लोकसभा चुनाव- कांग्रेस को नहीं मिल रहे हैं प्रत्याशी, क्या कांग्रेस का पतन ?

Dr. CHETAN THATHERA
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जयपुर / चेतन ठठेरा। देश में लोकसभा चुनाव का आज से ठीक तीन दिन बाद बिगुल बजाने वाला है अर्थात 15 मार्च से चुनाव की तारीख को का ऐलान और आचार संहिता लग जाएगी पूरा देश चुनावी रंग में रंग जाएगा लेकिन चुनावी मौसम शुरू होने से पहले ही कभी देश की सबसे मजबूत पार्टी माने जाने वाली कांग्रेस की हालत क्या हो रही है यह सब जग जाहिर है स्थिति यह है कि कांग्रेस को चुनाव मैदान में उतारने के लिए प्रत्याशी तक नहीं मिल रहे हैं ।

कांग्रेस पार्टी जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू सरदार वल्लभभाई पटेल लोह पुरुष इंदिरा गांधी राजीव गांधी आदि नेताओं ने बड़ी मेहनत करके सींचा और विशाल कुनबा बनाया लेकिन इस कुनबे का पतन राजीव गांधी की हत्या के बाद और सोनिया गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही शुरू हो गया था इस पतन मे सीताराम केसरी ने भी अपनी भागीदारी निभाई थी । वर्तमान में कांग्रेस की स्थिति यह हो गई है कि उसे क्षेत्रीय और विरोधी दलों के साथ हाथ मिलाकर भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए कुछ समय पहले इंडिया गठबंधन बनाया।

लेकिन इस गठबंधन की हवा सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए मे शामिल होकर निकल दी और फिर धीरे-धीरे एक-एक कर गठबंधन के दल अलग होते गए हालांकि अभी भी इंडिया गठबंधन है जिसमें कांग्रेस सहित कुछ क्षेत्रीय दल शामिल है। लेकिन कांग्रेस की स्थिति इतनी दयनीय और खराब हो जाएगी यह तो कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि कांग्रेस के इतने बुरे दिन आएंगे की लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरने के लिए प्रत्याशी तक नहीं मिलेंगे ।

अगर उदाहरण की बात की जाए तो राजस्थान प्रदेश को ही ले लीजिए यहां लोकसभा में 25 सीटे राजस्थान से है और राजस्थान में अभी हाल ही में ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार हुई थी। कांग्रेस के यहां से दिग्गज नेता अशोक गहलोत सचिन पायलट गोविंद सिंह डोड़सरा जैसे नेता है लेकिन इसके बाद भी यहां 25 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस के पास मजबूत प्रत्याशी नहीं है ।

अशोक गहलोत सचिन पायलट गोविंद सिंह डोटासरा रघु शर्मा शांति धारीवाल रामलालजाट सीपी जोशी गिरिजा व्यास जैसे दिग्गज नेता लोकसभा चुनाव लड़ना नहीं चाहते आखिर उनके मन में शायद कहीं ना कहीं एक डर सत्ता रहा है ।

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की यह स्थिति थी कि टिकट लेने के लिए कांग्रेस नेताओं में होड़ मची हुई थी सिफारिशें आ रही थी कि उनको टिकट मिले जिनको टिकट नहीं मिला वह विरोध कर रहे थे और अब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की यह स्थिति है कि कांग्रेस का कोई नेता टिकट नहीं मांग रहा है और न हीं टिकट के लिए होडाहोड मची हुई है। स्थिति तो यह है कि पार्टी जिस मैदान में उतारने के लिए पैनल बना रही है वही नेता यह प्रयास में लगा हुआ है कि उसे किसी तरह से टिकट नहीं मिले और वह चुनाव से बच जाए।

उदाहरण के तौर पर भीलवाड़ा लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री रहे तथा किसान नेता रामलाल जाट और प्रियंका वाड्रा व राहुल गांधी के खास धीरज गुर्जर मे से एक को पार्टी भीलवाड़ा से चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन अंदर खाने से दोनों नेता इस फिराक में है कि वह इससे बच जाए ? ऐसी स्थिति अन्य जिलों में भी है कांग्रेस की यह स्थिति कंही कांग्रेस के पतन का संकेत तो नही ?

राजस्थान में रविवार को ही कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मंत्री और विधायक सहित करीब 25 से अधिक कांग्रेस नेताओं का कुनबा कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुआ है ऐसी ही स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी है और इस तरह कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने की प्रक्रिया कांग्रेस के पतन का संकेत तो नहीं है ?

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चेतन ठठेरा ,94141-11350 पत्रकारिता- सन 1989 से दैनिक नवज्योति - 17 साल तक ब्यूरो चीफ ( भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़) , ई टी राजस्थान, मेवाड टाइम्स ( सम्पादक),, बाजार टाइम्स ( ब्यूरो चीफ), प्रवासी संदेश मुबंई( ब्यूरी चीफ भीलवाड़ा),चीफ एटिडर, नामदेव डाॅट काम एवं कई मैग्जीन तथा प समाचार पत्रो मे खबरे प्रकाशित होती है .चेतन ठठेरा,सी ई ओ, दैनिक रिपोर्टर्स.कॉम