राजस्‍थान विधानसभा: कृषि संशोधन विधेयक पारित

Jaipur News। राजस्‍थान विधानसभा में सोमवार को तीन कृषि संशोधन विधेयक नारेबाजी और हंगामे के बीच ध्‍वनिमत से पारित कर दिए गए। केंद्रीय कृषि कानूनों में खिलाफ लाए गए इन कृषि संशोधन विधेयकों को पारित करने वाला राजस्‍थान पंजाब के बाद दूसरा राज्‍य बन गया है। सदन में करीब नौ घंटे की बहस के बाद कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन सरलीकरण राजस्थान संशोधन विधेयक 2020, कृषक सशक्तिकरण और संरक्षण कीमत आश्वासन कृषि सेवा पर करार संशोधन विधेयक 2020 तथा आवश्यक वस्तु विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 पारित किया गया। इस दौरान भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। संशोधित विधेयकों में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं वही किसान की उत्पीड़न पर सात साल तक की सजा तय की गई है। 

 
इससे पूर्व सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कानूनों के जरिए प्रधानमंत्री जी ने और भाजपा की सरकार ने किसानों के मौत का सामान दे दिया है। वे इन कानूनों के जरिए किसानों के लिए कफन लेकर आए हैं और निश्चित तौर पर यह कानून किसान को उसकी कब्र तक पहुंचाएगा। उन्‍होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा था कि जो किसान मंडी की जंजीरों में बंधा हुआ था उसे हमने आजाद कर दिया है लेकिन इस कानून के लागू होने के बाद वह पूंजीपतियों के दरवाजे से बंध कर रह जाएगा। केन्‍द्र ने किसानों को कारपोरेट घरानों के हवाले कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि मंडियों की स्‍थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उसकी उपज का उचित मूल्‍य दिलाना है, लेकिन जब मंडियों के आगे अंबानी और अडानी दुकान लगाकर बैठेंगे तो क्या यह मंडिया चल पाएंगे, इसलिए मंडी का आजादी की बात बेमानी है। उन्‍होंने कहा कि मंडी से एकत्र शुल्क से ही किसान कल्याण योजना चल रही हैं जो कि भाजपा के कार्यकाल में भी संचालित रहीं। धारीवाल ने कहा कि केन्‍द्र के कानूनों से अन्नदाता ही नहीं, खेत मजदूर, हमाल, पल्लेदार,  तुलादार,  छोटा व्यापारी कमीशन एजेंट, ट्रांसपोर्टर, मुनीम,  सफाई कर्मचारी यह सब बेरोजगार हो जाएंगे। धीरे-धीरे मंडिया बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाएंगी।
 
उर्जा मंत्री बीडी कल्‍ला ने कहा कि हमारे कॉर्पोरेट घरानों की इतनी क्षमता है कि वह पूरे देश की स्‍टाक खरीद सकते हैं। इससे हमारा देश परफेक्ट कंपटीशन से मोनोपोली बाजार की तरफ चला जाएगा। इसलिए हमने इसमें संशोधन किया है। 
 
राज्‍य सरकार द्वारा लाए गए कृषि संशोधन विधयकों का विरोध करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सरकार बताए कि आप किस चीज का विरोध कर रहे हैं जबकि आपके संशोधित विधयकों और  यहां तक कि आपके पार्टी के लोकसभा चुनावों के लिए लाए गए घोषणा पत्रों में अधिकांश बाते वही कही गई हैं जो केन्‍द्र के कृषि कानून में लिखी गईं हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के खत्म करने और एक राष्ट्र एक मार्केट, कांट्रेक्‍ट फार्मिंग की बात भी घोषणा पत्र में की गई थी। दुर्भाग्य हमारा देश का है कि देश के नेताओं ने 70 साल से अब तक को किसानों की उन्‍नति के बारे में सोचा नहीं। किसान की जो दुर्गति आप लोगों कारण बनी है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के कानून को ढंग से नहीं पढ़ा है और जल्दबाजी में यह विधेयक लाए गए हैं।
 
चर्चा की शुरुआत में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने केन्द्र सरकार के कृषि बिलों को किसानों विरोधी बताया। कटारिया ने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कृषि संबंधी कानून किसान विरोधी है। बड़ी बड़ी कंपनियां आएंगी और किसानों का शोषण करेंगी। देश में मंडिया समाप्त हो जाएगी। मंडियों के माध्यम से किसानों को जो सुविधाएं मिली है, वे भी समाप्त हो जाएगी। कोरोना काल में जीडीपी और विकास दर में कमी आई है। किसान की उपज को उचित भाव से बेचने के लिए प्रचलित न्‍यूनतम समर्थन मूल्य का भविष्‍य में क्या होगा, इसका कानून में कहीं खुलासा नहीं किया है।
 
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि लोकसभा, राज्‍यसभा और राष्‍ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू कानून के विरोध में राज्‍य सरकार किस आधार पर कोई विधेयक ला रही है, ये स्‍पष्‍ट किया जाना चाहिए।