भारत के 99 प्रतिशत किसान मोदी सरकार के समर्थन में, बहकावे में लोग कर रहे विरोध: अरुण सिंह

Jaipur News। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राजस्थान प्रभारी अरुण सिंह ने केन्द्रीय कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के आस-पास विरोध में जुटे किसानों के आंदोलन को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के आस-पास जो लोग किसानों के नाम पर आंदोलन कर रहे हैं, वे कम्युनिस्ट, कांग्रेस और अलगाववादियों के बहकावे में आ गए हैं। देश के 99 प्रतिशत किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों और उनके बनाए कृषि कानूनों के समर्थन में हैं।

राष्ट्रीय महामंत्री और राजस्थान प्रभारी अरुण सिंह दो दिवसीय राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को जयपुर में भाजपा मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के आस-पास जो आंदोलन कर रहे हैं, हमें विश्वास है कि हम उन्हें भी जल्द मना लेंगे। सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा किसान को ठगा है। किसान आंदोलन को हवा देने में कांग्रेस का भी बड़ा हाथ है। जबकि, इससे पहले खुद कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि कृषि बाजार को खोलना चाहिए। कांग्रेस के घोषणा पत्र में भी इसका उल्लेख है। उन्होंने एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी प्रमुख हनुमान बेनीवाल की नाराजगी पर कहा कि उनके मन में जो भी कन्फ्यूजन है, उसे हम बैठकर दूर कर देंगे।

राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की हितैषी रही है। यही कारण है कि यूपीए सरकार के समय जितनी फसलों की खरीद सरकार ने की थी, उससे 6 गुना ज्यादा हमने अपने पिछले 6 साल के कार्यकाल में की हैं। एमएसपी को लेकर किसानों को भड़काने वाले ये भूल रहे हैं कि गेहूं, चने की दरें भी हमारी सरकार ने सबसे अधिक बढ़ाई हैं। मोदी सरकार ही है जिन्होंने स्वामी नाथन रिपोर्ट को लागू किया और एमएसपी को कृषि लागत का डेढ़ गुना तक लेकर आए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत देश में पहली बार 33 प्रतिशत फसलों के खराब होने पर भी मुआवजा दिया गया। इन्हीं सब का परिणाम है कि राजस्थान में हमें जिला परिषद के चुनावों में 21 में से 14 में जीत मिली है।

सिंह ने राजस्थान की गहलोत सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों में डर का माहौल है। करौली में पंडित को जिंदा जला दिया, अलवर में एक सेल्समैन को डीपफ्रीज में जला दिया, सीकर में शादी के बाद घर लौट रहे दूल्हा-दुल्हन पर फायरिंग की घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रदेश की कानून व्यवस्था गर्त में जा रही है।