किसान सम्मेलनों के बहाने पायलट राजस्थान की सियासत में दिखाएंगे अपनी ताकत

Jaipur News । राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने कमजोर साबित हो चुके पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अब प्रदेश भर में किसान सम्मेलन करेंगे। वे शुक्रवार से इसकी शुरूआत दौसा से करने जा रहे हैं। पायलट ने गुरुवार शाम ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।   इसके बाद वे 9 फरवरी …

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February 4, 2021 8:48 pm
Jaipur News । राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने कमजोर साबित हो चुके पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अब प्रदेश भर में किसान सम्मेलन करेंगे। वे शुक्रवार से इसकी शुरूआत दौसा से करने जा रहे हैं। पायलट ने गुरुवार शाम ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

 
इसके बाद वे 9 फरवरी को भरतपुर के बयाना और फिर 17 फरवरी को चाकसू क्षेत्र के कोटखावदा में सभा करेंगे। केन्द्रीय कृषि बिलों को लेकर मोदी सरकार का विरोध करने के बहाने पायलट शक्ति प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री गहलोत और आलाकमान को राजस्थान की राजनीति में अपनी सियासी जमीन दिखाना चाह रहे हैं। किसान सम्मेलन के जरिए पायलट जमीनी जनाधार को रिचार्ज करेंगे। बताया जा रहा है कि पायलट के सियासी मित्रों ने उन्हें जयपुर से बाहर निकलकर फील्ड के दौरे करने की सलाह दी है। इसके बाद ही पायलट ने गांव-गांव दौरे करने और लोगों के बीच जाने की रणनीति बनाई है।
 
रणनीति के पहले चरण में पायलट किसान सम्मेलन करेंगे। वहीं, दूसरे चरण में लोगों की पॉपुलर डिमांड वाले मुद्दों को उठाएंगे। पहले चरण में उन जिलों में पायलट के दौरे होंगे जहां उनके समर्थक विधायक ज्यादा हैं। किसान सम्मेलन भी उन्हीं जिलों में रखे गए हैं। दौसा में पायलट समर्थक मुरारीलाल मीणा विधायक हैं, जहां शुक्रवार से किसान सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। पायलट का दूसरा किसान सम्मेलन बयाना में हैं जहां उनके समर्थक अमरसिंह जाटव विधायक हैं और चाकसू में वेदप्रकाश सोलंकी विधायक हैं। ये तीनों विधायक बाड़ेबंदी में पायलट के साथ शामिल थे।
जानकारों का कहना है कि पायलट ने आंध्रप्रदेश में अपनाए गए जगनमोहन रेड्डी मॉडल को राजस्थान के हिसाब से मॉडिफाइड कर सियासत में आगे बढऩे का फैसला किया है। इस मॉडल में फील्ड में लगातार सक्रियता, सही मौकों पर ताकत दिखाने और विधायकों से लेकर ग्रासरूट स्तर तक अपने समर्थकों को हमेशा सक्रिय और उत्साहित रखने की रणनीति है। मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में लगातार देरी को सचिन पायलट खेमे को कमजोर करने की रणनीति से ही जोडक़र देखा जा रहा है।

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