अब तीसरे मोर्चे पर टिकी सबकी निगाहें

  जयपुर,  । प्रदेश में तीसरी शक्ति बनकर उभरने का दावा कर रहे दलों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लोकतांत्रिक मोर्चे के साथ ही भारत वाहिनी पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सूची का अभी इंतजार है तो बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी अभी कई सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित …

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November 16, 2018 11:16 am

 

जयपुर,  । प्रदेश में तीसरी शक्ति बनकर उभरने का दावा कर रहे दलों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लोकतांत्रिक मोर्चे के साथ ही भारत वाहिनी पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सूची का अभी इंतजार है तो बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी अभी कई सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने का आज पांचवा दिन है लेकिन अभी तक राजनीतिक पार्टियों में सभी प्रत्याशियों को लेकर संशय बना हुआ है।

माक्र्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख घटक दल वाले लोकतांत्रिक मोर्चा, घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने अभी अपने सभी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है। वहीं आम आदमी पार्टी ने अभी तक 104 तो बहुजन समाज पार्टी ने भी अभी तक 78 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। दरअसल बीजेपी और कांग्रेस के सामने जहां चुनौती टिकटों की सूची जारी होने के बाद बगावत को थामने की है वहीं तीसरे मोर्चे की रणनीति इन दोनों पार्टियों में होने वाली इस बगावत से पूरा फायदा उठाने की नजर आ रही है।

तीसरी शक्ति होने का दावा

भाजपा अभी तक दो सूचियां जारी कर चुकी है। इन सूचियों के आने के बाद पार्टी में बड़े स्तर पर बगावत देखने को मिल रही है वहीं कांग्रेस की सूची जारी होने के बाद भी हालात कुछ इसी तरह होने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी और कांग्रेस से निराश होने वाले दावेदार दूसरे दलों का दामन थाम कर अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कवायद करेंगे। प्रदेश में तीसरा मोर्चा संगठित नहीं हैं। कई दल और गठबंधन अलग-अलग रूप से खुद को तीसरी शक्ति होने का दावा कर रहे हैं।

मजबूत प्रत्याशियों का टोटा

कई दल ऐसे हैं जिनके पास सीटों पर योग्य और मजबूत प्रत्याशियों का भी टोटा है। बीजेपी और कांग्रेस में जहां दावेदारों को संतुष्ट करने की चुनौती है तो तीसरे मोर्चे के सामने चुनौती ऐसे चेहरों को ढूंढने की है जो दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों को पटखनी दे सकें। जब भाजपा और कांग्रेस में बगावत होगी तो इन दलों को उम्मीद है की निराश होने वाले नेता इनसे सपंर्क साधेंगे। ऐसे में निराश और नाराज नेताओं को जहां नया ठिकाना मिलेगा तो चुनाव में दमदार प्रदर्शन का सपना संजो रहे दलों को भी संजीवनी मिलेगी

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