For the sixth time in the third term of the Gehlot government, instead of Jaipur, this time Udaipur was chosen.
जयपुर राजस्थान

गहलोत सरकार के तीसरे कार्यकाल में छठीं बार विधायकों की सियासी बाड़ेबंदी, जयपुर की बजाए इस बार उदयपुर को चुना

जयपुर।  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तीसरे शासन काल में राजस्थान पॉलिटिकल टूरिज्म का हब बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  तीन बार अपने विधायकों की बाड़ेबंदी कराने के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और असम के विधायकों की भी बाड़ेबंदी करा चुके हैं।
 
हालांकि पूर्व में बाड़ेंबदी के लिए जयपुर को सबसे महफूज डेस्टिनेशन माना जाता रहा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बार राज्यसभा चुनाव के चलते विधायकों की बाड़ेबंदी के लिए जयपुर को नहीं चुनकर उदयपुर को चुना गया है, जहां उदयपुर के लिए अरावली रिसोर्ट में विधायकों की बाड़ाबंदी होगी। उदयपुर के लिए अरावली रिसोर्ट में कांग्रेस का राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन बीते माह हो चुका है। 
 
पहले जयपुर था बाड़ेबंदी के लिए पहली पसंद 
 
वहीं विधायकों की सियासी बाड़ेबंदी के लिए पहले जयपुर सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन रहा है। अन्य राज्यों के विधायकों के साथ-साथ खुद मु्ख्यमंत्री अशोक गहलोत भी दो बार अपने विधायकों की बाड़ेबंदी जयपुर में करा चुके हैं। एक बार राज्यसभा चुनाव और एक बार सियासी संकट के समय जयपुर में हो चुकी है बाड़ेबंदी। 
 
बीते साल असम कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी 
 
अप्रेल 2021 में हुए असम विधानसभा चुनाव के बाद असम कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों की जयपुर 9 अप्रेल 2021 बाड़ाबंदी की गई थी। दो दर्जन से ज्यादा गठबंधन के प्रत्याशियों को जयपुर के होटल फेयरमाउंट में ठहराया गया था। तकरीबन एक सप्ताह के बाद इन्हें वापस विशेष विमान से असम गुवाहाटी भेजा गया था।
 
महाराष्ट्र के विधायकों की बाड़ाबंदी 
 
साल 2019 में नवंबर माह में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए जयपुर में बाड़ाबंदी की गई थी। महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों को दिल्ली रोड स्थित होटल ब्यूना विस्ता रिसोर्ट में ठहराया गया था और बहुमत साबित होने तक विधायक जयपुर में ही रुके थे। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों की बाड़ाबंदी की कमान संभाली थी।
 
मध्य प्रदेश में सियासी संकट 
 
फरवरी 2020 में मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के चलते तत्कालीन कमलनाथ सरकार पर आए सियासी संकट के दौरान भी मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायकों की जयपुर में बाड़ाबंदी की गई थी। इन विधायकों को भी होटल ब्यूना विस्ता और शिव विलास में शिफ्ट किया गया था। तकरीबन 15 दिनों तक मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक जयपुर में ही रुके थे। हालांकि कमलनाथ सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए और सरकार गिर गई थी ।
 
गुजरात कांग्रेस के विधायकों बाड़ाबंदी 
 
वहीं फरवरी 2020 में राज्यसभा चुनाव के चलते गुजरात कांग्रेस के विधायकों को भी जयपुर के शिव विलास रिसोर्ट में शिफ्ट किया गया था, यहां गुजरात के आधे विधायकों को शिव विलास तो आधे विधायकों को ग्रीन टी हाउस में ठहराया गया था। हालांकि इस दौरान गुजरात के विधायकों ने जयपुर के ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण भी किया था।
 
 राजस्थान के विधायकों की दो बार बाड़ाबंदी
 
 प्रदेश के कांग्रेस विधायकों और समर्थित विधायकों की भी जयपुर में ही 2 बार बाड़ाबंदी हुई थी। जून 2020 में 3 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते कांग्रेस के विधायकों की जयपुर में शिव विलास और और एक अन्य लग्जरी रिसोर्ट में बाड़ाबंदी की गई थी। इस बाड़ाबंदी में पार्टी के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित कई अन्य नेता भी शामिल थे। 
 
पायलट कैंप की बगावत के चलते भी थी बाड़ाबंदी
 
 जुलाई 2020 में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट कैंप के बगावत करने के बाद भी कांग्रेस और समर्थित विधायकों की जयपुर में होटल फेयरमाउंट में बाड़ाबंदी की गई थी। तकरीबन 35 दिनों तक सरकार बाड़ाबंदी में ही रही थी। इस दौरान गहलोत सरकार ने सदन में बहुमत साबित करके सरकार बचाई थी।
Sameer Ur Rehman
Editor - Dainik Reporters http://www.dainikreporters.com/