फतेहपुर (सीकर) से आगामी विधान सभा चुनाव मे कांग्रेस टिकट पाने का सफर नेताओ का बडा दिलचस्प हो सकता है।

।अशफाक कायमखानी। फतेहपुर।  राजस्थान के जाट बहुल्य शेखावाटी जनपद के सीकर जिले की फतेहपुर विधान सभा क्षेत्र से एक दफा भाजपा के बनवारी लाल भिंडा को छोड़कर हमेशा से ही कभी जाट तो कभी मुसलमान विधायक बनता रहा है। जाट भाजपा को छोड़कर अन्य अलग अलग दलो के साथ माकपा एवं निर्दलीय तौर पर भी विधायक बन चुके है। तो इसके विपरीत मुसलमान स्वतंत्र पार्टी व जनता पार्टी के अलावा कांग्रेस दल से भी विधायक बनते रहे है। फतेहपुर क्षेत्र की खास बात यह रही है कि यहां से भाजपा , माकपा, स्वतंत्र पार्टी , जनता दल एवं जनता पार्टी के निसान पर केवल एक एक दफा विधायक बन पाये है। जबकि दो दफा निर्दलीय एवं कांग्रेस के निसान पर अनेक दफा यहा से विधायक बन चुके है।


फतेहपुर से कांग्रेस के निसान पर जाट व मुसलमान विधायक बनते रहे लेकिन 1980 से लेकर पिछले चुनावो तक यहां से कांग्रेस की टिकट मुसलमान को ही मिलती रही है। जबकि भाजपा कि टिकट ब्राहम्ण के अलावा जाट को भी मिल चुकी है। एक दफा को छोड़कर पिछले तीस सालो मे भाजपा की एक दफा टिकट जाट को मिलना छोड़कर बाकी दफा भिंडा परीवार को ही मिलती रही है। फतेहपुर से 1957 मे कांग्रेस के गफ्फार खा, 1967 व 1977 मे स्वतंत्र पार्टी व जनता पार्टी के आलम अली खा, 1985 मे कांग्रेस के अश्क अली व उसके बाद पिछले चुनाव 2013 तक कांग्रेस के तीन दफा लगातार भवंरु खां चुनाव जीतते रहे है। जबकि उक्त मुस्लिमो के अलावा एक दफा बनवारी भिंडा को छोड़कर जाट ही जीतते रहे है।


एक तरह से फतेहपुर सीट को कांग्रेस ने अघोषित रुप से अल्पसंख्यक सीट के तौर पर अब तक बना रखा था। लेकिन भंवरु खां के निधन के बाद एक तबका इसको बदल कर सीकर को अल्पसंख्यक व फतेहपुर को गैर मुस्लिम सीट बनाने की कोशिश मे लगा है। वही दुसरा तबका इसको हर हाल मे अल्पसंख्यक सीट ही बनाये रखने के लिये कमर कस रखी है। कांग्रेस की टिकट के फतेहपुर से प्रमुख मुस्लिम दावेदारो मे भवंरु खां के सियासी वारीस व उनके भाई हाकम अली खा, सीकर सभापति जीवण खा, मोहम्द शरीफ, अश्क अली, महबूब देवड़ा व पुर्व विधायक मरहुम गफ्फार खा के पुत्र ऐडवोकेट गुलाम मुर्तजा माने जा रहे है। जबकि जाट मे प्रमुख रुप से विधायक नंद किशोर महरिया ही आज के हालत मे प्रमुख दावेदार ही माने जा रहे है। भाजपा की तरफ से मधूसूदन भिंडा एक मात्र दावेदार माने जा रहे लेकिन कांग्रेस से किसी मुस्लिम को टिकट ना मिलने पर मंत्री यूनूस खां के यहां से दावा ठोकने की सम्भावना भी सियासी हलको मे जताई जा रही है।


कुल मिलाकर यह है कि सीकर जिले की एक मात्र फतेहपुर क्षेत्र से कांग्रेस से टिकट पाने का सफर बडा दिलचस्प बनता दिखाई दे रहा है। जिसमे हाकम अली खा के पूरे समय क्षेत्र मे सक्रीय रहकर जनता से सीधा जुड़ाव होने के साथ साथ पार्टी के हर कार्यक्रम मे फतेहपुर व फतेहपुर से बाहर सीकर, जयपुर व दिल्ली मे भी बराबर भागीदारी निभाना उनके पक्ष मे जाता है। तो दूसरी तरफ निर्दलीय विधायक जीतने के बावजूद राज्यसभा मे कांग्रेस के साथ मत देना एवं विधान सभा व विधानसभा के बाहर सत्तारुढ भाजपा सरकार को कांग्रेस के साथ रहकर बूरी तरह घेरने का ईनाम भी जाट को टिकट मिलना तय होता है तो नंद किशोर ही महरीया ही पहली व अंतिम पसंद कांग्रेस पार्टी के माने जायेगे। वही निर्दलीय विधायक व सरकार के खिलाफ होने के बावजूद फतेहपुर के विकास मे नया आयाम बनाने के कारण भी महरिया का पलड़ा भारी माना जा रहा है। जबकि मुस्लिम को टिकट मिलने की स्थिती पर हाकम खान ही दौड़ मे सबसे आगे समझे जा रहे है। इसके इतर फतेहपुर मे पहले चुनाव 1957 मे हुये तब कुल ग्यारह उम्मीदवार मैदान मे थे। जिसमे सभी उम्मीदवारो की जमानत जब्त हुई थी। ओर कांग्रेस के गफ्फार खां विधायक बने थे। इसके अतिरिक्त फतेहपुर से अबतक जीतने वाले विधायको मे से केवल 1985 मे जीते अश्क अली ही प्रदेश की सरकार मे उपमंत्री बने थे।