CM गहलोत दबाव विहीन होकर राजस्थान के राजनीति पिच पर अब खुलकर करेंगे वेंटिग

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष था पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच और दोनों ही नेताओं के समर्थकों के बीच चल रही खींचतान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वर्चस्व की लड़ाई जग जाहिर है पायलट पर पार्टी से बगावत कर सरकार गिराने तक के आरोप भी लगे हैं

July 25, 2022 6:36 pm

जयपुर/ राजस्थान में साढे 3 साल पहले बहुमत हासिल कर सकता पर काबिज हुई थी और सत्ता के सिहासन मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर इस कुर्सी के दावेदार तत्कालीन कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और दो बार पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत के बीच शक्ति प्रदर्शन और घमासान शुरू हुआ था जो अभी तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जारी है लेकिन अब विधानसभा चुनाव को बचे डेढ़ साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान की राजनीति पिच पर खुलकर बैटिंग करेंगे ।

सगंठन की मजबूती

यह सर्वविदित है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष था पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच और दोनों ही नेताओं के समर्थकों के बीच चल रही खींचतान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वर्चस्व की लड़ाई जग जाहिर है पायलट पर पार्टी से बगावत कर सरकार गिराने तक के आरोप भी लगे हैं और यही कारण है कि किसी पार्टी एड़ी की हड्डी माने जाने वाले संगठन में मंडल और ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक शिथिलता है ।

गहलोत की राजनीतिक परिपक्वता और…

इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस का बहुमत नहीं होने से निर्दलीयों विधायको और बसपा के विधायकों के सहारे सत्ता में काबिज होने के बाद साढे 3 साल से लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन यह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की काबिलियत दूरदर्शिता और राजनीतिक परिपक्वता ही है कि वह इन विकट परिस्थितियों में भी सरकार को बनाए हुए हैं और सरकार बनाए हुए रखने के साथ ही प्रदेश की जनता के लिए कई लाभकारी योजनाओं को लागू कर क्रियान्वित तक भी किया है।

गहलोत चुप रहे क्योंकी..

मुख्यमंत्री गहलोत ने सरकार को बनाए रखने के लिए कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने वाले निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया है । लेकिन इसके बाद भी मंत्रियों और विधायकों के बड़बोले पन व्यंग बाण तथा कार्यप्रणाली से गहलोत संतुष्ट नहीं है और राज्यसभा चुनाव राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर पार्टी की प्रगति परफॉर्मेंस को लेकर और बगावत ना हो इसलिए वह अब तक सब कुछ सहते रहे हैं लेकिन अब राज्यसभा चुनाव और राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हो चुके हैं राज्यसभा चुनाव मैं गहलोत ने अपनी रणनीति से कांग्रेस के तीनों ही प्रत्याशियों को विजय दिलवाई है लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में अपनी रणनीति के बाद भी दो विधायक क्रॉस वोटिंग कर एनडीए प्रत्याशी द्रोपति मुर्मू को मत दे गए हालांकि एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का जितना तो था । 

अब खुलेंगे जमकर..

अब यह दोनों ही चुनाव राज्यसभा और राष्ट्रपति के संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब अपने आप को खुला हुआ और दबाव रहित महसूस कर रहे हैं और अब वह डेढ़ साल तक राजस्थान के राजनीतिक पिच पर खुलकर बैटिंग करेंगे ।

खुलकर बैटिंग करने से तात्पर्य यह कि गहलोत अब जल्दी ही अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने वाले हैं इस फेरबदल में गहलोत जिन जिन मंत्रियों की शिकायतें हैं और उनके कार्य प्रणाली संतोषप्रद है उनको बिना किसी दबाव के मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाएंगे तथा ऐसे विधायकों को मौका देंगे जो संजीदगी से डेढ़ साल तक सरकार की योजनाओं को आमजन तक धरातल पर साकार करें और आम जनता की तथा साथी विधायकों और पार्टी के कार्यकर्ताओं की पीड़ा को सुनकर उनका निराकरण करें।

15 अगस्त से पहले..

इस दबाव से बाहर निकलने के बाद गहलोत 15 अगस्त से पहले पहले सभी जिला स्तर पर जिला अध्यक्ष को और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर देंगे तो इसके साथ ही प्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी बदलाव कर ऐसा चेहरा मिटायेंगे जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को लाभ तो मिले ही लेकिन इसके साथ ही वह चेहरा गहलोत के आधार पर विधानसभा चुनाव में टिकट का वितरण करेगा या वितरण में अपनी भूमिका निभाएगा ।

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