सरकार के आदेश को हवा में उडाते मंत्री, नहीं दे रहे संपत्ति का विवरण

रिप्रजेंटेंशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 (Representation of People Act 1951) के तहत केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों के लिए  17 दिसंबर,2009 को केन्द्र सरकार ने कोड ऑफ कंडक्ट तय किया है। इसके दायरे में प्रधानमंत्री सहित देशभर के सभी मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री आते हैं। जिन्हें हर साल 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति का विवरण जमा कराने का प्रावधान है। साथ ही मंत्रियों के महंगे उपहार लेने और अपने दौरों पर सादगी बरतने के निर्देश है

Jaipur News : राज्य मंत्रिपरिषद् (State Council of Ministers)के सदस्य मंत्रिमण्डल सचिवालय (Secretariat) से जारी आदेशों की लगातार अवेहलना कर रहे हैं। हालत यह है कि  मंत्रिमण्डल सचिवालय की तरफ से मंत्रियों को दो बार अपनी संपत्ति का विवरण देने के लिए परिपत्र जारी किए जा चुके है,लेकिन अब तक केवल आधा दर्जन मंत्रियों ने ही संपत्ति का विवरण भेजा है।
ज्यादातर मंत्रियों के संपत्ति विवरण (Property details of ministers) नहीं भेजे जाने के कारण अब तक  यह सार्वजनिक नहीं हो पाई है। गहलोत सरकार (Gehlot Government) में मंत्रिमण्डल सचिवालय की तरफ से 2 फरवरी,2019 को संपत्ति सार्वजनिक करने का परिपत्र जारी किया गया था। इसके बाद 6 अगस्त को इसका स्मरण-पत्र जारी किया,इसके बावजूद मंत्रियों ने इसे गंभीरता से नहीं मान रहे हैं।
दस  माह पुरानी कांग्रेस सरकार (Congress Government) भी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के पदचिन्ह्रों पर चल रही है। केन्द्र सरकार की तरफ से 17 दिसंबर,2009 को जारी आदर्श आचार संहिता के तहत मुख्यमंत्री (CM) सहित मंत्रिमण्डल के सभी सदस्यों को शपथ ग्रहण करने के दो माह में अपनी और अपने परिवार की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना होता है।
लेकिन  मंत्रिमण्डल सदस्यों ने अभी तक अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। मंत्रियों की यह गाइड लाइन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निर्देशों के बाद जारी की गई थी।  गाइड लाइन को राजस्थान सरकार ने 21 जनवरी ,2010 प्रदेश में लागू कर दिया था।
इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) सहित सभी मंत्रियों ने अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया था। लेकिन पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इस गाइड लाइन को कोई तवज्जो नहीं दी।  मंत्रिमण्डल के सदस्यों की संपत्ति पांच सालों में सार्वजनिक नहीं की गई।
रिप्रजेंटेंशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 (Representation of People Act 1951) के तहत केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों के लिए  17 दिसंबर,2009 को केन्द्र सरकार ने कोड ऑफ कंडक्ट तय किया है।
इसके दायरे में प्रधानमंत्री सहित देशभर के सभी मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री आते हैं। जिन्हें हर साल 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति का विवरण जमा कराने का प्रावधान है। साथ ही मंत्रियों के महंगे उपहार लेने और अपने दौरों पर सादगी बरतने के निर्देश है।
-मंत्री को अपने परिवार के सदस्यों की परिसम्पत्तियों, दायित्व और व्यापारिक हितों की जानकारी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को देनी होती है।
-इस विवरण में सभी अचल सम्पत्ति, शेयर-डिबेंचर, नकदी, आभूषण की कुल अनुमानित कीमत बतानी होती है।
-मंत्री बनने के बाद उसे और उसकी पत्नी को व्यापार तथा कार्यों के प्रबंधन-स्वामित्व छोडऩे की जानकारी शामिल होती है।
केन्द्रीय मंत्री कर रहे हैं संपत्ति की घोषणा
वर्ष,2010 के बाद से केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल मंत्री लगातार अपने संपत्ति का विवरण सार्वजनिक कर रहे हैं। सरकार बदलने के बाद मोदी सरकार सहित अन्य राज्यों की सरकार ने इस गाइडलाइन को लागू किया।
केन्द्र सरकार ने वर्ष,2010 में सभी केन्द्रीय और राज्यों के मंत्रियों को अपनी सम्पत्ति की जानकारी हर वर्ष 31 अगस्त को सार्वजनिक(वेबसाइड या अन्य माध्यम) करने के निर्देश दिए थे। लेकिन  भाजपा सरकार के मंत्री ब्यौरा देने से पीछे हटते रहे। मंत्रियों के संपत्ति का ब्यौरा देने के बाद भी कैबिनेट सचिवालय की फाइलों में यह बंद रहा।