भीलवाड़ा विस उपचुनाव – कांग्रेस और निर्दलीय पितलिया में मुकाबला,भाजपा रहेगी तीसरे पायदान पर

Bhilwara । भीलवाडा जिले की रायपुर सहाड़ा विधानसभा में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर भाजपा कांग्रेसी आरएलपी और और निर्दलीय उद्योगपति तथा भाजपा के बागी लादू लाल पितलिया के मैदान में कूदने और चारों ही प्रत्याशियों द्वारा कल नामांकन दाखिल करने तय होने के साथ ही तस्वीर साफ हो गई है की वर्तमान समीकरण को देखते हुए जैसा कि हमने पहले ही स्पष्ट किया था भाजपा की फूट कांग्रेस को जीत दिलाएगी और अब ऐसा ही नजर आ रहा है कि यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी उद्योगपति पितलिया के बीच होगा और भाजपा तीसरे नंबर पर लुढ़क जाए ऐसी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

इस उपचुनाव में कांग्रेस ने दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी को मैदान में उतारा है तो भाजपा की ओर से डॉ रतन लाल जाट पर दांव खेला जबकी आरएलपी ने व्यवसायी और भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रहे रूप लाल जाट के भाई बद्री लाल जाट को मैदान में उतारा है तथा पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को हराने वाले उद्योगपति जिसे हाल ही में भाजपा ने पार्टी में शामिल किया था और यह उद्योगपति लादू लाल पिपलिया भी भाजपा में इसी मंशा से शामिल हुए थे कि शायद उन्हें आने वाले चुनाव में पार्टी टिकट देगी लेकिन पार्टी द्वारा दरकिनार करने पर पितलिया ने बगावत करते हुए मतदाताओं के भरोसे एक बार फिर ताल ठोक दी है ।

 

पिछले विधानसभा चुनाव में लादू लाल पिपलिया को 30000 मतदाताओं ने मतदान किया था और इसका नतीजा यह रहा था कि भाजपा प्रत्याशी रूप लाल जाट करीब 7004 वोटों से चुनाव हार गए थे ।

भाजपा की स्थिति

भाजपा ने डाॅ रतन लाल जाट पर एक बार फिर दांव खेला है परंतु जैसा सर्वविदित और चर्चाओं का बाजार गर्म रहा था कि पिछले चुनाव में डॉक्टर जाट ने उद्योगपति पितलिया के साथ अंदर खाने से कार सेवा करते हुए रूप लाल जाट को हराने में भूमिका निभाई थी इस बार यही गणित दोराई जा रही है और हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरपीएल ने रूप लाल जाट के सगे भाई और व्यवसायी बद्री लाल जाट को टिकट दिया है राजनीतिक हलकों और बुद्धिजीवी वर्ग में चर्चा है कि भाई को यह टिकट सिर्फ बदला लेने के लिए ही दिलाया गया है ।

आरएलपी की टीमे प्रत्याशी बद्री लाल जाट के कल नामांकन दाखिल करने के साथ ही मतदान प्रक्रिया तक गंगापुर रायपुर सहाड़ा में डटी रहेगी और बेनीवाल ने अपने प्रत्याशी जाट के पक्ष में अधिकाधिक मतदान हो इसकी अच्छी खासी व्यूह रचना बना ली है और मतदान प्रक्रिया खत्म होने तक आरएलपी के कदीब 20 से 25 हजार कार्यकर्ता नेता विधानसभा क्षेत्र में डटे रहेंगे ।

डाॅ जाट के लिए पितलिया और बद्री बिछाऐंगे कांटे

डॉक्टर जाट स्वयं व्यक्तिगत रूप से बहुत ही सुलझे हुए एवं अच्छे व्यक्तित्व के धनी हैं लेकिन उनके एक पुत्र की कारगुजारियों का प्रभाव उनके चुनाव पर पड़ता है अर्थात उनके पुत्र के विरोध का सामना उनको झेलना पड़ता है

और इसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ेगा इसके साथ ही हाल ही में राम मंदिर निर्माण को लेकर दिए गए चंदे का चेक बाउंस होने के कारण समिति द्वारा उन्हें रसीद लौटा दी गई और इसको लेकर बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ताओं में जाट के प्रति रोष है।

यह हुआ उनका पहला नुकसान अब जाट को दूसरा नुकसान मिलेगा उद्योगपति लादू लाल पिपलिया के क्षेत्र रायपुर पंचायत समिति से रायपुर पंचायत समिति में 22 पंचायतें हैं और यहां पितलिया तथा कांग्रेस गायत्री देवी में ही मुकाबला होगा भाजपा यहां तीसरे नंबर पर रहेगी ।

डॉक्टर जाट को तीसरा नुकसान इस बार सुवाणा पंचायत समिति से होगा जहां 15 पंचायतें हैं और यहां हर बार भाजपा 15 ही पंचायतों में बढ़त लेकर जीतती आई है या इसे यूं कहें कि यहां कांग्रेस हमेशा हारी है लेकिन इस बार आरएलपी के बद्रीलाल जाट इन 15 पंचायतों में से अधिकांश वोट अपने पक्ष में खींचेंगे इसमे भी जाट बाहुल्य क्षेत्र होने से बद्री जाट को यहा फायदा मिलेगा और इसका सीधा नुकसान भाजपा के डॉक्टर जाट को होगा

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार आरएलपी के बद्री जाट 5 से 8 हजार बोट अपने पक्ष में ले सकते हैं कुल मिलाकर भाजपा अपने इस भीतरीघात के कारण रायपुर सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र की तीनों पंचायत समितियों सहाड़ा रायपुर और सुवाणा में पिछड़ेगी ।

कांग्रेस को स्थिति

कांग्रेस की स्थिति भी कोई सुदृढ नहीं है । पार्टी में ही जहां एक और गुटबाजी चल रही है वहीं दूसरी ओर परिवार में ही टिकट को लेकर जबरदस्त विरोध उभर कर सामने आ चुका है हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और रायपुर सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र की कमान संभाल रहे तथा भीलवाड़ा के प्रभारी मंत्री डॉ रघु शर्मा और संगठन के धर्मेंद्र राठौर की दखल से और प्रयासों से परिवार में सुलह जरूर हो गई और भाई राजेंद्र त्रिवेदी ने यह जरूर आश्वस्त कर दिया है कि वह कांग्रेस और अपनी भाभी को अधिकाधिक मतों से जीता कर यह सीट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की झोली में डालेंगे लेकिन राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि यह सिर्फ बाहरी तौर से दिया गया वचन है आंतरिक रुप से ऐसा कुछ नहीं है ।

रणनीतिकारों का दबी जुबान मे यह भी कहना है कि विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण जन प्रतिनिधि दिवंगत विधायक के अनमोल रत्नों के तानाशाह रवैयों से काफी हद तक परेशान हैं और इस परेशानी से अब वह मुक्ति पाना चाहते हैं दबी जुबान तो चर्चा यह भी है कि इन अनमोल रत्नों के रवैए और दखलंदाजी से तो प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी काफी दुखी हैं वह सब भी अब राहत चाहते हैं तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का एक गुट भी इस परिवारवाद को अब विराम देना चाहता है ऐसी स्थिति में अगर कांग्रेस में ही अंदर खाने से भीतरघात होता है तो कांग्रेस की जीत की संभावनाएं भी मुश्किल हो सकती है ।

और फिर ऐसे मे विकल्प के रूप में न भाजपा न कांग्रेस स्थानीय तथा समाजसेवी और गरीबों के मसीहा समझे जाने वाले लादू लाल पितलिया कहीं बाजी ना मार जाए ।