भीलवाड़ा 15 साल से आवंटन के बाद भी पत्रकार कर रहे है भूखण्‍ड पर आशियाना बनाने का इंतजार

bhilwara UIT

 

भीलवाड़ा / मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजना के तहत पत्रकारों को 15 साल पहले भीलवाड़ा में भूखण्ड दिए गए लेकिन 13 श्रमजीवी पत्रकारों को भूखण्ड आवंटन और रजिस्ट्री के बाद भी न तो मकान निर्माण की स्वीकृति मिल पाई और न ही भूखण्ड । ऑडिट पैरा बनाकर इन भूखण्डों को अटका दिया गया है। जिससे यह मीडियाकर्मी अपना आशियाना बनाने के लिए अब भी इंतजार में है।

भीलवाड़ा के यूथ प्रेस क्लब के बैनर तले पिछले एक दशक से इस मामले को उठाया जा रहा है। लेकिन सरकार और राजनेता इस ओर कोई ठोस पहल नहीं कर पा रहे है जिससे जैस तैसे करके श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा भूखण्ड आवंटन के बाद आवंटन राशि और रजिस्ट्री लीज के लाखों रुपए न्यास में जमा करा देने के बावजूद वे भूखण्ड पर निर्माण के इंतजार में है।

न्यास के ही एक कर्मचारी द्वारा रंजिश के चलते 13 पत्रकारों को निशाना बनाया गया था। इनमें प्रदेश के बड़े इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया से जुड़े श्रमजीवी पत्रकार हीरानंद कृपलानी, राजकुमार माली, नवीन जोशी, दुर्गेश्वरी शर्मा, चेतन ठठेरा, स्व.सोहनलाल सोनगरा, कपिल शर्मा, सरोजनी शर्मा शामिल है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी पूर्व में यूथ क्लब प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजकुमार माली और सचिव नवीन जोशी, चेतन ठठेरा के साथ ही अन्य पत्रकारों ने मिलकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की । मुख्यमंत्री गहलोत ने सकारात्मक रूख दिखाया लेकिन ऑडिट पैरे का निस्तारण फिर भी नहीं हो पाया है जिसके चलते इन पत्रकारों के भूखण्ड भी निरस्त कर दिये गये। जिससे इनको लाखों रुपयों का खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है।

विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवाड़ी, राजकुमार माली, भाजपा नेता राकेश पाठक ने इस संबंध में लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष विजय बंसल से भी पैरे के निस्तारण की मांग की। इस पर बंसल ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया था और मामला विधानसभा की लेखा समिति तक पहुंच गया। इस पर अन्तिम फैसला होना है लेकिन अभी तक यह अटका हुआ है।

इस संबंध में राजस्व मंत्री रामलाल जाट, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ ही अन्य नेताओं से भी पत्रकारों ने पैरा निस्तारण की मांग की है लेकिन फिर भी भीलवाड़ा के इन 13 श्रमजीवी पत्रकारों को भूखण्ड नहीं मिल पा रहे है।

पत्रकारों का कहना है कि एक ओर तो कांग्रेस सरकार प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत एक रुपए में पट्टे बांट रही है लेकिन यहां पत्रकारों द्वारा लाखों रुपए जमा कराने के बावजूद उन्हें भूखण्ड नसीब नहीं हो पा रहे है।