शहनाई से पहले पीले चावल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे घराती धर्मसंकट,मेहमानों की सूची में किसको छोडे और…

Bhilwara News । आमतौर पर किसी भी जिले में कलेक्टर के कार्यालय के बाहर ज्ञापन देने वालों, प्रदर्शन करने वालों की भीड़ रहती है या फिर कोई आवेदनो को लेकर लेकिन कलेक्ट्रेट कार्यालयों में आज भीड़ तो थी लेकिन ज्ञापन-प्रदर्शन वालों की नहीं यह भीड़ उस आदमी की थी जिसे अपने घर में अगले हफ्ते में होने वाले मांगलिक आयोजन के लिए अचानक अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। जी हां, यह नजारा भीलवाड़ा जिला कलेक्ट्रेट का है जहां एसडीएम (उपखंड,) के बाहर लोग अपने-अपने परिवारों में होने जा रहे मांगलिक आयोजनों की अनुमति के लिए प्रतीक्षारत हैं। ऐसा लग रहा था कि शहनाई की गूंज से पहले घराती ‘पीले चावल’ लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे रहे है ।

विदित है कि रविवार को ही सरकार ने विवाह आयोजनों के लिए कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर नई गाइडलाइन जारी की जिसके तहत अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया। बिना अनुमति पर भी जुर्माना और 100 से ज्यादा संख्या होने पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। ऐसे में पूर्व में मिल रही छूट के अनुसार जिन लोगों ने अपने आयोजन तय कर लिए थे, उन्हें भी सोमवार को कलेक्ट्रेट की तरफ रुख करना पड़ा।

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अनुमति तो फिर भी जैसे-तैसे मिल ही जाएगी क्योंकि किसी की शादी रोकना सरकार या प्रशासन की मंशा नहीं है। बस कोरोना से आम जनता की जान बच जाए, इसलिए मेहमानों की संख्या पर कंट्रोल के मद्देनजर यह प्रावधान किए गए हैं।

लेकिन, समस्या इस बात की हो गई है कि 200 की संख्या के हिसाब से जिन लोगों को न्योता पहुंच चुका है, उनमें से किस को मना किया जाए और किसको बुलाया जाए, घरधणी के लिए यह सबसे बड़ी आफत हो गई है। धर्मसंकट यह है कि बुआ जी को बुलाओ तो मौसीजी नाराज, मौसीजी को बुलाओ तो मामीजी नाराज, मेहमानों की सूची में जोड़-बाकी का झंझट हर उस परिवार में शुरू हो गया है जहां न्योते दिए जा चुके हैं। डबोक में एक परिवार ने कार्ड बांट दिए और अब वे क्षमा याचना के साथ रिश्तेदारों को नहीं आने का आग्रह कर रहे हैं। हालांकि, जिन्होंने न्योते अब तक नहीं बांटे हैं, वे जरूर कुछ राहत में हैं, कम से कम वे इस उलाहने से तो बचेंगे कि पहले बुलाकर बाद में मना कर दिया, हम उतने सगे नहीं थे।