राजस्थान कांग्रेस विधायक दल के गहलोत-पायलट धड़े मे खण्डित होने के बाद

Sikar news / अशफाक कायमखानी। राजस्थान मे कांग्रेस पार्टी की सियासत मे शेखावाटी जनपद के किरदार के धनी अधिकांश नेताओं का हमेशा अहम रोल रहा है। खास तौर पर जनपद के कांग्रेस पार्टी मे जाट नेताओं ने प्रदेश की राजनीति को हर समय अलग दिशा दी है। वर्तमान समय मे राजस्थान सरकार के विधायको का …

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August 6, 2020 10:48 pm

Sikar news / अशफाक कायमखानी। राजस्थान मे कांग्रेस पार्टी की सियासत मे शेखावाटी जनपद के किरदार के धनी अधिकांश नेताओं का हमेशा अहम रोल रहा है। खास तौर पर जनपद के कांग्रेस पार्टी मे जाट नेताओं ने प्रदेश की राजनीति को हर समय अलग दिशा दी है।

वर्तमान समय मे राजस्थान सरकार के विधायको का गहलोत-पायलट धड़ो मे खण्डित होने का असर शेखावाटी की कांग्रेस राजनीति पर भी पड़ना तय है। जहां के विधायक भी दोनो धड़ो मे खण्डित होकर गहलोत व पायलट के नेतृत्व मे अलग अलग होटलों मे लगी बाड़ेबंदी मे रह रहे है।

शेखावाटी जनपद मे ओला-महरिया व चोधरी नारायण सिंह नामक तीन राजनीतिक परिवार ऐसे माने जाते है जिन परिवारों के कमोबेश जिले भर की हर विधानसभा क्षेत्र मे समर्थक होना इन परिवारों के उदय के समय से लेकर लगातार अबतक माना जाता रहा है।

ओला परिवार के मुखीया रहे शीशराम ओला केंद्र मे कांग्रेस व गैर कांग्रेस सरकारो के अलावा राज्य की कांग्रेस सरकार मे मंत्री रहे। उन्होंने कांग्रेस से बगावत भी की एवं फिर से कांग्रेस मे भी शामिल भी हुये। मरहूम शीशराम ओला जिले मे जनाधार वाले नेता रहे है।

वर्तमान मे शीशराम ओला के पूत्र विजेंद्र ओला झूंझुनू से विधायक है एवं वो राजस्थान सरकार मे मंत्री भी रहे है। जो अब सचिन पायलट खेमे से जुड़कर मानेसर की होटल मे लगे केम्प मे जमे हुये है।

चोधरी नारायण सिंह शुरुआती दौर मे बीकेडी से कांग्रेस मे आये तब से वो कांग्रेस मे ही रहे है। वो राजस्थान सरकार मे मंत्री व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे है। वर्तमान मे उनके पूत्र विरेन्द्र सिंह दांतारामगढ़ से विधायक है। एवं अभी तक विरेंद्र मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा की गई बाड़ेबंदी मे मोजूद है।

इसी तरह महरिया परिवार के रामदेव सिंह महरिया राज्य सरकार मे काफी अर्शे तक मंत्री रहे है। उनके भतीजे नंदकिशोर महरिया फतेहपुर से विधायक रहे है।

साथ ही उनके दूसरे भतीजे सुभाष महरिया सांसद व केंद्र मे वाजपेयी सरकार मे मंत्री रहने के बाद तीन साल पहले कांग्रेस मे आये ओर लोकसभा का चुनाव भी कांग्रेस की टिकट पर लड़ा। महरिया परिवार के समर्थक सीकर लोकसभा क्षेत्र के अलावा फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र मे भी कम-ज्यादा तादाद मे मोजूद है। जिनमे से अधिकांश मतदाता केवल महरिया परिवार के इशारे पर मतदान करते रहे है।

जनपद मे मोजूद कांग्रेस के उक्त तीन मजबूत जाट राजनीतिक परिवारो के अलावा जाट बिरादरी से सरदार हरलाल सिहं, चोधरी रामनारायण, चोधरी नारायण सिंह व डा. चंद्रभान के शेखावाटी से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहने के बाद लक्ष्मनगढ विधायक गोविंद डोटासरा को कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेवादारी सोंपी गई है।

मरहूम चोधरी रामनारायण की पुत्री रीटा सिंह मण्डावा से विधायक है।वही नवनियुक्त अध्यक्ष गोविंद डोटासरा लक्ष्मनगढ से विधायक व राज्य मंत्रिमंडल मे शिक्षा मंत्री है। एवं डा.चंद्रभान एक तरह से कांग्रेस राजनीति मे वर्तमान समय मे प्रभावहीन बने हुये है।

केंद्र की कांग्रेस सरकार मे मंत्री रहे महादेव सिहं खण्डैला वर्तमान मे कांग्रेस से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़कर निर्दलीय विधायक की हेसियत से वर्तमान मे गहलोत खेमे की बाड़ेबंदी मे रह रहे है। जाट नेताओं के अलावा सीकर जिले मे दलित मतो पर धोद विधायक परशराम मोरदिया व चूरु जिले मे भंवरलाल मेघवाल की अच्छी पकड़ जरुर है।

लेकिन परशराम मोरदिया जब जब चुनाव हारे तब तब जाट नेताओं ने उनसे मुहं फेरा है। जब जब जाट नेताओं ने मोरदिया का साथ निभाया तब तब वो चुनाव जीत पाये है। 2018 का धोद विधानसभा चुनाव मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री व महरिया परिवार के राजनीति मे नेतृत्व करने वाले सुभाष महरिया का साथ ही मोरदिया की जीत का सहारा बना था।

शेखावाटी जनपद के ओला-महरिया व नारायण सिंह जैसे राजनीतिक परिवार का वर्चस्व समय समय पर कृषि उपज मण्डी, पंचायत राज, कोपरेटिव बैंक व अन्य सहकारी संस्थाओं के अलावा स्थानीय निकाय चुनाव मे रहता आया एवं उक्त संस्थाओं के चुनाव मे तीनो परिवार बराबर भाग लेते आ रहे है। साथ ही विधानसभा व लोकसभा के चुनाव भी तीनो परिवार लड़ते रहे व लड़ते आ रहे है।

इनके मुकाबलै वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बने लक्ष्मनगढ विधायक व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का जनाधार अबतक लक्ष्मनगढ विधानसभा क्षेत्र तक ही रहा है। अब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वो कम से कम सीकर के दो मजबूत राजनीतिक महरिया व नारायण सिंह परिवार को कमजोर करके अपना अलग से वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर सकते है।

जिसके परिणामो के लिये अभी इंतज़ार करना होगा। जबकि इसी महने गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार का विधानसभा पटल पर बहुमत खोने के पुख्ता समाचार मिलने लगे है।

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