Diwali festival
टोंक राजस्थान

दीपावली पर्व पर 25 अक्टूबर को सुबह 4.15 बजे लगेगा सूतक

टोंक। इस बार दीपावली पर्व पर अल सुबह 4.15 मिनट पर 25 अक्टूबर को सूर्यग्रहण का सूतक लगेगा, जिस कारण 24 अक्टूबर को अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त से पूर्व ही महालक्ष्मी का पाटा सरकाना होगा। अन्यथा देवी के भक्तों की छोटी से भूल के कारण, चंचल लक्ष्मी को भक्तों के घर में 72 घंटे कैद रहना होगा, शास्त्रोक्त सूतक लगने के 12 घंटे पहले ही लक्ष्मी जी की आराधना पूर्ण करनी होगी, अन्यथा, तीन दिन तक महा लक्ष्मी जी को पाटे पर ही विराजित रहना होगा।

इस बार सूर्य ग्रहण दीपावली के दूसरे दिन 25 अक्टूबर को पड़ेगा। कार्तिक मास की अमावस्या का पडऩे वाला खंडग्रास सूर्य ग्रहण लगभग पूरे भारत में दिखाई देगा। अमावस्या के दिन लगने वाले इस सूर्य ग्रहण में लोकाचार और सूतक काल का मान होगा। 25 अक्टूबर को शाम 4.42 बजे से लगने वाले ग्रहण का मध्य काल शाम 5.14 बजे और मोक्ष काल शाम 5.22 बजे होगा। ऐसे में सूतक 25 अक्टूबर की सुबह 4.15 बजे लग जाएगा।सूतक काल ग्रहण लगने से आठ घंटे पहले से शुरू हो जाएगा।

शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। मोक्ष काल के बाद शुद्धीकरण के साथ मंदिरोंं के कपाट खुलेंगे और घरों में मां लक्ष्मी का पूजन होगा। यह भारत समेत एशिया, अफ्रीका व यूरोप समेत कई देशों में दिखेगा। इसके लिए जो भी धार्मिक मान्यताएं हैं, उनका पालन करना चाहिए। सूर्य ग्रहण पर सूतक लगने के बाद कुछ भी खाना, पीना, पढऩाए पढ़ाना एवं सोना आदि वर्जित है।

घर के मंदिर का पट न खोलें। पका भोजन रखा हो तो उसे ग्रहण के बाद ना खाएं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को ध्यान रखना होता है कि उन्हें न तो सोना चाहिए न ही किसी वस्तु को काटना या सिलना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।

अमावस्या तिथि आरंभ 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 25 अक्टूबर शाम 4 बजकर 18 मिनट तक। दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर सोमवार को मनाया जाएगा। क्योंकि 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। पंचांग भेद से 25 अक्टूबर को भी अमावस्या रहेगी।

मुख्य रूप से यूरोप, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। इसके अलावा भारत में सूर्य ग्रहण नई दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता सहित कुछ जगहों पर दिखाई दे सकता है। सूर्य ग्रहण भौगोलिक घटना है जिसे कई बार आंखों से नहीं देखा जाता। दरअसल सूर्य के चारों को पृथ्वी समेत कई ग्रह परिक्रमा करते रहते हैंण् पृथ्वी का उपग्रह चन्द्रमा है और वह पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा करता रहता हैण् लेकिन कई बार ऐसी स्थिति हो जाती है कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक सीधे नहीं पहुंच पाता क्योंकि चन्द्रमा बीच में आ जाता हैण् इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

डॉ. पं. पवन सागर ने बताया की ग्रहण लगने से पहले के समय को अशुभ माना जाता है और इसे ही सूतक काल कहते हैं। सूतक काल में कोई भी मांगलिक काम नहीं होते और ना ही किसी व्यक्ति को इस समय में नए काम शुरू करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिकए सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और वह ग्रहण खत्म होने के बाद ही खत्म होता है। बताया जाता है कि अगर कहीं ग्रहण दिखाई नहीं देता तो वहां सूतक नहीं माना जाता। इस बार भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है तो सूतक मान्य होगा।

आंशिक सूर्य ग्रहण का सूतक 03.17 बजे पर शुरू होगा और 05.43 बजेपर खत्म होगा, लेकिन अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन रहेगी। ऐसे में दिवाली 24 तारीख की रात को मनाई जाएगी और सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर की शाम को लगेगा। त्योहारों के सीजन में पडऩे वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण वृषभ राशि के जातकों के लिए बिल्कुल अच्छे नहीं माने जा रहे हैं।

सूर्य और चंद्र ग्रहण के बीच वृषभ राशि के जातकों को संभलकर रहने की सलाह दी जाती है। सेहत के मामले में लापरवाही ना बरतें। दोनों ग्रहण की अवधि के बीच किसी नए काम की शुरुआत ना करें, लेकिन अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन रहेगी। ऐसे में दिवाली 24 तारीख की रात को मनाई जाएगी और सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर की शाम को लगेगा। फिर कुछ दिन बाद 8 नवंबर को देव दिवाली के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। इस बार पांच के बजाय छह दिन का दीपोत्सव होगा। 27 साल बाद दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर सूर्यग्रहण का साया रहेगा। इस वर्ष के आखिरी सूर्य ग्रहण के कारण इस बार पांच दिवसीय दीपोत्सव छह दिवसीय होगा।

हालांकि चर्तुदशी युक्त अमावस्या में दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण के चलते दीपावली के अगले दिन होने वाले भैया दूजए अन्नकूट महोत्सव और गोवर्धन पूजा अब 1 दिन देरी से होंगे। अत 25 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के दिन खंडग्रास सूर्यग्रहण रहेगा। भारत में ग्रहण की शुरूआत शाम 4.15 से 5.30 के मध्य होगी।

डॉ. पं. पवन सागर के अनुसार दिवाली पूजा पर इस ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा। ऐसा संयोग 27 साल बाद बना है। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को सुबह 4.15 बजे से सूतक लग जाएगा। ऐसे में सूर्य ग्रहण का प्रभाव होने से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट अगले दिन यानी की बुधवार को मनाया जाएगा। वहीं जयपुर में शाम 4.32 बजे सूर्यग्रहण प्रारंभ होगा, जो शाम 5.50 बजे सूर्यास्त पर समाप्त होगा। यानि 52 प्रतिशत सूर्यग्रहण होने से शाम 5.33 बजे आधा बिंब 50 प्रतिशत ही चमकीला दिखेगा।

वहीं सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में शाम 4.15 बजे यह ग्रहण दिखेगा, लेकिन अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन रहेगी। ऐसे में दिवाली 24 तारीख की रात को मनाई जाएगी और सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर की शाम को लगेगा। फिर कुछ दिन बाद 8 नवंबर को देव दिवाली के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा।

Dr. CHETAN THATHERA
चेतन ठठेरा ,94141-11350 पत्रकारिता- सन 1989 से दैनिक नवज्योति - 17 साल तक ब्यूरो चीफ ( भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़) , ई टी राजस्थान, मेवाड टाइम्स ( सम्पादक),, बाजार टाइम्स ( ब्यूरो चीफ), प्रवासी संदेश मुबंई( ब्यूरी चीफ भीलवाड़ा),चीफ एटिडर, नामदेव डाॅट काम एवं कई मैग्जीन तथा प समाचार पत्रो मे खबरे प्रकाशित होती है .चेतन ठठेरा,सी ई ओ, दैनिक रिपोर्टर्स.कॉम