Opposition out in Vice Presidential election, BJP's century in Rajya Sabha
जयपुर राजस्थान

राज्यसभा चुनाव: उम्मीदवारों के चयन पर दुविधा में कांग्रेस, आधा दर्जन जातियां हुई लामबंद -जाट, राजपूत, गुर्जर, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की मांग ने जोर पकड़ा

जयपुर। प्रदेश की रिक्त हुई हो रहीं चार राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन का दौर शुरू हो गया है। हालांकि अभी तक भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। संख्या बल के लिहाज से 3 सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है तो 1 सीट भाजपा के खाते में जा सकती। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों को लेकर दुविधा में हैं, एक ओर जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी आलाकमान पर केंद्रीय नेताओं को राज्यसभा भेजने दबाव है तो वहीं राजस्थान में भी अब विभिन्न जातियों ने अपने-अपने वर्ग से राज्यसभा भेजे जाने का दबाव कांग्रेस पार्टी पर बढ़ाना शुरू कर दिया है।

करीब आधा दर्जन जातियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और आलाकमान से उनकी जाति से जुड़े नेताओं को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने की मांग बुलंद की है। हालांकि इन जातियों में कई जातियां ऐसी भी हैं जो कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, इसलिए किन जातियों को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा और किसी नहीं, इसे लेकर सत्ता और संगठन दुविधा में चल रहे हैं।

राज्यसभा उम्मीदवार के लिए इन जातियों ने बुलंद की आवाज

प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर जिन जातियों ने आवाज बुलंद की है उनमें एसटी, राजपूत, गुर्जर, जाट और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े नेताओं को राज्यसभा में भेजे जाने की मांग ने जोर पकड़ा हुआ है। राजपूत वर्ग से राज्यसभा भेजे जाने की मांग को लेकर राजपूत समाज लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से मांग कर रहा है, राजपूत समाज से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर जयपुर से दिल्ली तक जबरदस्त लॉबिंग भी चल रही है। समाज के बड़े नेता भी इस मांग को कई बार उठा चुके हैं।

वही गुर्जर समाज से भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की मांग ने जोर पकड़ा हुआ है। कांग्रेस विधायक और देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष जोगिंदर अवाना का भी कहना है कि गुर्जर समाज का व्यक्ति राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए। चूंकि राजस्थान में 70 से 75 विधानसभा सीटों पर गुर्जर समाज के लोग रहते हैं और 10 से 15 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जिनमें गुर्जर समाज की संख्या अच्छी है। आजादी से लेकर आज तक गुर्जर समाज से कोई व्यक्ति राज्यसभा में नहीं गया, इसलिए पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

परंपरागत वोट बैंक एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग का भी दबाव

इधर कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी परेशानी परंपरागत वोट बैंक को लेकर है। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाला एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग से भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की मांग ने जोर पकड़ा हुआ है। कांग्रेस से जुड़े एसटी वर्ग के नेताओं ने जयपुर से लेकर दिल्ली तक लगातार इस से लेकर लॉबिंग कर रहे हैं तो वहीं अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े नेता भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी से लगातार मांग कर रहे हैं कि अल्पसंख्यक वर्ग का व्यक्ति राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए।

कांग्रेस गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी दुविधा यही है कि वह संख्या बल के लिहाज से 2 सीटें तो आसानी से जीत जाएगी लेकिन तीसरी सीट पर उसे जोड़-तोड़ की राजनीति के तहत प्रयास करने होंगे। ऐसे में तीनों सीटों पर परंपरागत वोट बैंक को मौका दिया जाए या फिर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए अन्य जातियों को राज्यसभा में भेजा जाए, इसे लेकर उच्च स्तर पर भी मंथन चल रहा है।

2 सीटों पर केंद्रीय नेताओं को भेजे जाने की चर्चा

कांग्रेस हलकों में चल रही चर्चाओं की माने तो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से 2 सीटों पर केंद्रीय नेताओं को भेजे जाने की चर्चा है और एक सीट पर प्रदेश के किसी नेता को राज्यसभा भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर ही कांग्रेस में तीनों सीटों पर उम्मीदवारों का चयन किया जा सकता है।

Sameer Ur Rehman
Editor - Dainik Reporters http://www.dainikreporters.com/