शिक्षा विभाग- स्कूलों में वितरण से पहले शिक्षक व एसएमसी सदस्यों  को टेस्ट के रूप में  पीना होगा दूध, फिर बच्चों को…

Jaipur News in Hindi | The teacher forged headmaster's signature

जयपुर/ भीलवाड़ा।  राजस्थान मे सरकारी स्कूलो मे राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना( दूध वितरण) के तहत बच्चो से पहले शिक्षको व एसएमसी सदस्यो को दूख टेस्ट करना होगा ।

बाल गोपाल योजना के तहत सप्ताह में दो दिन जिले के 2.90 लाख बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है। योजना के अनुसार हर स्कूल में छात्र/छात्राओं को प्रार्थना सभा के तुरंत बाद दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। इसका पूरा उत्तरदायित्व विद्यालय प्रबंधन समिति यानि एसएमसी का होगा।

दूध को चेक करने की जिम्मेदारी वहां मौजूद स्टाफ से लेकर एसएमसी सदस्य की रहेगी। अभिभावक भी वहां मौजूद रहकर दूध बनने की प्रोसेस देख सकते हैं और स्वाद चख सकते हैं। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही बच्चों के हाथ में दूध का ग्लास थमाया जाएगा।

मिड डे मील योजनांतर्गत सभी स्कूलों दूध तैयार कर गर्म करने, विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने, बर्तनों की साफ-सफाई के लिए एसएमसी द्वारा एक व्यक्ति की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। इसके लिए विभाग द्वारा व्यक्ति को 500 रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान भी किया जाएगा। यानी, स्कूलों में दूध गर्म करने से लेकर बंटवाने तक की प्रोसेस को पूरा करने के लिए स्टाफ के साथ साथ अन्य व्यक्ति भी देखरेख करेगा।

जिले भर के सरकारी स्कूलों एवं मदरसों में सहित विशेष प्रशिक्षण केंद्रों आदि में अध्ययनरत बच्चों के लिए पाउडर से दूध तैयार कर दिया जा रहा है। कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चों को 15 ग्राम पाउडर दूध से 150 एमएल और कक्षा छठी से 8वीं तक के बच्चों को 20 ग्राम‎ पाउडर दूध से 200 एमएल दूध‎ तैयार कर पिलाना है।

इनकी जुबानी

स्कूलों में दूध पाउडर मिक्स करने से लेकर बच्चों तक पहुंचाने के लिए संस्था प्रधान से लेकर स्टाफ की ड्यूटी तय की गई है। दूध बनाते समय अभिभावक खुद भी मौजूद होकर चेक कर सकते हैं।

-डाॅ. महावीर प्रसाद शर्मा कार्यवाहक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, भीलवाड़ा