बजरी लीज धारक के सामने अधिकारीयों व नेताओं का सजदा, क्षेत्र में कायदे-कानून की सरेआम उड़ती धज्जियां 

जहाजपुर (आज़ाद नेब) बजरी लीज धारक द्वारा कृषि भूमि का बिना रूपांतरण किए गैर कृषि/ व्यवसायिक कार्य में उपयोग लेने, धर्म कांटों का अवैध संचालन कर सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा जा रहा है। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारी आंखें बंद कर बैठे हैं।

सार्वजनिक निर्माण विभाग व नेशनल हाईवे अथॉरिटी की बिना स्वीकृति के सड़क सीमा पर धर्म कांटे स्थापित कर अवैध रूप से काम का संचालन करने की कारगुज़ारी की जा रही है लेकिन ना ही तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने रोकने व टोकने की जहमत उठाई है ओर ना ही सार्वजनिक निर्माण विभाग के नुमाइंदों ने इसमें अपनी रूचि दिखाई है।

बनास नदी लीज धारक शेखावत एसोसिएट के पास तकरीबन चालीस से पचास कार्मिक जो जिले के बाहर के हैं, अधिकतर कर्मचारीयों के पास पहचान पत्र नहीं है।

क्षेत्र के चारों थानों में इनकी पहचान के कोई दस्तावेज का पुलिस सत्यापन नहीं करवाया गया ओर ना किसी एजेंसी के मार्फ़त इनको लाया गया है। इनके द्वारा क्षेत्र में आए दिन बजरी वाहन चालकों के साथ में लड़ाई झगड़ा मारपीट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मानों क्षेत्र में जंगलराज कायम हो। लीज धारक के कार्मिकों द्वारा लोगों से मारपीट करने से कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है बावजूद इसके कानून के कारिंदे द्वारा कार्रवाई अमल में नहीं लाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह तो अंकित करता ही है साथ ही पुलिस पर भी सवालिया निशान लगाता है।

लीज धारक द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। लीज धारक को नदी के तल से 10 फीट की गहराई तक बजरी निकालने की इजाजत है मगर खनिज विभाग द्वारा बनास नदी का तल निर्धारित नहीं किया गया है।

जिससे लीज धारक मनमानी कर अपने वाहनों के माध्यम से नदी में गहरे खड्डे खोद कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी उल्लंघन कर रहे है। लीज धारक द्वारा खनिज विभाग द्वारा जारी रवाना बजरी चालकों को तो दिया जा रही है।

मगर साथ ही अवैध रूप से शेखावत एसोसिएट की ₹500 प्रति टन बजरी की अवैध राशि वसूल की जा रही है इसकी जानकारी सभी अधिकारियों को होने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं किया जाना क्षेत्र के अधिकारियों की कार्यशैली को संदिग्ध बनाता है।