भीलवाड़ा में न शादियों में , न चुनावो में, और न बाजारो में लागू धारा 144, फिर कहा लागू है …

Bhilwara News ।  कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर राजस्थान सरकार के आदेश पर भीलवाड़ा जिले में भी जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट शिव प्रकाश एम नकाते ने धारा 144 अर्थात निषेधाज्ञा लागू कर दी है सरकारी फाइलों और कागजों में तो यह निषेधाज्ञा लागू हो गई है लेकिन जमीनी धरातल पर वास्तविकता में धारा 144 मैं तो भीलवाड़ा शहर में और नहीं भीलवाड़ा जिले के ग्रामीण अंचलों में कहीं दिखाई दे रही है । ऐसे में ऐसी निषेधाज्ञा धारा 144 का क्या औचित्य है ? क्या सिर्फ कागजों तक ही इसको सीमित रखना है और बताना है कि धारा 144 लगी हुई है । क्या उसकी पालना कराना प्रशासन का दायित्व नहीं है ? और अगर दायित्व है तो कहां पालना कराई जा रही है? ऐसा तो कहीं प्रतीत नहीं होता ।

1– शहर हो या जिले का ग्रामीण अंचल शादियों की धूम धाम शुरू हो गई है और ग्रामीण अंचल की तो बात अलग ही शहरी क्षेत्र की स्थिति यह है कि डीजे पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी शहर के कॉलोनियों मोहल्लों और गलियों में शादी वाले घरों के बाहर, धर्मशाला होटलों और इस ऑटो में डीजे की आवाजें बेधड़क सुनाई दे सकती है और मौके पर जाकर देखो तो इस डीजे पर थिरकते हुए युवक युवतियां देखे जा सकते हैं जहां यह तो लोगों ने मास्क पहने हुए हैं और ना ही कोई सोशल डिस्टेंसिंग की पालना हो रही है और नहीं कहीं सैनिटाइजर जैसा नजर आता है । क्या जिला प्रशासन द्वारा इनको रोकने के लिए अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और ऐसा भी नहीं है कि डीजे साउंड की आवाज पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और कार्मिकों को सुनाई नहीं देती या नजर नहीं आती है ।

2– अब दूसरी बात शादियों के दौरान बाजारों में ढोल नगाड़े डीजे साउंड की आवाज सुनाई देना शुरू हो गई है यहां तक कि 10:00 बजे बाद भी तेज आवाज में डीजे साउंड की आवाजें सुनी जा सकती है शहरी क्षेत्र में शादियों के दौरान बाजारों में निकलने वाली बारातियों पर क्या धारा 144 लागू करा पाएगा जिला प्रशासन ?

3– अब तीसरी बात शादियों के दौरान शहर के रिसोर्ट होटल और बड़े-बड़े फार्म हाउस और टेस्ट की धर्मशाला ओं में महिला संगीत के कार्यक्रम आयोजित होंगे इसको लेकर बकायदा शादी समारोह वालों द्वारा तैयारियां भी पूरी कर ली गई है मतलब साउंड डीजे लाइट एंकर इन सब की बुकिंग की जा चुकी है और उसकी तैयारियां भी चल रही है यह आयोजन सामान्य व्यक्ति से लेकर शहर के राजनेता उद्योगपति तक के यहां आयोजित होने वाले हैं और यह कहना आसान है कि इस दौरान न तो मास्क का उपयोग होगा और नहीं सोशल डिस्टेंसिंग की पालना फिर क्या जिला प्रशासन ऐसे आयोजनों को रोकने के लिए अभी तक जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम उठाए गए हैं ?

4– और चौथी बार जिले के ग्रामीण अंचलों में शादी समारोह का आयोजन हो रहे हैं जहां प्रीतिभोज अर्थात भोजन व्यवस्था में सैकड़ों नहीं हजारों की संख्या में लोग एकत्र होंगे जिसे ग्रामीण क्षेत्रों की भाषा में कहा जाए तो 3 से 4 बोरी शक्कर की गले की मतलब तीन से चार बोरी शक्कर की मिठाइयों के रूप में उपयोग होगा तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोग जीमणे अर्थात भोजन करने आएंगे

5– पांचवी बात जिले में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हो रहे हैं ऐसे में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों द्वारा विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं क्या यहां पर भी धारा 144 की पालना हो रही है नहीं लेकिन वह धारा 144 की पालना के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया ।
6– छठी बात जिला मुख्यालय पर स्थित जिला कलेक्ट्री में रोजाना राजनीतिक दल संगठन संस्थाएं आदि द्वारा ज्ञापन देने के नाम पर 10 से 20 जन एकत्र होकर आते हैं यह दृश्य आसानी से देखा जा सकता है क्या यह धारा 144 की पालना का उल्लंघन नहीं है जब मुख्यालय पर ही धारा 144 की सख्ती से पालना नहीं हो पा रही है तो और जगह पालना होगी यह संभव नजर नहीं आता ।

सख्ती जरूरी

अगर वाक्य में धारा 144 लगाई गई है तो उसकी सख्ती से पालना भी जब तक नहीं होगी तब तक इस धारा के लगाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि धारा 144 कोरोना संक्रमण के बढ़ते रोगियों को देखते हुए इस पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लगाई गई है और इसे सख्ती से लागू नहीं किया जाता है तो इस उद्देश्य का कोई मतलब नहीं ऐसा मैं तो करो ना रुकने के बजाय और फैलेगा ।