राठौड़ बोले गधों की गणना के समय सरकार कुर्सी बचा रही थी, जवाब मिला-आप ‘घोड़े’ खरीदने में फेल क्यों हो गए?

DAINIK REPORTERS

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान अनुदान मांगों पर बहस के तहत सोमवार को गधों व हार्स ट्रेडिंग के मुद्दे पर प्रतिपक्ष के उप नेता व निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के बीच तीखी नोकझोक हुई। प्रतिपक्ष उपनेता राठौड़ ने कहा कि जब राजस्थान में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, तब विस्फोट होगा और ‘घोड़े’ अस्तबल में चले जाएंगे।

राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के 16वें दिन सोमवार को अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही है। उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सदन में पशु गणना का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में ऊंट और गधे लुप्त हो रहे हैं। दोनों में 71.31 प्रतिशत की कमी हुई है। उन्होंने बताया कि गधों की संख्या 19वीं पशुगणना में 81 हजार थी, जो 20वीं पशुगणना में 23 हजार ही रह गए। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाया कि जब गधों की गणना हो रही थी, तब आप कहां थे? तब सरकार सो रही थी क्या? फिर उन्होंने तंज कसा कि सरकार सो नहीं रही थी, आप किसी पांच सितारा होटल में कैद अपनी कुर्सी बचाने में लगे थे। राठौड़ ने कहा कि 19वीं पशुगणना में 38 हजार घोड़े थे, अब 34 हजार रह गए। मुख्यमंत्रीजी हॉर्स ट्रेडिंग की बात तो रोज करते हैं, तो आप मुझे बताओ कि हॉर्स की ट्रेडिंग में क्या कमी-खामी रह गई। ये कौनसे घोड़े थे जिनकी खरीद-फरोख्त में घोड़ों की तादाद इतनी कम हो गई।

राठौड़ के इस सवाल के बाद निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने बीच में उठकर उनसे सवाल पूछा कि राजस्थान में आप घोड़े खरीदने में विफल क्यों हो गए? प्रतापसिंह खाचरियावास भी बहस में कूदे और कहा कि दुख हुआ कि आपने ऐसी बात की। आपसे उम्मीद थी कि आप किसान आंदोलन में मारे गए किसानों की श्रद्धांजलि में कुछ बोलेंगे। इसके बाद ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा ने किसान और केन्द्र सरकार की बात करते हुए कहा कि घोड़े इसलिए नहीं खरीद पाए, क्योंकि गधे ज्यादा इंटेलीजेंट हैं। मदेरणा के भावों पर राठौड़ ने आपत्ति जताई, फिर दोबारा मदेरणा खड़ी हुई और कहा कि मैं इस बात का समर्थन करती हूं कि सदन में गधे-घोड़ों पर चर्चा होनी चाहिए। मदेरणा ने भी अंत में कहा कि सदन से किसी की रूखसती पर आपकी (विपक्ष) आंखों में आसूं होते हैं, लेकिन जब सवा दो सौ किसान अपने हक के लिए जान दे देते हैं तो आप एक शब्द भी नहीं बोलते। आप सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी कर सदन को उलझाना चाहते हैं।