राजस्थान में बजरी खनन पर लगी रोक हटी, जनता को बडी राहत

जयपुर / राजस्थान में बजरी खनन (gravel mining) पर 4 साल से लगी रोक आखिरकार हट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने सुरक्षित रखे निर्णय में एम्पावर्ड कमेटी की सभी तरह की सिफारिशों को मानते हुए वैद्य खनन गतिविधियों को मंज़ूरी दे दी। शीर्ष अदालत के इस बहुप्रतीक्षित फैसले का प्रदेशवासियों को इंतज़ार था। इस …

राजस्थान में बजरी खनन पर लगी रोक हटी, जनता को बडी राहत Read More »

November 11, 2021 12:36 pm

जयपुर / राजस्थान में बजरी खनन (gravel mining) पर 4 साल से लगी रोक आखिरकार हट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने सुरक्षित रखे निर्णय में एम्पावर्ड कमेटी की सभी तरह की सिफारिशों को मानते हुए वैद्य खनन गतिविधियों को मंज़ूरी दे दी। शीर्ष अदालत के इस बहुप्रतीक्षित फैसले का प्रदेशवासियों को इंतज़ार था।

इस फैसले से प्रदेश की 82 बड़ी बजरी लीज़ को फिर से शुरू किए जाने से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ये महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस फैसले से प्रदेश की आम जनता को बडी राहत मिलेगी ।

बजरी खनन पर से रोक हटाने के बाद अब करीब चार साल के बाद बजरी खनन की गतिविधियां फिर से शुरू हो सकेंगी।

विदित है कि सुप्रीम कोर्ट में दीपावली पूर्व 26 अक्टूबर को बजरी खनन मामले पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के समक्ष ये मामला फैसले के लिए सूचीबद्ध रहा।

बजरी खनन पर ‘सुप्रीम’ रोक लगाए जाने के बाद बजरी वेलफेयर ऑपरेटर सोसाइटी के प्रदेशाध्यक्ष नवीन शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए राहत की गुहार लगाई थी। वहीं राज्य सरकार ने भी अपना पक्ष रखा था। सरकार ने अदालत से खनन पर रोक हटाने की गुहार लगाते हुए वैध बजरी खनन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी। सरकार ने खनन गतिविधियों पर रोक से प्रदेश की जनता को महंगी बजरी मिलने और राजस्व में भी हानि होने की दलीलें दी थी। विभिन्न पहलुओं के आधार पर सरकार ने बजरी खनन पर रोक हटने के फायदे शीर्ष अदालत को गिनाये थे। वहीं बजरी लीज़ खातेदारों की ओर से भी भविष्य में वैध खनन किए जाने को लेकर सहमती जताई गई थी।

 

इस मामले में चली सुनवाई और विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक एम्पावर्ड कमेटी के गठन के आदेश दिए थे। जानकारी में सामने आया कि इस एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी एक ‘सकारात्मक’ अध्ययन रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि सुप्रीम कोर्ट अपने संभावित फैसले में नवंबर 2017 से बजरी खनन पर लगी रोक को हटा सकता है।

Prev Post

सात हजार स्कूलों में अनिवार्य विषयों के व्याख्याता नहीं के

Next Post

The Top Crime drama Best Netflix Series

Related Post

Latest News

नीति आयोग की बैठक में सीएम गहलोत ने उठाई ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग
किशोरी सशक्तिकरण हेतु, टोंक जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल की नई पहल: कॅरियर गाइडेंस कम मोटिवेशन सेशन एवं स्कॉलरशिप जागरूकता कार्यक्रम आज
बीजेपी के मास्टर स्ट्रोक से कांग्रेस खेमें खलबली, जगदीप धनकड़ के जरिए जाट वोट बैंक में सेंधमारी!

Trending News

डिजिटल की दुनिया में टोंक व सवाई माधोपुर क्षेत्र के 53 दूरस्थ व वंचित गांवों में मिलेगी 4जी कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाएं: - सांसद जौनापुरिया
पनवाड़ सागर की भराव क्षमता बढ़ाने की मांग को लेकर कलेक्टर को दिया ज्ञापन
टोंक पिंजारा नमदगरान समाज की सामूहिक गोठ का आयोजन
समाजसेवी हाजी सलीम उद्दीन मेंबर साहब को पेश की खिराजे अकीदत

Top News

नीति आयोग की बैठक में सीएम गहलोत ने उठाई ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग
डिजिटल की दुनिया में टोंक व सवाई माधोपुर क्षेत्र के 53 दूरस्थ व वंचित गांवों में मिलेगी 4जी कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाएं: - सांसद जौनापुरिया
भाजपा युवा मोर्चा टोंक तिरंगा रैली के लिए बैठक आयोजित
किशोरी सशक्तिकरण हेतु, टोंक जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल की नई पहल: कॅरियर गाइडेंस कम मोटिवेशन सेशन एवं स्कॉलरशिप जागरूकता कार्यक्रम आज
देवली : खंडहर खुला कुंआ बना हादसे का सबब,कुंए में गिरी गाय को मशक्कत से निकाला बाहर
टोंक नेहरू युवा केंद्र ने किया युवा मंडल कार्यक्रम अभियान की शुरुआत
विश्व स्तनपान सप्ताह 2022 मनाया गया
जन-समस्याओं का निदान त्वरित गति से हो-ओमप्रकाश गुप्ता
बीजेपी के मास्टर स्ट्रोक से कांग्रेस खेमें खलबली, जगदीप धनकड़ के जरिए जाट वोट बैंक में सेंधमारी!
ओबीसी आरक्षण पर अपनी ही सरकार से आर-पार के मूड में विधायक, हरीश चौधरी के बाद मदन प्रजापत ने भी खोला मोर्चा