भूमि अधिग्रहण कानून का राज्य सरकार लागू न करके किसानों का हो रहा है शोषण – डॉ. किरोड़ी लाल

Dr.Kirodi Lal Meena

Jaipur news / Dainik reporter – राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (Rajya Sabha MP Dr. Kirori Lal Meena)ने संसद के शून्यकाल में किसानों के हित में उनकी भूमि के उचित मुआवजे की मांग उठाई। उन्होंने कहा दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस हाइवे 148एन (Delhi-Mumbai Express Highway 148 N) तथा अमृतसर-जामनगर हाइवे 754के (Amritsar-Jamnagar Highway 754K) के लिए भूमि अवाप्ति (Land reclamation)की जा रही है। इसमें केन्द्र के अधिनियम के हिसाब से किसानों को चार गुना मुआवजा (Four times compensation) मिलना चाहिए। इसके लिए किसान राजस्थान में आंदोलित (Farmers agitated in Rajasthan) हैं और किसान की माँग के अनुसार मुआवजे का निर्धारण नहीं किया जा रहा है।

भूसंसाधन विभाग द्वारा 8 मई, 2017 को जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार अगर किसी परियोजना में एक से अधिक राज्यों की भूमि का उपयोग किया जाता है, तो केन्द्र द्वारा लागू अधिनियम के तहत किसानों की अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा दिया जाना चाहिए। अगर किसी परियोजना में एक ही राज्य सम्मिलित होता है, तो राज्य के नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने दो एक्सप्रेस हाइवे के बारे में बताया ये भारत माला परियोजना के तहत राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र की सीमाओं में होकर निकल रहे हैं। क्योंकि केन्द्र सरकार ने 8 मई 2017 को ऐसी गाइडलाइन जारी की थी, अतः भूमि अधिग्रहण मुआवजा के संबंध में कई राज्यों ने 2017 में केन्द्र से स्पष्टीकरण माँगा था कि राज्य किस आधार पर केन्द्र तथा राज्य की परियोजनाओं के लिए मुआवजे का निर्धारण करे।

इस संदर्भ में 8 मई, 2017 को केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूसंसाधन विभाग (Union Ministry of Rural Development and Department of Resources) ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को एक गाइडलाइन भेजी थी, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख किया था कि अगर भू-अधिग्रहण किसी एक राज्य के लिए किया जा रहा है, तो भूमि का मुआवजा संबंधित राज्य द्वारा निर्धारित नियमों के मुताबिक दिया जाएगा, किन्तु कोई हाइवे एक से अधिक राज्यों से होकर निकल रहा है, तो उसका अधिग्रहण केन्द्र के अधिनियम के हिसाब से होगा।

यानी भूमि अधिग्रहण कानून 2013/15 के अनुसार शहरी क्षेत्र में डीएलसी (DLC) का दो गुना एवं ग्रामीण क्षेत्र में डीएलसी का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ राज्य की परियोजना व केन्द्र की परियोजना के हिसाब से अलग-अलग मुआवजा दिया जा रहा है। बाकी किसी राज्य में यह निर्धारण नहीं हुआ है। भारत माला परियोजना में राजस्थान की पूर्ववर्ती सरकार ने 14 जून, 2016 को एक ऐसा आदेश निकाला था, जिसके अनुसार केन्द्र का भूमि अधिग्रहण कानून निष्प्रभावी हो गया।

राजस्थान में किलोमीटर 0 से किलोमीटर 30 तक नगरीय सीमा के अन्तर्गत दो गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया, जिसके कारण केन्द्रीय कानून का उल्लंघन हो रहा है। भूमि अधिग्रहण कानून की पालना हो, शहरी क्षेत्र में डीएलसी का दो गुना मिले और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मिले, इस दृष्टि से मैं केन्द्र सरकार से माँग करता हूँ कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राजस्थान सहित अन्य राज्यों के किसानों को मुआवजा दिया जाए।

 

 

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Firoz Usmani Tonk : परिचय- पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षो से संवाददाता के रूप में कार्यरत हुंॅ, 9 साल से राजस्थान पत्रिका ग्रुप के सांयकालीन संस्करण (न्यूज़ टुडे) में जिला संवाददाता के रूप से कार्य कर रहा हंू। राजस्थान पत्रिका न्यूज़ चैनल में भी अपनी सेवाएं देता रहा हूं। एवन न्यूज चैनल में भी संवाददाता के रूप में कार्य किया है। अपने पिता स्व. श्री मुश्ताक उस्मानी के सानिध्य में पत्रकारिता की क्षीणता के गुण सीखें। मेरे पिता स्व.श्री मुश्ताक उस्मानी ने भी 40 वर्षो तक पत्रकारिता के क्षैत्र में कार्य किया है। देश के कई बड़े न्यूज़ पेपर से जुड़े रहे। 10 वर्ष दैनिक भास्कर में ब्यूरों चीफ रहें।