राजनीतिक बबंडर के बीच फंसा जहाजपुर, सरकारी स्कूल, कार्यालयों में स्टाफ की कमी, रहबर जातिवाद जिंदाबाद करके मस्त 

स्कूलों में टीचर्स की कमी है लेकिन शिक्षा विभाग ने उदार भाव रखते हुए क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों पर अपने कार्मिकों को लगा रखा है

September 18, 2022 12:43 pm
राजनीतिक बबंडर के बीच फंसा जहाजपुर, सरकारी स्कूल, कार्यालयों में स्टाफ की कमी, रहबर जातिवाद जिंदाबाद करके मस्त 

जहाजपुर (आज़ाद नेब) एक और जहां सरकार सरकारी स्कूलों में उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा करती है तो वहीं दूसरी ओर सरकार के इस दावे की पोल सरकारी स्कूलों की व्यवस्था ही कर रही है। जहाजपुर क्षेत्र की कई सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी तो हैं लेकिन गुरुजी नहीं है।

स्कूलों में टीचर्स की कमी है लेकिन शिक्षा विभाग ने उदार भाव रखते हुए क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों पर अपने कार्मिकों को लगा रखा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए राजस्थानी कहावत “घर का पूत कंवारा डोल पाडौसी का फैरा” चरितार्थ हो रही है।

क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में टीचर्स नहीं होने की वजह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापकों को फूटबॉल की तरह दूसरे कामों के लिए इधर से उधर भेज दिया जाता है। जिनकी सूध लेने वाला कोई नहीं अभिभावक अपने अपने कामों में व्यस्त हैं। क्षेत्र के नेता अपनी अपनी डफ़ली बजाकर जातिवाद जिंदाबाद करके मस्त हैं।

मिडिया हर क्षेत्र की समस्याओं के बारे समय समय आवाज उठाकर पर जनता को चेताया जाता रहा है लेकिन फिर भी जनता चुनावों में नेताओं की चिकनी चुपड़ी बातों आकर जातिवाद की भावनाओं में बहकर योग्य उम्मीदवार को नहीं चुनने से आमजन को ऐसे दिन देखने को मिल रहे हैं।

क्षेत्र के हर सरकारी स्कूल, कार्यालय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। लेकिन जिनको जनता अपना रहबर मानकर चल रही है वो आमजन की समस्याओं को दर किनार कर अपनी जेबें गरम करने में व्यस्त है।   

 

जहाजपुर क्षेत्र के अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेज, नगर पालिका, तहसील, उपखंड कार्यालयों सहित अन्य विभागों में कार्मिकों की कमी के चलते आमजन के कार्य समय पर नहीं होते है, स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक रहा है।

अस्पताल है लेकिन डॉक्टरों की कमी है, सरकारी कार्यालयों पर स्टॉप की कमी से जनता को बार बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जनता की इन सब समस्याओं को नजरंदाज करते हुए आवाज़ नहीं उठाने वाले क्या जहाजपुर क्षेत्र की रहबरी करने लायक़ है। आमजन की आवाज नहीं उठाने ऐसे रहबरों को समय आने पर सबक सिखाना चाहिए।

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