राजस्थान में सरकार ने दी आमजन को राहत,अब आशियाना बनने के लिए नक्शा स्वीकृति की जरूरत नही

प्रतीकात्मक चित्र

जयपुर।राजस्थान सरकार ने प्रदेश की जनता को राहत देते हुए उनको अपना आशियान बनाने मे कोई दिक्कत नही होगी । सरकार ने 500 वर्गमीटर से 2500 वर्गमीटर तक के भूखण्ड पर नक्शा पास करवाने के लिए नगर निकायों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए सरकार से पंजीकृत आर्किटेक्ट से नक्शा अनुमोदित कराकर निर्माण शुरू किया जा सकता है।

राज्य में किसी भी निकाय क्षेत्र में अगर आपके पास स्वयं का 500 वर्गमीटर तक का भूखण्ड है और उस पर आप अपने स्वयं के रहने के लिए आवास बनाना चाहते है, तो उस भवन की निर्माण अनुमति के लिए आपको किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने 500 वर्गमीटर तक के भूखण्डों पर भवन मानचित्र पेश करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इससे प्रदेश के लाखों भूखण्डधारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि इससे पहले सरकार ने 250 वर्गमीटर तक के भूखण्डों पर ही भवन निर्माण के लिए नक्शा पेश करने की छूट दे रखी थी, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर 250 से 500 वर्गमीटर कर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य के कई छोटे-छोटे शहरों में लोगों के पास बड़े भूखण्ड (250 वर्गमीटर से बड़े) है, जिन पर आवास बनाने के लिए लोगों को नक्शा पास करवाना पड़ता है, जिसके लिए उन्हे नगरीय निकायों (नगर पालिका, परिषद, यूआईटी या विकास प्राधिकरण) के चक्कर काटने पड़ते है। लोगों की इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। धारीवाल ने कल राज्य विधानसभा में इसको लेकर घोषणा भी की है।

90 वर्गमीटर तक सैटबेक छोड़ने की नहीं है कोई जरूरत

राजस्थान बिल्डिंग बायलॉज 2020 में राज्य सरकार ने प्रावधान किया है कि अगर किसी भी व्यक्ति के पास 90 वर्गमीटर (लगभग 100 वर्गगज) तक का अगर भूखण्ड है तो उसे सैटबैक छोड़ने की जरूरत नहीं है। इन भूखण्डों पर निर्माण करने वाले लोगों को सैटबेक छोड़ने के नाम पर अक्सर परेशान किया जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने सैटबेक छोड़ने की अनिवार्यता को खत्म किया है।

दो दिन पहले राज्य सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने नगर निगम हैरिटेज के एक कार्यक्रम में आवास निर्माण के दौरान नगर निगम, जेडीए के सतर्कता विंग की ओर से की जाने वाली कार्यवाही पर सवाल उठाए थे। खाचरिवास ने मंच से कहा था कि जयपुर में छोटे-छोटे मकान बनाने वाले गरीब लोगों को विजीलेंस शाखा के कर्मचारी-अधिकारी अवैध निर्माण बताकर परेशान करते है। उन्होंने कहाा था कि विजीलेंस को अगर छोटे-छोटे मकानों पर कोई कार्यवाही करनी है तो उसे पहले स्थानीय पार्षद, विधायक या कोई अन्य जनप्रतिनिधि को विश्वास में लेना चाहिए।