भीलवाड़ा में शीतला पूजन और त्यौहार के लेकर विरोधाभास, जनता असमजस में

Bhilwara । भीलवाड़ा शहर सहित जिले का प्रमुख त्यौहार रंगों का पर्व शीतला अष्टमी को लेकर शहर में विरोधाभास है और आम शहरवासी में इस त्यौहार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है । भीलवाड़ा शहर में शीतला पूजन को लेकर शहर के नगर व्यास पंडित लादुराम व्यास ने शीतला सप्तमी का पूजन और भीलवाड़ा की परंपरा के अनुसार होली खेलने का दिन 3 अप्रैल शनिवार बताते हुए इसकी घोषणा जारी की तथा बासेडा( ठंडा भोजन व्यजंन बनाना का दिन) शुक्रवार 2 अप्रैल को मनाने की घोषणा की है। जबकि दूसरी ओर ज्योतिष नगरी कारोई को ज्योतिष और पंडित गोपाल व्यास ने बासेडा 3 अप्रैल शनिवार को बताया और शीतला अष्टमी का पूजन व रंगोत्सव 4 अप्रैल शनिवार को बताया है ।

 

ज्योतिष पंडित गोपाल उपाध्याय ने बताया कि मेवाड़ रियासत काल से ही मेवाड़ में परंपरा रही है कि शीतला सप्तमी का त्यौहार सप्तमी को मेवाड़ राजाधिराज के परिवार में शौक होने के कारण मेवाड़ में शीतला अष्टमी का पूजन किया जाकर होली खेली जाती है और यह परंपरा मेवाड़ रियासत काल से ही अनव्रत चली आ रही है और इसी के तहत इस साल शीतला अष्टमी का पूजन रविवार 4 अप्रैल को या जाएगा और इसी दिन होली अर्थात रंगोत्सव मनाया जाएगा और 3 अप्रैल शनिवार को शास्त्रों के अनुसार आकरा वार माना जाता है इस दिन पूजा नहीं की जाएगी और शनिवार को बांसेड़ा मनाया जाएगा ।

 

शास्त्रों और मेवाड़ रियासत की परंपरा को लेकर और दोनों पंडित अलग-अलग मतांतर के कारण शहरवासी असमंजस की स्थिति में है कि शीतला पूजन 3 अप्रैल को किया जाए या 4 अप्रैल को