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कांग्रेस संगठन चुनावः संजय निरुपम की दूसरी डेडलाइन भी बीती, नहीं हुई ब्लॉक अध्यक्षों की घोषणा 

जयपुर। प्रदेश कांग्रेस में संगठन चुनाव के मद्देनजर पिछले कई माह से चल रही कवायद तेज होने की बजाए सुस्त चाल से चल रही है। आलम यह है कि संगठन चुनाव के लिए प्रदेश प्रभारी लगाए गए संजय निरुपम और प्रदेश नेतृत्व के ढुलमुल रवैया के चलते कांग्रेस कांग्रेस के संगठन चुनाव का कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहा है।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश संगठन चुनाव प्रभारी संजय निरुपम की ओर से ब्लॉक अध्यक्षों के चुनाव को लेकर दी गई डेडलाइन दूसरी बार भी बीत गई है लेकिन अभी तक ब्लॉक अध्यक्ष और उससे निचले स्तर पर संगठन के चुनाव ही नहीं कराए गए हैं, जिससे अब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से संगठन चुनाव को लेकर जारी किए गए शेड्यूल के मुताबिक प्रदेश में ब्लॉक, जिला और स्टेट लेवल पर चुनाव कार्यक्रम में देरी होना तय है।

दो बार बीती है डेडलाइन 

प्रदेश में 400 ब्लॉक अध्यक्ष और उसके निचले स्तर पर संगठन चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की डेडलाइन प्रदेश संगठन चुनाव प्रभारी संजय निरुपम ने पहले 31 मई तक दी थी और उसके बाद 15 जून तक सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्ष और निचले स्तर पर संगठन चुनाव संपन्न कराने की घोषणा की थी, लेकिन दोनों ही डेडलाइन अब बीत चुकी है लेकिन अभी तक निचले स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक संगठन चुनाव के नहीं कराए गए। हालांकि इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि पहले राज्यसभा चुनाव के चलते संगठन चुनाव की कवायद गति नहीं पकड़ पाई थी तो वहीं अब ईडी की कार्रवाई के चलते संगठन चुनाव की कवायद गति नहीं पकड़ पा रही है।

हालांकि कांग्रेस गलियारों में तमाम नेता इस तर्क से संतुष्ट नहीं है।

बीआरओ सौंप चुके हैं रिपोर्ट इधर संगठन में निचले और ब्लॉक स्तर पर चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रदेश के 400 ब्लॉक में बीआरओ बनाए गए पर्यवेक्षकों ने अपनी अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व और प्रदेश संगठन चुनाव प्रभारी संजय निरुपम को सौंप दी है। लेकिन बावजूद इसके बीआरओ की रिपोर्ट पर अभी तक कोई कवायद शुरू नहीं की गई है।

संगठन चुनाव में लेटलतीफी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष 

संगठन चुनाव में लगातार हो रही लेटलतीफी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेताओं में रोष व्याप्त है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में सवा साल के बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं और अभी तक ब्लॉक और निचले लेवल पर चुनाव तो संपन्न नहीं हुए हैं जबकि विधानसभा चुनाव में बूथ लेवल, वार्ड और ब्लॉक लेवल संगठन को सबसे मजबूत इकाई माना जाता है। ऐसे में चुनाव देरी होने से कांग्रेस पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पिछले डेढ़ से भंग हैं ब्लॉक संगठन 

दरअसल प्रदेश में जुलाई 2020 में सचिन पायलट कैंप की ओर से बगावत करने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उस समय प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाध्यक्षों व ब्लॉक अध्यक्षों को भंग कर दिया था। हालांकि उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने प्रदेश की नई टीम बनाई थी और 13 जिलाध्यक्षों की भी घोषणा करवा दी थी लेकिन प्रदेश में 400 ब्लॉक अध्यक्ष और शेष बचे जिलाध्यक्षों की घोषणा नहीं हो पाई थी जिसे बाद में संगठन चुनाव के जरिए भरने की बात कही गई थी। 

ब्लॉक के बाद इन पदों पर भी होंगे संगठन चुनाव 

वहीं ब्लॉक अध्यक्षों के बाद जिलाध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी, पीसीसी मेंबर, डीसीसी मेंबर, एआईसीसी मेंबर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का भी चुनाव होगा और सबसे अंत में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी संगठन चुनाव के जरिए होगा।

Sameer Ur Rehman
Editor - Dainik Reporters http://www.dainikreporters.com/