राजस्थान में कांग्रेस में घमासान,मंत्री और विधायक ब्यूरोक्रेसी से नाराज, सीएम गहलोत सकंट में

राज्यसभा के चुनाव से पहले राजस्थान मैं कांग्रेस मैं घमासान मच गया है और मंत्री से लेकर विधायक तक ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए

May 27, 2022 9:28 am
राजस्थान में कांग्रेस में घमासान,मंत्री और विधायक ब्यूरोक्रेसी से नाराज, सीएम गहलोत सकंट में

जयपुर/ 10 दिन पूर्व आयोजित हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर के बाद और राज्यसभा के चुनाव से पहले राजस्थान मैं कांग्रेस मैं घमासान मच गया है और मंत्री से लेकर विधायक तक ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ।

जहां आलाकमान से इसकी शिकायत की है तो वही ब्यूरोक्रेसी से नाराज होकर विधायक के बाद अब एक मंत्री ने भी अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने की पेशकश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कर दी है । राज्यसभा चुनाव से पहले मचे इस घमासान से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एकदम से संकट में आ गए हैं ।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निकट माने जाने वाले तथा गुर्जर समाज के युवा नेता खेल एवं जनसंपर्क मंत्री अशोक चांदना ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश मुख्यमंत्री से की है चांदना ने अपने ट्वीट किया कि मुख्यमंत्री जी मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि मुझे इस जलालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज कुलदीप राका( मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव IAS) को दे दिया जाए क्योंकि वह वैसे भी वही सभी विभागों के मंत्री हैं । अशोक चांदना के इस्तीफे के पीछे सीधे तौर पर उनका मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रांका से नाराजगी को बताया जा रहा है।

विदित है कि इससे पहले कांग्रेसी के डूंगरपुर से विधायक गणेश घोघरा ने एसडीएम से खफा होकर अपने पद से इस्तीफा लिखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेज दिया था तो वही कुछ समय पूर्व खाद और आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने नेताओं का मान सम्मान करने और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने वाले अफसरों पर कार्यवाही की पैरवी की थी ।

हाल ही में इसी सप्ताह प्रियंका गांधी के साथ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सह प्रभारी और बीज निगम के अध्यक्ष राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त धीरज गुर्जर ने भी अफसरशाही को घेरा है।

 

उन्होंने अशोक गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा द्वारा दो दिन पहले ही गृह विभाग राजस्व विभाग के अफसरों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया है इस प्रस्ताव का धीरज गुर्जर ने समर्थन किया और गुर्जर ने अफसरशाही के रवैए को लेकर सरकार और पार्टी को चेताया।

धीरज गुर्जर ने अपने ट्वीट कर ब्यूरोक्रेसी पर निशाना साधा और लिखा कि अधिकारी कभी किसी सरकार के नहीं होते वह सत्ता के और खुद के होते हैं और जब अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिला लेते हैं तो वह सरकार की कब्र खोद रहे होते हैं । समय पर इनकी पहचान ना करने से किसी भी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

इससे पहले चित्तौड़गढ़ जिले की बेगू विधानसभा से तेजतर्रार कांग्रेस के विधायक राजेंद्र बिधूड़ी ने दी 2 दिन पूर्वी सार्वजनिक तौर पर अफसरों पर आरोप लगाया और कहा कि अफसर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं करते है ।

कांग्रेस कार्यकर्ता की थानेदार नहीं सुनता और विधायक तक की थानेदार कलेक्टर नहीं सुनते हैं ।आज जब कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है तो चुनाव में बूथ पर क्यों बैठेगा ? जब चुनाव हो तो बूथ पर फिर थानेदार और कलेक्टर को ही बिठा देना ? मेरे क्षेत्र में कई थानेदार तस्करों से मिले हुए रात को पैसे लेकर अफीम तस्करों की गाड़ियां पास करवाते हैं।

इनके अलावा कांग्रेस के विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ,जोगिंदर अवाना, वाजिब अली, दिव्या मदेरणा अफसरो के हावी होने का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर चुके हैं राजेंद्र सिंह गुड्डा ने भी ब्यूरोक्रेसी के हावी होने को लेकर सरकार को घेरा ।

कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री वरिष्ठ नेता तथा सांगोद कोटा से विधायक भरत सिंह ने एक बार फिर गहलोत सरकार के खान मंत्री प्रमोद जैन भाया के खिलाफ भ्रष्टाचार का मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है । पत्र ने पंजाब सरकार के मंत्री की बर्खास्तगी का हवाला देते हो प्रदेश में भष्ट्र लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है । भरत सिंह ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक भगवान लाल सोनी को भी पत्र लिखा है।

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के विधायक और मंत्रियों का इस तरह अपने ही मुख्यमंत्री को खेलना सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए संकट पैदा करने वाली स्थिति हो गई है और मंत्रियों विधायकों के इस रोग से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संकट में आ गए हैं ।

अभिन्न रूठे हुए विधायकों को मुख्यमंत्री गहलोत कितना मना पाते हैं और ब्यूरोकैसी को कितना दबा पाते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। 

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