राजस्थान में मेयर-सभापति का होगा पुराने पैटर्न पर ही होगा चुनाव, पीछे हटने के मूड में सरकार

भाजपा के भी कई उम्मीदवार प्रभावित होंगे, लेकिन फिर भी बीजेपी(BJP) पर इसका कोई खास असर नहीं देखने को मिलेगा। वहीं प्रत्यक्ष चुनाव की बात करें तो यहां भी कांग्रेस(Congress) के लिए मेयर का चुनाव जीतना बहुत मुश्कील होता। इसके पीछे कारण प्रदेश में पार्टी के दो गुट होना है। अगर किसी गुट के समर्थिक उम्मीदवार मैदान में उतरता तो उस उम्मीदवार को दूसरा गुट जीतने में रोड़ा बनता

Jaipur News : नवम्बर में होने वाले नगरीय निकायों (Urban bodies) के चुनाव अब सत्तादल कांग्रेस(Congress) के लिए गले की फांस बनते दिख रहे है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)से आर्टिकल 370 (Article 370)हटाने के प्रभाव को देखते हुए सरकार को अपने उस अहम फैसले (मेयर-अध्यक्ष के प्रत्यक्ष चुनाव) को बदलने के लिए दवाब बन गया है, जिसे कुछ माह पहले सरकार ने विधानसभा के जरिए लिया था। लेकिन सरकार के इस कदम से कांग्रेस के कई उम्मीदवारों के सपनों पर भी पानी फिर सकता है।

हालांकि इस फैसले से भाजपा के भी कई उम्मीदवार प्रभावित होंगे, लेकिन फिर भी बीजेपी(BJP) पर इसका कोई खास असर नहीं देखने को मिलेगा। वहीं प्रत्यक्ष चुनाव की बात करें तो यहां भी कांग्रेस(Congress) के लिए मेयर का चुनाव जीतना बहुत मुश्कील होता। इसके पीछे कारण प्रदेश में पार्टी के दो गुट होना है। अगर किसी गुट के समर्थिक उम्मीदवार मैदान में उतरता तो उस उम्मीदवार को दूसरा गुट जीतने में रोड़ा बनता।

जयपुर नगर निगम (Jaipur Nagar Nigam)की बात करें तो अब तक हुए नगर निगम के तमाम चुनावों में कांग्रेस का बोर्ड कभी नहीं बना है। यही कारण है कि मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव में हमेशा भाजपा का ही पार्षद मेयर की कुर्सी पर बैठा है। आखिरी 2 चुनावों (वर्ष 2009, 2014) पर नजर डाले तो कांग्रेस के 30 पार्षद भी जीतकर नगर निगम नहीं पहुंचे है। हालांकि वर्ष 2009 में कांग्रेस को मेयर पद पर सफलता जरूर मिली थी, लेकिन उस समय मेयर का चुनाव पहली बार प्रत्यक्ष रूप से करवाया गया था।

मेयर का चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों की बात करें कांग्रेस के तरफ से उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा, पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल, राजीव अरोड़ा का नाम चल रहा है। वहीं बीजेपी की तरफ से सुमन शर्मा, विधायक अशोक लाहोटी, पूर्व विधायक मोहनलाल गुप्ता, सुरेन्द्र पारीक आदि नामों पर चर्चा है। लेकिन अप्रत्यक्ष चुनाव हुए तो इनमें से शायद ही कोई उम्मीदवार पार्षद का चुनाव लडऩा चाहेगा। खासकर कांग्रेस में तो बिल्कुल नहीं लडऩा चाहेगा, वो भी इतिहास को देखकर। हालांकि बीजेपी की तरफ से एक बारगी चुनाव लडऩे पर थोड़ा विचार कर सकते है।

liyaquat Ali
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