विवादस्पद आदेश, गहलोत सरकार के लिए कहीं मुसीबत न बन जाए ?

Why is IPS Priyadarshi's sympathy towards the corrupt What is this in Gehlot Raj

जयपुर/ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस कार्यकाल में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ नकल डालते हुए उन्हें बेनकाब किया जा रहा था लेकिन अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कार्यवाहक एडीजी हेमंत प्रियदर्शी ने कार्यभार संभालते ही एक फरमान जारी कर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ हमदर्दी जताई है।

आखिर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रियदर्शी ने ऐसा क्यों किया ? यह इस फरमान को लेकर जहां पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर है वही गहलोत सरकार कि आमजन में किरकिरी शुरू हो गई है।

गहलोत सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजी भगवान लाल सोनी और दिनेश एमएन के नेतृत्व में जबरदस्त काम करते हुए भ्रष्टाचारियों को बेनकाब किया है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी हर सभा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसका उल्लेख करते हैं।

भगवान लाल सोनी के 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का चार्ज अतिरिक्त महानिदेशक प्रथम हेमंत प्रियदर्शी को आज दिया गया और उन्होंने आज चार्ज संभालते ही प्रदेश के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की समस्त चौकियों और यूनिट प्रभारियों के नाम एक फरमान जारी किया है ।

और उस फरमान में उन्होंने सभी को निर्देशित किया गया है कि क्रेप अर्थात घूस लेते हुए पकड़े जाने की कार्यवाही के बाद जब तक प्रकरण आरोपी का न्यायालय द्वारा दोस्त नहीं हो जाता तब तक आरोपी और संजीत का नाम है वह फोटो मीडिया या अन्य किसी व्यक्ति विभाग में सार्वजनिक वायरल नहीं किया जाएगा।

आरोपी जिस विभाग में कार्यरत है उसका नाम आरोपी का पदनाम की सूचना मीडिया में सार्वजनिक की जाएगी अर्थात इस आदेश से उन्होंने आदेशित किया है कि अब राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भ्रष्टाचार की सूचना पर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी तो पहले की तरह मीडिया में भ्रष्टाचारी के फोटो और उसका नाम सहायक नहीं करेगी।

जबकि भगवान लाल सोनी के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचारियों के नाम और फोटो मीडिया में दिए जाते थे केवल भ्रष्टाचारियों को पकड़वाने वाले परिवादी का नाम नहीं दिया जाता था लेकिन कार्यवाहक एडीजी प्रियदर्शी ने यह फरमान जारी कर भ्रष्टाचारियों को एक तरह से सौगात देते हुए उनके प्रति हमदर्दी का रुख अपनाया है।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रियदर्शी के इस आदेश को लेकर आज पूरे राजस्थान में पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर रहा तो वही आमजन में गहलोत सरकार के प्रति तरह-तरह की बातें शहर के चौराहों चाय की थड़ी हो पान के के बिना पर होती रही कि भ्रष्टाचारियों का फोटो नहीं छापना उनका नाम नहीं उजागर करना जैसा आदेश एक तरह से भ्रष्टाचारियों को खुला सरंक्षण देना ही है और क्या सरकार चुनाव आ रहा है।

इसलिए कहीं ऐसा करके चुनाव का खर्चा तो नहीं निकालना चाह रही है ह या फिर सरकार के आईपीएस अधिकारी प्रियदर्शी भ्रष्टाचारियों के प्रति हमदर्दी जताकर क्या उनको अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार करने का खुला सरंक्षण दे रहे हैं ?

इस तरह की चर्चाएं आज दिन भर प्रदेश में सुनने को मिली आज के इस आदेश को लेकर देखा जाए तो सरकार की जबरदस्त किरकिरी हो रही है और अगर सरकारी आदेश वापस नहीं लेती है तो हो सकता है सरकार की इस आदेश को लेकर बदनामी हो और विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता है ।