महाशिवरात्रि पर्व , 117 वर्ष बाद शनि शुक्र का दुर्लभ योग

बाबूलाल शास्त्री

Tonk News : शिव पुराण के अनुसार एक मात्र शिव ही निर्गुण निराकार होने से निष्कल है, अन्य देव सगुण विग्रह होने से सकल कहै जाते हैं, निष्कल होने से ही शिव का निराकार अर्थात शुन्य आकर लिग पूज्य होता है शिव सकल एवं निष्कल दोनों ही हैए शिवा एवं शक्ति का अदभुत योग पर महा शिव रात्रि को होता है, महाशिव रात्रि पर रात्रि जागरण एव  चार प्रहर की पूजा का विधान है, जो महा शिवरात्रि को सूर्यास्त से शुरू हो कर अगले दिन सूर्योदय को होगी।

इस वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 फरवरी शुक्रवार को शाम के 5.22 बजे  से शुरू हो कर 22 फरवरी शनि वार को रात्रि 7.03 बजे तक है 21 फरवरी शुक्रवार को सुबह 9.13 से श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ हो कर 22 फरवरी शनिवार को सुबह 11.19 बजे तक है जिसमें   स्वार्थ सिद्धि योग है ।  अत: महाशिवरात्रि का महापर्व 21 फरवरी शुक्रवार को मनाया जायेगा, इस दिन 117 वर्ष बाद शनिदेव का मकर राशि में शुक्र का मीन राशि में विचरण दुर्लभ योग होगा।

मनु ज्योतिष एव वास्तु शोध संस्थान टोक के निर्देशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात ये पर्व मनाया जाता है। 21 फरवरी की शाम 5.22 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। शिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए इस साल ये पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग शिवरात्रि पर बन रहा है।

शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा।  यह एक दुर्लभ योग है, जब यह दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। 2020 से पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इस साल गुरु भी अपनी स्वराशि धनु में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा।

पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए ये योग बहुत ही शुभ माना गया है। शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस साल से पहले करीब 28 साल पहले शिवरात्रि पर विष योग 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पर ये योग बनने से इस दिन शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है। बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, इस वजह से बुध आदित्य योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे, इस वजह से काल सर्प योग भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा।

शेष सभी ग्रह राहु.केतु के बीच रहेंगे। सूर्य और बुध कुंभ राशि में, शनि और चंद्र मकर राशि में, मंगल और गुरु धनु राशि में, शुक्र मीन राशि में रहेगा। सभी ग्रह राहु-केतु के बीच होने से काल सर्प योग बनेगा। काल सर्प दोष, विष दोष पितृ दोष, असाध्य योग से मुक्ति मिलेगी ।