राजस्थान विस उपचुनाव – भाजपा की बागियों ने की हालत पतली, डैमेज कंट्रोल मे जूटे नेता, भीलवाड़ा मे अधिक खतरा

Bhilwara।राजस्थान (Rajasthan) में तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Bye election) के लिए भाजपा-कांग्रेस (BJP-Congress) के साथ रालोपा (RLP) समेत अन्य प्रत्याशियों ने नामांकन भरने की समय सीमा कल समाप्त होने के साथ स्थित साफ ह गई है की कौन-कौन मैदान मे है । उपचुनाव में इन सीटों पर भाजपा के लिए कुछ बागी परेशानी खड़ी कर रहे हैं। इनसे निपटने के लिए पार्टी ने स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी है। बागियों से निपटने के लिए भाजपा के इस एक्शन प्लान में कुछ प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई है।

 

भाजपा को सबसे ज्यादा बागियो से खतरा भीलविडा जिले की रायपुर
सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र में है जो भाजपा के लिए सबसे परेशानी ज्यादा है। पिछले दिनों भाजपा में शामिल हुए व्यवसायी लादूराम पितालिया ने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में एक बार फिर पार्टी द्वारा टिकट नही देने पर ताल ठोंक दी है। लादूराम ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है।पितलिया का मनाने के लिए भाजपा का केन्द्र तक का कुनबा लगा हुआ है लेकिन वह अडे हुए है ।

पितलिया के व्यवसाय पर कर्नाटक मे अटैक ?

सूत्रो के अनुसार पितलिया को जबरन मैदान छोडने के लिए विवश करने के लिए उनके कर्नाटक , बैगलोर मे स्थित व्यवसाय पर वहां की भाजपा सरकार से शिकंजा कसने की सूचना है ताकि पितलिया व्यवसाय पर अटैक होने पर मान जाए लेकिन पितलिया भी कमजोर नही है और उसने भी कह दिया बताते है की वहां नही कही और व्यवसाय कर लूंगा लेकिन चुनाव लडूंगा ऐसी चर्चाएं है ।इसके साथ ही यहां से आरएलपी के प्रत्याशी बद्री राम जाट ने भी भाजपा की परेशानी बढ़ा रखी है।

बद्री राम जाट भाजपा नेता और पूर्व प्रत्याशी रहे रूप लाल जाट के भाई हैं।
हालांकि रूपलाल खुद सहाड़ा से टिकट के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने यहां रतन लाल जाट पर विश्वास जताया। रूप लाल जाट ने इसका सार्वजनिक तौर पर कोई विरोध नहीं किया।

भाजपा ने न केवल सहाड़ा, बल्कि अन्य दोनों विधानसभा क्षेत्रों राजसमंद व सुजानगढ़ में भी पार्टी की विचारधारा से जुड़े बागियों को समझाने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ प्रदेश के प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी दी है, ताकि बागी अपना नामांकन वापस ले सकें। भाजपा ने इसके लिए संगठनात्मक रूप से इन क्षेत्रों में लगाए गए प्रभारी और चुनाव प्रभारियों को यह काम सौंपा है।

 

उपचुनाव के लिए 3 अप्रैल तक नाम वापसी की अंतिम तारीख है। ऐसे में भाजपा का पूरा फोकस इस दौरान चुनाव मैदान में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ डटे पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोगों के नामांकन वापस दिलवाने पर है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां पार्टी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं से अपील भी कर चुके हैं कि वे पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में वापस बैठें। पूनिया ने यह तक कहा है कि पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान का भी ध्यान रखेगी और भविष्य में उनको लेकर अन्य संभावनाओं पर विचार करेगी।

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