये के परिसर में मरम्मत कार्य कराने या पुरानी चीजों को बदलने के लिए 24 घंटे के पूर्व नोटिस के बगैर प्रवेश नहीं कर सकेगा। प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।

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