अब भैंस का असली मालिक कौन है ,उसका फैसला होगा डीएनए टेस्ट से ,जाने पूरी ख़बर

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Nagaur News । नागौर थाना पुलिस बीते 5 महीने से एक ऐसे अनूठे मामले में उलझी है, जो कानून व्यवस्था भंग करने से नहीं जुड़ा है। मामला किसी अपराध का होता तो उसका हल भी निकल जाता, लेकिन यह मामला भैंस चोरी का है। आमतौर पर अव्वल तो ऐसे मामले थानों तक पहुंचते ही नहीं है और पहुंचते भी है तो समझाइश से सुलझ जाते हैं। लेकिन, नागौर के खींवसर इलाके में देऊ गांव से गुम हुई एक भैंस का मामला सुलझाने के लिए अब पुलिस को भैंस का डीएनए टेस्ट करवाना पड़ गया है। चोरी हुई भैंस के असली मालिक का पता लगाने के लिए पुलिस ने एक दिन पहले भैंस के डीएनए टेस्ट के लिए नमूना लिया है। खींवसर इलाके में चोरी हुई एक भैंस पर दो पक्ष अपना अधिकार जता रहे हैं और दोनों पक्षों में पांच माह से झगड़ा-फसाद चल रहा है।

एसपी श्वेता धनखड़ ने बताया कि देऊ हाल पांचला सिद्धा निवासी हिम्मताराम पुत्र पूसाराम मेघवाल ने अगस्त में पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि वह पांचला सिद्धा निवासी रामूराम पुत्र रेखाराम जाट के यहां कृषि कार्य करता है। उसकी तीन साल की काली भैंस को उसने 24 अगस्त 2020 को जागीरदार के खेत के पास चरने के लिए छोड़ा था। शाम होने के बाद भी भैंस घर नहीं लौटी। उसे ढूंढ़ ही रहे थे कि पड़ोसी ने बताया कि उसकी भैंस कांटिया के पास चर रही है। वह मौके पर पहुंचा तो उसकी भैंस वहां चरती मिली। वहां कांटिया निवासी जलाराम पुत्र केशराम जाट से भैंस मांगी तो उसने भैंस देने से मना कर दिया। इससे विवाद पैदा हो गया।
पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट में हिम्मताराम ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उनकी भैंस पर जबरन अधिकार जमा लिया है। आरोप है कि इस बात को लेकर गांव के मौजीज लोगों को एकत्र किया तो जलाराम व उसके चार-पांच अन्य सदस्यों ने उसके साथ मारपीट की और वहां से भगा दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई है। इससे न्याय नहीं मिल रहा।
दूसरी तरफ, जलाराम इस भैंस को अपना बता रहा है। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से तनातनी चल रही है। ऐसे में पुलिस को इस भैंस का डीएनए कराना पड़ गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डीएनए की जांच के लिए नमूना ले लिया गया है। जरूरत पड़ी तो भैंस की मां के नमूने भी लिए जाएंगे। ताकि, इसके असली मालिक का पता लगाया जा सके। एसपी धनखड़ का कहना है कि दोनों पक्षों को दो-तीन बार समझा दिया। थाने में भी बुलाया था लेकिन दोनों ही मानने को तैयार नहीं हैं। दोनों ही इस भैंस पर अपना हक जता रहे हैं। ऐसे में डीएनए टेस्ट का निर्णय लेना पड़ा है। दूसरे पक्ष जलाराम का कहना है कि यह भैंस उसने बाबूराम से 10 हजार रुपए में खरीदी थी। गांव वाले लंबे समय से उसके पास इस भैंस को देखते आ रहे हैं। गांव के दस-पन्द्रह लोग इसकी गवाही भी दे चुके हैं। इसके बावजूद हिम्मताराम लंबे समय से उसकी भैंस पर अपना अधिकार जता आ रहा है जो पूरी तरह से गलत है।