भाजपा के नेता राजस्थान में हेलो से घबरा रहे हैं या ..?

Dr. CHETAN THATHERA
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जयपुर/ राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर अब मात्र ढाई महीने से कम का समय बचा है और राजस्थान में प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ही दल पूरी तैयारी से चुनाव में जुड़ चुके हैं जहां एक और कांग्रेस वापस सत्ता वापसी कर राजस्थान में चल रही 5 साल में सरकार बदलने की परंपरा को तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री अशोक के लोग पूरी तरह से जी जान से झूठ हुए हैं और वहीं दूसरी और भाजपा कांग्रेस से सत्ता हथियाना के लिए आतुर है।

लेकिन इस बार गहलोत की रणनीति के कारण भाजपा के आलाकमान नेता राजस्थान में सत्ता में वापसी आसान नहीं मान रहे हैं और इसे यूं कहीं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि गहलोत की रणनीति और घोषणाओं के कारण भाजपा घबरा रही है ? या फिर… 

भाजपा के केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के नेताओं ने अब तक कई बार सर्वे करा लिया है लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रदेश में पिछले माह लगाए गए राहत शिविर महिलाओं को स्मार्टफोन राशन कार्ड वितरण सहित लगातार एक के बाद एक हर वर्ग के लिए राहत भरी घोषणाएं करते हुए।

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उनको क्रियान्वित करने में लगे हुए हैं और इसी कारण से पिछले 3 माह में कांग्रेस में आंतरिक कलह होने के बावजूद भी राजस्थान की जनता में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की जनता और मतदाताओं में मुख्यमंत्री गहलोत और कांग्रेस सरकार ने अपनी पकड़ बना ली है और इसका अंदाजा वह आकलन तथा रिपोर्ट भाजपा के नेताओं को भी आंतरिक रूप से मिल चुकी है और यही वजह है कि भाजपा का केंद्र नेतृत्व अब राजस्थान के चुनाव को जो पहले आसान समझ रहा था यहां आवश्यकता में वापसी और जीत भाजपा को आसान नहीं लग रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए।

केंद्र नेतृत्व में राजस्थान में अब सीट टू सीट( हर विधानसभा क्षेत्र) और मेन टू मेन( हर प्रत्याशी व संभावित प्रत्याशी तथा कार्यकर्ता) की पकड़ को और वास्तविक स्थिति को खंगाल ने का निर्णय लेते हुए इसकी जिम्मेदारी के लिए भाजपा शासित पांच राज्यों के विधायकों को इसकी कमान सौपी है।

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी भाजपा शासित अन्य राज्य गुजरात हरियाणा उत्तर प्रदेश हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के विधायकों को दी गई है इसके तहत एक विधायक को एक विधानसभा सीट की जिम्मेदारी सौंप गई है इस सीट पर यह विधायक 7 दिन तक उसे विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाएंगे और वहां रहकर पूरी वास्तविक स्थिति को एकत्र कर इस 7 दिन में फीडबैक लेकर केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे

सूत्रों के अनुसार इन विधायकों की फीडबैक रिपोर्ट विधानसभा चुनाव में टिकट देने और टिकट काटने में मायने रखेगी अन्य भाजपा शासित प्रदेशों से लगाए गए विधायकों की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रहेगी कौन सा विधायक किस विधानसभा सीट अर्थात किस विधानसभा क्षेत्र में जाएगा यह किसी को पता नहीं होगा केवल चुनिंदा नेताओं को छोड़कर।

सूत्रों के अनुसार जी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस व अन्य दलों का अभी वर्तमान में कब्जा है उनके लिए भाजपा अलग से रणनीति पर काम करेंगे आंद्रेस के कब्जे वाली विधानसभा सीटों पर भेजे जाने वाले विधायकों को अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि जीत के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए तथा मौजूदा विधायक ताकतवर कमजोरियां क्या है ।

उनकी रिपोर्ट में यह भी शामिल हुआ कि कौनसी मुद्दों को उठाया जाए जिससे भाजपा यह विधानसभा सीट जीत सके और कांग्रेसी अन्य दलों से आए नेताओं की क्षेत्र में क्या स्थिति है इस पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है और उन सीटों पर जहां उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था उस पर भी फोकस रहेगा ।

भाजपा कांग्रेश के मुकाबले चुनाव में टिकट बदलने में हमेशा आगे रहती है और इस बार भी भाजपा राजस्थान में होने वाले चुनाव में बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों के टिकट ओं में बदलाव कर सकती है और उनके टिकट काटे भी जा सकते हैं सर्वे में जिन विधायकों की रिपोर्ट कार्ड खराब है उन सीटों पर भी बाहर से आने वाले विधायक को द्वारा रिपोर्ट तैयार कर भाजपा प्रदेश के शीर्ष नेताओं को दी जाएगी।

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चेतन ठठेरा ,94141-11350 पत्रकारिता- सन 1989 से दैनिक नवज्योति - 17 साल तक ब्यूरो चीफ ( भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़) , ई टी राजस्थान, मेवाड टाइम्स ( सम्पादक),, बाजार टाइम्स ( ब्यूरो चीफ), प्रवासी संदेश मुबंई( ब्यूरी चीफ भीलवाड़ा),चीफ एटिडर, नामदेव डाॅट काम एवं कई मैग्जीन तथा प समाचार पत्रो मे खबरे प्रकाशित होती है .चेतन ठठेरा,सी ई ओ, दैनिक रिपोर्टर्स.कॉम