डर्टी पॉलिटिक्स की शिकार जहाजपुर पालिका, अपने आकाओं के आगे बेबस पार्षद

Jahazpur municipality

जहाजपुर (आज़ाद नेब)। दो सालों में नगर पालिका साधारण सभा की बैठक केवल एक बार ही होना ओर जिन पार्षदों को नगर व वार्ड के विकास के लिए जनता ने चुन कर भेजा वो अपने आकाओं के आगे नतमस्तक होकर चुप बैठना नगर विकास के लिए नहीं बोलना डर्टी पॉलिटिक्स का एक हिस्सा है।

अपने अधिकारों से अंजान पार्षद अपने आकाओं के आगे बेबस नजर आते है। पार्षद अपने क्षेत्र के विकास के लिए मंत्री, सांसद या विधायक से अपने हक की मांग लिए आगे आना होगा।

जनता ने जिन पार्षदों को अपने वार्ड या नगर विकास करने के लिए विश्वास जताया क्या वो जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है यह तो उनको अपने अंदर झांक कर महसूस करना चाहिए।

क्या नगर विकास के लिए पार्षदों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास रखते या नहीं या केवल अपने आकाओं की हां में हां करने में ही गौरवान्वित महसूस करते है। क्या पार्षदों को नहीं दिखता है कि अपने आसपास की नगरपालिका 

देवली या शाहपुरा में विकास कार्य हो रहे है वहां पर भी पार्टीयां मौजूद जो राजनीति भी करती लेकिन क्या हमारे यहां जिस तरह की पॉलिटिक्स वह सही या विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वाली यह समझना होगा।

क्या पार्षदों को नहीं लगता कि नगर विकास के लिए अपने आकाओं के बहकावे में न आकर एक साथ आवाज बुलंद करनी चाहिए। आसपास के पालिका क्षेत्रों के विकास की तरह यहां पर भी विकास होना चाहिए।

या अपने आकाओं की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर विकास कार्यों अड़चनें पैदा करनी चाहिए। इसके चलते पालिका की जनता को लगातार डर्टी पॉलिटिक्स का पात्र बन कर ही रहना पड़ रहा है।

वर्ष 2021-22 बजट घोषणा के अनूरूप राज्य सरकार द्वारा नगर में विकास के नाम पर केवल चार करोड़ पचास लाख रुपए के सीसी रोड़ बन रहे है। ओर चार करोड़ के सीसी रोड़ प्रस्तावित है। प्रशासन शहरों के संग अभियान के अंतर्गत पट्टे दिए जा रहे है।

कस्बे में जरूरतमंदो, मजदूरों व विभिन्न कार्यों के लिए बाहर से आये व्यक्तियों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण खाना उपलब्ध कराने की दृष्टि से ‘इंदिरा रसोई योजना’ जरूर प्रारम्भ की गई है।

इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना’ के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले परिवारों को भी उनके द्वारा मांगे जाने पर प्रतिवर्ष 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध करा रही है।

ओर सीवरेज सुविधा से वंचित 50 शहरों में Faecal Sludge Treatment Plants (FSTP) स्थापित किये जाने की घोषणा की गई थी। जिसमें भीलवाड़ा ज़िले के जहाजपुर, गंगापुर तथा शाहपुरा भी शामिल है जो कार्य भी अभी शुरू नहीं हुआ है।