मेवाड़ी और राजस्थानी भाषा ज्ञाता व आजादी काल के पत्रकार डॉ.पथिक का निधन

Mewari and Rajasthani language scholar and independence era journalist Dr. Pathik passed away

कपासन/ मेवाड़ी और राजस्थानी भाषा के शेर तथा मेवाड़ इतिहास के बड़े जानकार, साहित्यकार और आजादी के आंदोलन से ही पत्रकारिता से जुड़े प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ केशव पथिक(91) का आज निधन हो गया उनके निधन से मेवाड़ क्षेत्र तथा का रामस्नेही संप्रदाय में शोक की लहर छा गई।

डॉ. पथिक मेवाड़ी इतिहास के बड़े जानकर थे। इसके लिए उन्हें मेवाड़ के इतिहास की लाइब्रेरी भी कहा जाता था। वो मेवाड़ी और राजस्थानी भाषा के कवि भी थे। वो गद्य पद्य में लिखते थे। उनकी रचनाएं संग्रह कुंपल, लाडालुम, मंगल गीत आदि में संग्रहित हैं। उन्होंने बागोराफुल, हेला, अंतर्राष्ट्रीय राम स्नेही संप्रदाय के समाचार पत्र भास्कर मासिक आदि के संपादक रहे। छात्र जीवन से ही लेखन शुरू किया था।

वो राजस्थानी भाषा और संस्कृति विश्व विद्यालय जालोर द्वारा डॉक्टर उपाधि मिली हुई थी। वो महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन, राजस्थानी भाषा और संस्कृति अकादमी बीकानेर आदि से सम्मानित हो चुके थे। निर्माण सोसायटी बेंगलूर कर्नाटक द्वारा मेवाड़ गौरव सम्मान, दैनिक नवज्योति द्वारा कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी पत्रकार सम्मान से भी सम्मानित हुए थे। छात्त्रावस्था में मेवाड़ प्रजामंडल से भी जुड़े रहे। वो एक शिक्षक भी रहे, उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था।

डाॅ. पथिक अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा द्वारा प्रकाशित रामस्नेही भास्कर पत्रिका के वे संपादक बीते इसके अलावा राष्ट्रपति एक राज्यस्तरीय समाचार पत्र सहित कई मासिक त्रैमासिक पत्रिकाओं में अंतिम समय तक अपनी लेखनी से लेख लिखते थे।