नेताप्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया बड़ा बयान अगर विधानसभा के सत्र का जो मजाक हुआ तो वो सारा देश देखेगा 

उप मुख्यमंत्री ने विधानसभा की गरिमा को कम करने का किया है काम - उपनेता प्रतिपक्ष राठौड

फाइल फोटो गुलाब चन्द कटारिया

Jaipur news – 15वीं विधानसभा (15th Assembly) का चौथा सत्र (Fourth season)शुक्रवार से शुरू होने जा रहा है जिसके चलते सदन से सडक तक सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। इसके लिए भाजपा ने विधायक दल की बैठक गुरुवार को भाजप प्रदेश कार्यालय में बुलाई गई। इस दौरान सरकार को सदन के अन्दर घेरने की रणनिति तैयार की गई। इस बैठक में आरएलपी के विधायकों को भी बुलाया गया था लेकिन वे इस बैठक में शामिल नही हुए।

इसके साथ ही बैठक में भाजपा के भी 4 – 5 विधायक बैठक में अनुपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने की तो वहीं बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, राष्ट्रीय सह संगठन प्रभारी वी. सतीश, प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी मौजूद रहे।

विधायक दल की बैठक के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी असफलता का धोतक है कल का विधानसभा सत्र को बुलाना। एससी एसटी आरक्षण दिसंबर में ही लोकसभा और राज्यसभा में पारित कर दिया इसमें आधे राज्यों की भी सहमति आवश्यक होती है और वो सहमति दुर्भाग्य से राजस्थान की सरकार और राजस्थान का प्रशासनिक तंत्र नहीं दे पाया।

मैं जिसकों शब्दों में क्या कहूं निर्लजता का काम किया है। ये 25 जनवरी 2020 तक की समय अवधि थी क्या राज्य सरकार इसको 15 दिन पहले नहीं कर सकती थी क्या राजस्थान की कांग्रेस सरकार नींद में थी जिसके कारण विधानसभा की सारी परम्पराओं को ताक में रखा गया और अब आनन फानन में सत्र बुलाया गया है।

उन्होंने कहा कि एससी एसटी आरक्षण की समय अवधि 25 जनवरी 2020 में 10 साल बढ़ाकर 2030 तक कर दिया गया है। इसके बारे में जो राय देनी थी उसकी अंतिम सीमा 25 जनवरी है। दुर्भाग्य से नींद में सोई सरकार को अचानक कहीं से इसके बारे में जानकारी मिली। अगर 25 तारीख को हम इस पर अपनी सहमति नहीं देंगे तो राजस्थान का एससी एसटी वर्ग हमारे बारे में यह सोचेगा की राजस्थान सरकार हमारे लिए गंभीर नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारी केंद्र सरकार को राजनीति के चक्कर में आरोप प्रत्यारोप करते रहते हैं। 2 अप्रेल 2018 में जो घटना हुई थी उसको लेकर अनाप सनाप बातें की गई लेकिन इसी को लेकर इनको केवल सहमति देनी थी वह भी समय पर नहीं किया गया।

इस कारण 24 तारीख को आनन फानन में सत्र बुलाया गया। कटारिया ने कहा कि राज्यपाल का अभीभाषण का सत्र 21 दिन के नोटिस पर बुलाया जाता है लेकिन इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि इतने शॉर्ट नोटिस के उपर सत्र आहूत किया गया है। कुछ अपवाद को छोड़कर इस तरह का सत्र नहीं बुलाया जाता है। विधायकों को इसी 21 दिन के अंदर अपने प्रश्नों को तैयार करने का समय मिलता है और ना तो विधायक प्रश्नों की तैयारी कर पाए और ना ही सरकार राज्यपाल के अभीभाषण की तैयारी कर पाई।

कटारिया ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण को सभी विभागों के साथ बैठकर के उसका एक-एक डिपार्टमेंट के लिए हुए कार्यों को सम्मिलित करते हुए भाषण की तैयारी करता है। उन्होंने क्या तैयारी की होगी ये तो भगवान ही जानें और किसने इसको देखा होगा और किसने नहीं जो लिख दे वो फाइनल। इस विधानसभा के सत्र का जो मजाक हुआ है वो सारा देश देखेगा के वास्तव में कितने चर्तुर और अच्छे लोग हैं जो समय की मर्यादा को भी नहीं समझते हैं।

वही बैठक के बाद उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राज्य विधानसभा का बजट सत्र कल प्रारंभ हो रहा है और बजट सत्र का आहूत भी नियमों को दर किनार करके आनन फानन में राज्य सरकार ने किया है। विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही के बारे में उप मुख्यमंत्री विधानसभा में कार्य सलाहकार समिति के प्रतिवेदन पर सदन में विचार होने से पहले ये विचार व्यक्त करते हैं कि विधानसभा कल सत्र प्रारंभ होगा, शनिवार को सत्र चलेगा। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा के नियमों और परम्पराओं की अवहेलना है।

विधानसभा की गरिमा को कम करने का काम उप मुख्यमंत्री ने किया है। इस प्रकार की घटना जब कभी भी पहले हुई है सदन में चाहे वो मंत्री हो या फिर सदस्य हो माफी मांगनी पड़ी है। ये गोपनीयता है कि जब तक कार्य सलाहकार समिति की बैठक नहीं हो जाती, उसमें कार्यों का बंटवार नहीं हो जाता और कार्य सलाहकार समिति के प्रतिवेदन को सदन स्वीकार नहीं लेता तब तक इस प्रकार की कार्यवाही ना तो किसी को कहने का अधिकार है और ना ही किसी को कहनी चाहिए। आज जब कार्य सलाहकार समिति की बैठक हुई नहीं है इससे पहले उप मुख्यमंत्री अज्ञातावश जो बोल गए हैं उनको माफी मांगनी चाहिए।