राजस्थान काग्रेस मे जल्द आयेगा बदलाव।

चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत होगे ।अशफाक कायमखानी। जयपुर। साल के अंत ने वाले आम विधान सभा चुनाव मे बहुमत पाकर सरकार बनाने की चेष्टा मे कार्यरत कांग्रेस पार्टी के थींक टेंक की सलाह पर मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मे भी पार्टी हाईकमान जल्द बडा बदलाव करने जा रहा बताते है। प्रदेश …

राजस्थान काग्रेस मे जल्द आयेगा बदलाव। Read More »

April 27, 2018 11:55 am

चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत होगे
।अशफाक कायमखानी।
जयपुर। साल के अंत ने वाले आम विधान सभा चुनाव मे बहुमत पाकर सरकार बनाने की चेष्टा मे कार्यरत कांग्रेस पार्टी के थींक टेंक की सलाह पर मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मे भी पार्टी हाईकमान जल्द बडा बदलाव करने जा रहा बताते है।
प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलेट को बदले बीना उनके अलावा उनके साथ अलग अलग जाती व क्षेत्र के चार मजबूत व सक्रीय नेताओ को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत करने के अलाव कुछ चुनावो के समय बनने वाली लोक दिखावटी समितियो का गठन भी किया जायेगा।
कार्यकारी अध्यक्ष के लिये दलित- किसान- मुस्लिम व स्वर्ण वर्ग मे से अध्यक्ष बनाया जाना तय माना जा रहा है। जिनमे अगर मुस्लिम को कार्यकारी अध्यक्ष नही बनाया गया तो उसकी जगह किसी आदीवासी नेता को मोका मीलना तय है। किसान वर्ग मे पुर्व सांसद ज्योती मिर्धा या पुर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया मे से कोई एक, दलीतो आदिवासियो मे से पुर्व सासंद रघूवीर मीणा, पुर्व मंत्री मास्टर भवंर लाल या फिर पुर्व केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा मे से एक, मुस्लिम वर्ग मे से दूर्रु मीया या फिर जूबेर खान एवं स्वर्ण मे पुर्व मंत्री शांती धारीवाल, पुर्व विधायक हरीमोहन शर्मा या फिर पुर्व विधायक चंद्र शेखर वेद मे से कोई एक कार्यकारी अध्यक्ष बन सकते है।
राजस्थान के पुर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गुजरात चुनावो के बाद से पार्टी मे रुतबा बढता जा रहा है। गहलोत पार्टी के संगठन महामंत्री बनने के साथ साथ सर्वोच 14-सदस्यीय समिती “चुनाव समिती” के सदस्य होने के साथ साथ अनेक समितियो के सदस्य बने होने के कारण दिल्ली मे सियासी गौटिया फीट करने की पुरी कोशिश करेगे। गहलोत अपने विरोधीयो को समय आने पर ढंग से ठिकाने लगाने के माहिर माने जाते है।हालाकि जातीय जनाधार के हिसाब से गहलोत जरा कमजोर है। लेकिन उन्होने बडी बीरादरी आधार वाले नेताओ को अपनी कूटनीतीयो से कमजोर साबीत किया है। उनके अलावा उनकी बीरादरी के एक ओर विधायक उनकी पार्टी मे जीत कर आया पर गहलोत दो दफा मुख्यमंत्री बन कर सबको चोकाते रहे है।
कुल मिलाकर यह है कि ज्यो जयो आम विधान सभा चुनाव नजदीक आते जायेंगे त्यो त्यो गहलोत समर्थक नेताओ का अलग अलग पोस्ट पर मनोयन होता रहेगा। धिरे धिरे सचिन पायलेट अध्यक्ष होने के बावजूद कमजोर नजर आने लगेगे ओर गहलोत की तूती फिर बोलने लगेगी। इस बदलाव की कड़ी मे पहले पहल जल्द मई के पहले सप्ताह तक चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षो का मनोयन होना है।

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