राजस्थान में करणीमाता मंदिर को 4 जनवरी तक तोड़ने के हाईकोर्ट ने दिए आदेश

जयपुर/ जोधपुर/ जोधपुर हाईकोर्ट ने जन-जन की आस्था के केंद्र करणी माता के मंदिर को 4 जनवरी तक तोड़ने के आदेश दिए हैं और मंदिर तोड़कर इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को 4 जून तक देने की हिदायत दी गई है हाईकोर्ट के इस आदेश को लेकर श्रद्धालुओं और भक्तों में आक्रोश व्याप्त है।

 

बताया जाता है कि चुरू जिले के सरदारशहर मैं बीकानेर रोड पर स्थित करणी माता का मंदिर है और सड़क से 75 फीट की दूरी में यह मंदिर स्थित है इसको लेकर शहर के ही मिला माली नामक व्यक्ति ने जोधपुर हाई कोर्ट में मंदिर को हटाने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी और इस याचिका पर सुनवाई व निर्णय करते हुए ।

14 दिसंबर को हाईकोर्ट ने चुरू जिला कलेक्टर के नाम एक आदेश जारी किया कि 4 जनवरी 2023 तक इस मंदिर को तोड़कर रिपोर्ट प्रस्तुत प्रस्तुत करें ।

उधर इस आदेश के खिलाफ श्रद्धालु और ग्रामीण हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है और इस याचिका को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है ।

स्थानीय लोगों के अनुसार ये मंदिर  करीब 60 साल पहले स्वर्गीय पूर्णाराम प्रजापत ने बनवाया था और जिसके बाद से लगातार यहां पर श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पर मत्था टेकने आते हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर के आदेश पर उपखंड अधिकारी बृजेंद्रसिंह मौका रिपोर्ट करने पहुंचे, उसके बाद तहसीलदार पटवारी भी यहां पर मौका रिपोर्ट करने पहुंचे और मंदिर तोड़ने की सूचना स्थानीय श्रद्धालुओं को लगी सैकड़ों की संख्या में शहर के श्रद्धालु मंदिर पर इकट्ठे हो गए और मंदिर तोड़ने के आदेश का विरोध जताने लगे, मंदिर तोड़ने की सूचना पूरे शहर में आग की तरह फैल गई और धीरे-धीरे शहरवासी यहां पर जुटने शुरू हो गए। 

श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ भी हो जाए, इस मंदिर की 1 ईंट तक को यहां से नहीं हटाने देंगे, इस मौके पर शहर के हरिराम सैनी के अनुसार इस मंदिर से 1 किलोमीटर स्थित इसी सड़क पर काफी मंदिर है, जो 75 फीट की दूरी के दायरे में आते हैं,

लेकिन उन मंदिरों को ना हटाकर सिर्फ इसी मंदिर को हटाया जा रहा है, लेकिन चाहे कुछ भी हो जाए हम इस मंदिर को यहां से नहीं हटाने देंगे, हाईकोर्ट के इस आदेश से हमारी आस्था को ठेस पहुंची है। 

लोगों का ये भी कहना है कि कुछ समय पहले इस मंदिर को लेकर विवाद भी हुआ था, इस मंदिर के पास की जमीन को किसी व्यक्ति ने खरीदा था जिसको लेकर यहां पर रास्ते को लेकर विवाद हुआ था,

जिसके बाद मौके पर पुलिस भी आई थी और उन्होंने ये माना था कि मंदिर रास्ते की भूमि पर नहीं है, लेकिन उसके बाद दो नंबर सत्तू कॉलोनी के मिलाप माली और रामनगर बास के पंकज माली ने हाईकोर्ट में इस मंदिर को तुड़वाने को लेकर एक रिट दायर की। 

 हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ग्रामीणो ने भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है और यह याचिका को एक न्यायालय ने स्वीकार भी कर लिया गया है ।

ग्रामीणो ने कलेक्टर एसडीएम और तहसीलदार से गुहार लगाई है कि जब तक उनके द्वारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई नहीं होती, तब तक इस मंदिर को नहीं तोड़ा जाए ।

 एसडीएम बृजेंद्रसिंह के अनुसार 14 दिसंबर को हाई कोर्ट जोधपुर द्वारा एक फैसला आया है, कि बीकानेर रोड स्थित एक मंदिर है जो रोड बाउंड्री में आता है और अतिक्रमण क्षेत्र में है,

उस मंदिर को 4 जनवरी 2023 तक हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए जिस पर हमने और तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी सहित अन्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मौका मुआयना करवाया गया तो मौके पर पाया गया कि ये मंदिर कच्ची मिट्टी के ऊपर टिका हुआ था और कुछ समय पहले पास वाली भूमि के मालिक ने भूमि को समतल किया गया ।

तब ये मंदिर गिरने की कगार पर आ गया, तो स्थानीय लोगों ने इस मंदिर को बचाने के लिए यहां पर निर्माण किया, अभी स्थानीय लोगों की आस्था और भावनाओं को देखते हुए और हाईकोर्ट उच्च न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी ।