आख़िर क्यों मुख्यमंत्री गहलोत फोन टेंपिग मामले में फेसबुक पर सफाई दे रहे है

जयपुर । राजस्थान में फोन टेपिंग के सवाल पर राज्य सरकार की स्वीकारोक्ति के बीच मंगलवार को राज्य विधानसभा में भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री गहलोत ने फेसबुक पर एक पोस्ट के माध्यम से 14 अगस्त 2020 को विधानसभा में अपने संबोधन तथा 17 व 20 जुलाई 2020 को विभिन्न चैनलों के पत्रकारों से बातचीत का ब्यौरा देकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे 14 अगस्त 2020 को ही विधानसभा में अपनी पूरी बात रख चुके हैं। भाजपा अपने आपसी झगड़े और वर्चस्व की लड़ाई में बेवजह इस मुद्दे पर विधानसभा में गतिरोध पैदा कर रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की फ़ेसबुक पोस्ट

 

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मुख्यमंत्री ने भाजपा निशाना साधते हुए अपनी पोस्ट में 15वीं विधानसभा के पंचम सत्र के पहले दिन के संबोधन का जिक्र करते हुए लिखा “14 अगस्त 2020 को उन्होंने कहा था कि देश के अंदर हर पॉलिटिकल पार्टी में कई बार डिस्टेंस हो जाते हैं, पर जिस खूबसूरती के साथ में उसका समापन हुआ, उसका सबसे ज्यादा धक्का अमित शाह जी को लगा। उससे आप (भाजपा) बौखलाए हुए हो, आज बौखलाहट आपकी नजर आ रही थी। आप ऐसे बंदे थे और हो सकता है सही भी हो कि आपके अध्यक्ष महोदय आपकी पार्टी के और उप नेता प्रतिपक्ष जान-बूझकर गए या अनजाने में गए, पता नहीं। परंतु या तो दोनों ने मिलकर आपसे बातें छिपाई हैं या केंद्र सरकार के जो बड़े-बड़े नेता इस षड्यंत्र में शामिल थे, उन्होंने आपको इन्वॉल्व नहीं किया, इन दोनों को इन्वॉल्व किया है। इसलिए आप हो सकता है कि इनोसेंटली बोल रहे हो, इसलिए मैं आपको क्या कहूं, क्योंकि आप नेता प्रतिपक्ष हो और आपकी यहां कैसी चल रही है मालूम है। किन-किनको इन्वॉल्व करना है, कौन केंद्रीय मंत्री इन्वॉल्व थे (गजेन्द्र सिंह शेखावत) आपको मालूम भी है। उनका नाम तो ऑडियो टेप में आ ही गया और टेप कैसे हो गई। अरे आप तो गृह मंत्री रहे हैं, मुझसे पूछ रहे हो? लीगल होता है, इललीगल होता है, वो आप मुझसे पूछ रहे हो? राजस्थान में कभी परंपरा रही नहीं है इललीगल विधायकों के, एमपी के टेप करने की और न यहां हुआ है, ये मैं कह सकता हूं।

उन्होंने लिखा कि 17 जुलाई एवं 20 जुलाई 2020 को विभिन्न चैनलों से बातचीत में भी वे फोन टेपिंग के मुद्दे पर अपनी बात कह चुके हैं। इन चैनलों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि सबको मालूम है कि किसकी आवाज है (गजेन्द्र सिंह शेखावत की)। जनता इतनी मूर्ख नहीं है कि उनको सफाई देनी पड़ रही है कि आवाज गंगानगर की है कि धौलपुर की है कि जयपुर की है कि जोधपुर की है। सबको मालूम है और राजस्थान में परंपरा कभी रही नहीं है इललीगल टैप करने की, इललीगल सर्विलांस करने की परंपरा नहीं रही है। इसलिए इनके तर्क जो हैं उनके कोई मायने नहीं हैं। चीफ सैक्रेटरी हों, चाहे होम सैक्रेटरी हों, उनको नौकरी करनी होती है, वो इललीगल काम कभी नहीं कर सकते हैं। जो कुछ भी यहां पर सर्विलांस होती है, जिन लोगों के लिए होनी चाहिए तो वो कायदे से होती है। ये कहना कि मुख्यमंत्री हमारे फोन टेप करवा रहा है, अरे मैं स्वयं जब आरोप लगाता हूं केंद्र सरकार पर कि आज पूरा देश डरा हुआ है, टेलीफोन पर बात करते हुए डरता है कि भई व्हाट्सएप पर बात करो, कहीं बात हमारी टेप हो रही होगी? पूरे देश के इंडस्ट्रियलिस्ट्स हों, व्यापारी हों, पॉलिटिशियन हों, डरे हुए हों और मेरा आरोप केंद्र सरकार पर ये होता है कि ये माहौल बन गया है पूरे देश के अंदर, वो व्यक्ति कैसे इललीगल सर्विलांस करवा सकता है बताइए आप? कुछ लोगों ने मुझे कहा था कि आपके घर पर टेप बन गई, आपके ऑफिस में टेप बन गई, उन्होंने रिलीज़ की है, तब मैंने कहा कि मैं राजनीति छोड़ दूंगा अगर प्रूव कर दें।

मुख्यमंत्री ने लिखा कि कभी अगर उनको लगता है कि हमने षड्यंत्र करके टेप फर्जी टेप बनाई है, उसको डॉक्टर्ड टेप कह दीजिए। अगर ये आरोप वो लगाते हैं तो मैं राजनीति से इस्तीफा दे सकता हूं, राजनीति छोड़ सकता हूं मैं। मुझे क्या अधिकार है कि अगर मैं झूठी टेप बनवाऊं लोगों की अपने हित के अंदर, सरकार बचाने के लिए, तो मेरा मॉरल अधिकार है क्या कि मैं सरकार में बना रहूं?