कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने खोली कांग्रेस की पोल,कांग्रेस हिन्दू विरोधी

Dr. CHETAN THATHERA
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जयपुर। देश में कांग्रेस की हालत डूबते जहाज की तरह हो रही है और लोकसभा चुनाव के साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता चाहे व राष्ट्रीय स्तर के हो या प्रदेश स्तर के सभी का कांग्रेस से मोह भंग होने लगा है और एक-एक करके सभी कांग्रेस से किनारा करके जा रहे हैं और इसी कड़ी में आज जो कभी टीवी चैनलों पर कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखकर कांग्रेस की पहली करते थे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने आज कांग्रेस का साथ छोड़ते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है और कांग्रेस छोड़ने से पहले गौरव वल्लभ ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडके को लिखे पत्र में कांग्रेस की पूरी पोल खोल दी। कांग्रेस को हिंदू विरोधी करार देते हुए कांग्रेस को गांधी परिवार की पिछलग्गू को भी बताया । कांग्रेस छोड़ने से पहले गौरव वल्लभ ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडके को लिखा हुआ पत्र हूबहू यह है।

 

 

श्री मल्लिकार्जुन खरगे अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नयी दिल्ली

नमस्कार

भावुक हूं, मन व्यथित है, काफी कुछ कहना चाहता हूं, लिखना चाहता हूं, बताना चाहता हूं। लेकिन मेरे संस्कार ऐसा कुछ भी कहने से मना करते हैं जिससे दूसरों को कष्ट पहुंचे, फिर भी मैं आज अपनी बातों को आपके समक्ष रख रहा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि सच को छुपाना भी अपराध है और मैं अपराध का भागी नहीं बनना चाहता।

महोदय, मैं वित्त का प्रोफेसर हूं, कांग्रेस पार्टी की सदस्यता हासिल करने के बाद पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। कई मुद्दों पर पार्टी का पक्ष दमदार तरीके से देश की महान जनता के समक्ष रखा, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पार्टी के स्टैंड से असहज महसूस कर रहा हंू।

जब मैंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन किया तब मेरा मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। जहां पर युवा, बौद्धिक लोगों की, उनके आइडिया की कद्र होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुझे यह महसूस हुआ कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप नये आइडिया वाले युवाओं के साथ ख़ुद को एडजस्ट नहीं कर पाती। पार्टी का ग्राउंड लेवल कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है, जो नये भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है।

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जिसके कारण न तो पार्टी सत्ता में आ पा रही और ना ही मजबूत विपक्ष की भूमिका ही निभा पा रही हैं। इससे मेरे जैसा कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है। बड़े नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बेहद कठिन है जो कि राजनीतिक रूप से जरूरी है। जब तक एक कार्यकर्ता अपने नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकता तब तक किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन संभव नहीं है।

 

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः तस्माधर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ॥

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस पार्टी के स्टैंड से मैं क्षुब्ध हूं, मैं जन्म से हिंदू और कर्म से शिक्षक हूं, पार्टी के इस स्टैंड ने मुझे हमेशा असहज किया, परेशान किया। पार्टी व गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन के विरोध में बोलते हैं और पार्टी का उसपर चुप रहना, उसे मौन स्वीकृति देने जैसा है।

इन दिनों पार्टी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है, एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक ख़ास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है। यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।

आर्थिक मामलों पर वर्तमान समय में कांग्रेस का स्टैंड हमेशा देश के वेल्थ क्रिएटर्स को नीचा दिखाने काए उन्हें गाली देने का रहा है। आज हम उन आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण व वैश्वीकरण (एलपीजी) नीतियों के खिलाफ हो गए हैं जिसको देश में लागू कराने का पूरा श्रेय दुनिया ने हमें दिया है। देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नज़रिया हमेशा नकारात्मक रहा। क्या हमारे देश में बिजऩेस करके पैसा कमाना गलत है।

महोदय, जब मैंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, उस वक्त मेरा ध्येय सिर्फ यही था कि आर्थिक मामलों में अपनी योग्यता व क्षमता का देशहित में इस्तेमाल करूंगा। हम सत्ता में भले नहीं हैं, लेकिन अपने मैनीफेस्टो से लेकर अन्य जगहों पर देशहित में पार्टी की आर्थिक नीति-निर्धारण को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते थे। लेकिन पार्टी स्तर पर यह प्रयास नहीं किया गया, जो मेरे जैसे आर्थिक मामलों के जानकार व्यक्ति के लिए किसी घुटन से कम नहीं है।

पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा। मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर को गाली दे सकता हंू। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहा हूं।

व्यक्तिगत रूप से मैं आपसे मिले स्नेह के लिए हमेशा आभारी रहूँगा

शुभकामनाओं सहित

भवदीय

प्रो. गौरव वल्लभ

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चेतन ठठेरा ,94141-11350 पत्रकारिता- सन 1989 से दैनिक नवज्योति - 17 साल तक ब्यूरो चीफ ( भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़) , ई टी राजस्थान, मेवाड टाइम्स ( सम्पादक),, बाजार टाइम्स ( ब्यूरो चीफ), प्रवासी संदेश मुबंई( ब्यूरी चीफ भीलवाड़ा),चीफ एटिडर, नामदेव डाॅट काम एवं कई मैग्जीन तथा प समाचार पत्रो मे खबरे प्रकाशित होती है .चेतन ठठेरा,सी ई ओ, दैनिक रिपोर्टर्स.कॉम