फोन टैपिंग मामला : राजस्थान विधानसभा में विवाद ख़त्म होने का नाम नही ले रहा है ,दूसरे दिन भी हुआ जमकर हंगामा

जयपुर। सियासी संकट के बीच फोन टैपिंग के सवाल पर राज्य सरकार की स्वीकारोक्ति के बीच बुधवार को राज्य विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सरकार की तरफ से पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि अगर किसी जनप्रतिनिधि का फोन टैप हुआ हो और भाजपा यदि यह साबित कर दे कि बिना किसी सक्षम अधिकारी के इजाजत के किसी का फोन टेप किया गया है तो वे मुख्यमंत्री समेत इस्तीफा देने को तैयार है।

विपक्ष (भाजपा) की ओर से सदन में मंगलवार को लाए गए फोन टैपिंग पर स्‍थगन प्रस्‍ताव को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी द्वारा रिजेक्‍ट किए जाने के बाद हुए हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष ने बुधवार को इस मुद्दे पर शून्‍यकाल में चर्चा की अनुमति दी थी। चर्चा के बाद संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने इस मसले पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अवैध हथियार तथा भारी विस्फोटक के राज्य में आने की जानकारी मिलने के बाद सक्षम अनुमति से फोन टैपिंग करवाई जा रही थी, इसी दौरान उदयपुर के अशोक सिंह और भरत मालानी की हथियार तस्‍करी को लेकर बातचीत सामने आई और ये बातचीत धीरे-धीरे राजनीतिक चर्चा में बदल गई। दोनों के बीच सरकार पर संकट से लेकर विधायकों की खरीद फरोख्त की बातें की जाने लगी। ये बातचीत सामने आने के बाद स्‍पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने पहली एफआईआर दर्ज करवाई।

इसके बाद मुख्य सचेतक महेश जोशी ने ऑडियो क्लिप तथा अखबारों के समाचारों के आधार पर तीन मामले दर्ज करवाये। उन्‍होंने कहा कि जो टैप सामने आए हैं, उनमें किसी गजेंद्र सिंह और भंवर लाल का नाम भी सामने आया है, जो संजय जैन से सरकार गिराने के संबंध में बात कर रहा है। यह गजेंद्र सिंह कौन है जो जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अशोक सिंह और मालाणी राजनेता नहीं है। फोन टैपिंग का मुद्दा विपक्ष बार बार उठा रहा है, मैं यह मानता हूं कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को बचाने के लिए उठाया जाता है। तीन दिन तक एसओजी के बड़े से बड़े अधिकारी उनके घर और कार्यालय चक्कर लगाते रहे, लेकिन वॉइस सैंपल नहीं दिया गया। अगर वे पाक साफ है तो उन्हें वॉयस सैंपल देना चाहिए था। धारीवाल ने विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया वक्तव्य भी पढ़ कर सुनाया जिसमें कहा गया कि अगर किसी जनप्रतिनिधि का फोन टैप होना साबित होता है तो सीएम इस्‍तीफा देने को तैयार हैं।

विपक्ष अब इस मुद्दे पर दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए विपक्ष सिर्फ केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का वॉयस सैम्पल दिलवा दें। उन्‍होंने सीएम के ओएसडी लोकेश शर्मा का नाम उल्‍लेख करते हुए कहा कि लोकेश शर्मा के पास कोई ऑडियो क्लिप आई और उसने इसे वायरल कर दिया तो उसने कोई गुनाह नहीं किया है।

धारीवाल ने आमेर विधायक डॉ. सतीश पूनियां पर निशाना साधते हुए कहा कि पूनियां जी आप अभी नए हो, बहुत कठिन है डगर पनघट की। अभी आप मध्यावधि चुनाव की बात कर रहे हो, कहीं आप मध्यावधि में नहीं चले जाओ, भटको मत। उन्होंने कहा कि इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत केन्द्र की नौ व राज्य की एक एजेन्सी फोन टैपिंग करती है। उन्होंने भाजपा विधायक कालीचरण सराफ को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके एक सवाल से जो चिंगारी उठी है, वह विपक्ष को ले डूबेगी।

धारीवाल ने कहा कि विपक्ष की ओर से विधानसभा सचिव को एक पत्र लिखा गया है, जिसमें उन्होंने रिलैक्सेशन मांगा है, रिलैक्सेशन तब मांगा जाता है जब आपके पास सबूत नहीं हो। नियमों में किसी तरह का रिलैक्सेशन नहीं दिया गया है, किसी भी जनप्रतिनिधि की निजता ना तो पहले भंग की गई है और न ही आगे भंग करेंगे।

इसके बाद उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने इस मुद्दे पर सीबीआई जांच की मांग की। इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल की ओर से यह कहने पर कि केन्‍द्र सरकार ने 90 हजार फोन टेप करवाए हैं, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया तथा संसदीय कार्यमंत्री धारीवाल के बीच नोकझोक हो गई और भाजपा के सभी विधायक वेल में पहुंच गए। हंगामा बढ़ते देख सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ी। आधे घंटे बाद सदन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन भाजपा के हंगामे पर दोबारा कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

इससे पूर्व स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा शुरु करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा की सरकार भारतीय तार अधिनियम के तहत राष्‍ट्रीय सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए सक्षम अधिकारी की अनुमति से सरकार किसी का फोन टैप करा सकती है। लेकिन यहां तो जनप्रतिनिधिओं के फोन टेप हुए हैं जो कि निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सब कह रहे हैं, सरकार कह रही है कि हमने फोन टैप नहीं कराए तो यह किसने कराए, इसकी जानकारी हमें दी जाए। उन्होंने चुनौती दी कि यदि सरकार में दम है तो सभी दोषियों को गिरफ्तार करे, वरना उन तीन लोगों का क्या दोष था जो इस मामले में जेल में रहे। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस मामले को क्‍यों दफ्तर दाखिल किया जा रहा है। धूले में डालकर मिट्टी क्यों डाली जा रही है। उन्हें कहा, यह कांग्रेस का राजनीतिक स्टंट है और भाजपा के खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना गृह विभाग की जानकारी के कांग्रेस पार्टी ने मिलीभगत से यह फोन टैप किया गया है

भाजपा विधायक और पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कांग्रेस की परंपरा आपातकाल की रही है। देश में कई बार फोन टैपिंग कराई गई। इस मामले में सरकारें भी चली गई। सीबीआई जांच के आदेश भी दिए गए। राजस्थान के मामले में भी सरकार यही करें। उन्होंने सरकार से पूछा कि किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से फोन टैप कराए गए, यह टैप कहां हुए और इन पर क्या कार्रवाई हुई। क्या कोई स्टैंडर्ड प्रोसिजर फॉलो किया गया।

उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्‍द्र सिंह राठौड ने कहा की सीएम के ओएसडी लोकेश शर्मा ने किस अधिकार से ये टैप व्हाट्सएप पर वायरल किए। उन्होंने कहा कि यह टैपिंग भारतीय तार अधिनियम को धता बताकर की गई है। नैतिकता है तो सरकार इस्तीफा दे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री निवास पर यह टैपिंग हुई है। यह हमारी निजता पर हमला है। सरकार को रहने का अब कोई हक नहीं है।